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इमली जुनूनी

इमली जुनूनी पर्यावरण मित्रता, कृषि जलवायु परिस्थितियों और मिट्टी की विशेषताओं का गहन ज्ञान सहित नवाचारों के प्रणेता वैज्ञानिक को …


इमली जुनूनी

इमली जुनूनी
पर्यावरण मित्रता, कृषि जलवायु परिस्थितियों और मिट्टी की विशेषताओं का गहन ज्ञान सहित नवाचारों के प्रणेता वैज्ञानिक को सैल्यूट

नंगे पैर वाला वैज्ञानिक हुनासे हुच्चा से युवाओं को हुनर की अभिप्रेरणा लेने की तात्कालिक ज़रूरत- एड किशन भावनानी

गोंदिया – वैश्विक स्तर पर विज्ञान तेजी के साथ विकसित और नवाचारों का आगमन हो रहा है परंतु आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रहीहै क्योंकि विभिन्न इनोवेशन,नवाचार नवोन्मेष तो पूरे विश्व में हो रहे हैं परंतु भारत जिस तरह रणनीतिक रोडमैप बनाकर अपने जनसांख्यिकीय तंत्र का कुशल तरीके से कौशलता विकास कर युवाओं में नवाचार, नवोन्मेष सहित स्टार्टअप्स में प्रवेश करवा रहा है और उसका परिणाम धीरे-धीरे दिखता जा रहा है जो भविष्य में तेजी से वैज्ञानिकों, नवाचारों की फौज खड़ी करने की आहट विश्व को दिख रही है उससे सारा विश्व हैरान है क्योंकि कोरोना महामारी के बाद एक नया माहौल नए विश्व नए भारत के संकेत नजर आ रहे हैं।
आज भारत को देखने के विश्व के नजरिए में बदलाव आता दिख रहा है। भारत हितेषी देश भारत को और मजबूत देखना चाहते हैं जिसमें हमारा जुनून और भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। अब समय आ गया है कि नए अवसरों, संभावनाओं संकल्पों की सिद्धि का जोश, हमें युवाओं में भरना है और नवाचारों, नवोन्मेष, विज्ञान, स्टार्टअप के क्षेत्र में युवाओं को प्रेरित करना है। मेरा मानना है कि आज समय ऐसा है कि हमारे भारतीय युवाओं को सिर्फ हिंट देने की ज़रूरत है!!! उसका रास्ता हमारे युवा खुद पहचान कर मंजिल पर पहुंचने में सक्षम है।
साथियों बात अगर हम हिंट देने की करें तो हाल ही में 26 जनवरी 2022 को 107 पद्मश्री, पदम भूषण सहित अनेक पुरस्कारों विजेताओं से स्वतःसंज्ञान लेकर, उनसे प्रेरणा लेने की ज़रूरत है। वैसे तो सभी पुरस्कार विजेता महान हैं फ़िर भी मैं यहां पद्मश्री सम्मान से सम्मानित कर्नाटक के धारवाड़ से एक जमीनी स्तर पर इनोवेटर के रूप में काम करने वाले श्री अब्दुल खादर नादकत्तिन अन्य (जमीनी स्तर पर नवाचार) श्रेणी में वर्ष 2022 के लिए घोषित 107 पद्मश्री पुरस्कार विजेताओं में शामिल हैं, की चर्चा करना चाहूंगा। उसमें नवाचार, नवोन्मेष और पर्यावरण मित्रता, कृषि जलवायु परिस्थितियों, मिट्टी की विशेषताओं का गहन ज्ञान सहित नवाचार के प्रणेता वैज्ञानिक से हमारे युवाओं को प्रेरित होने की ज़रूरत है और इस सोच की जरूरत है कि यह कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं!!! बस!!! ऐसी सोच रखें तो हम भी ज़रूर नवाचारों के प्रणेता बनेंगे।
साथियों बात अगर हम इस 2022 के पद्मश्री वैज्ञानिक को जानने की करें तो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा 27 जनवरी 2022 को जारी पीआईबी के अनुसार, इमली से संबंधित नवाचारों के उनके पोर्टफोलियो के कारण, लोग उन्हें हुनासे हुच्चा कहने लगे, जिसका अर्थ है इमली के लिए पागल। इसकी शुरुआत दुर्लभ लेकिन क्षारीय पानी के साथ इमली उगाने में उनकी सफलता के साथ हुई जो आगे चलकर पेड़ से इमली की कटाई की तकनीक और इमली के बीजों को अलग करने के लिए अत्यधिक स्वीकृत मशीन जैसे प्रयोगों के साथ आगे बढ़ी। इसने उन्हें इमली काटने के लिए एक मशीन विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

इमली के साथ सफलता को आगे बढ़ाने के लिए, उन्होंने गहरी जुताई, बीजों की बुवाई, और ईंधन-कुशल जल तापन बॉयलर जैसे कृषि कार्यों को संबोधित करने के लिए नवाचारों को विकसित किया। श्री इमली जुनूनी एक सीरियल इनोवेटर हैं, और उनके प्रमुख नवाचारों में इमली के बीज को अलग करने के लिए एक उपकरण, जुताई ब्लेड निर्माण मशीन, बीज सह उर्वरक ड्रिल, वाटर-हीटिंग बॉयलर, एक स्वचालित गन्ना बुवाई ड्रिलर और एक व्हील टिलर शामिल हैं। उनके सभी नवाचार स्थिरता, लागत-प्रभावशीलता,पर्यावरण -मित्रता और सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक स्वीकृति के सिद्धांतों को प्रदर्शित करते हैं।
कृषि-जलवायु परिस्थितियों और मिट्टी की विशेषताओं के उनके गहन ज्ञान ने उन्हें देश के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बना दिया है। श्री इमली जुनूनी को भारत सरकारके विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के एक स्वायत्त निकाय नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन द्वारा 2015 में एनआईएफ के 8वें नेशनल ग्रासरूट इनोवेशन एंड आउटस्टेंडिंग ट्रेडिशनल नॉलेज अवार्ड्स के दौरान लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
भारत के तत्कालीन माननीय राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी द्वारा श्री नादकत्तिन को यह पुरस्कार प्रदान किया गया था। अपने जमीन से जुड़े होने की भावना के अनुरूप और पुरस्कार के सम्मान में उन्होंने नंगे पैर चलकर इसे ग्रहण किया था। तभी से उन्हें देश का नंगे पैर वाला वैज्ञानिक के रूप में जाना जाने लगा।
उनका पहला नवाचार वॉटर अलार्म था, जो सुबह देर तक सोने की उनकी अपनी आदत को बदलने का उनका व्यक्तिगत प्रयास था। उन्होंने अलार्म की चाबी के सिरे पर एक पतली रस्सी इस तरह बांध दी कि जब चाबी घूमती तो साथ में रस्सी भी घूम जाती। ऐसे में रस्सी से बंधी पानी की बोतल के पलटने से नीचे सोते हुए इमली जुनूनी पर पानी गिरता और उन्हें वे नींद से जाग जाते। बाद में उन्होंने कृषि-प्रौद्योगिकियां और उपकरण विकसित किए जो आधुनिक कृषि के साथ प्रासंगिकता बनाए रखते हुए स्थानीय लोगों के लिए विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करते।
लगातार कई वर्षों से, जमीनी स्तर के नवोन्मेषकों को पद्म पुरस्कारों की विभिन्न श्रेणियों में मान्यता दी जा रही है, जो भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक है। ये विभिन्न विषयों जैसे साहित्य और शिक्षा, कला, विज्ञान और इंजीनियरिंग, व्यापार, उद्योग, सिविल सेवा, सार्वजनिक मामले, खेल और चिकित्सा आदि के क्षेत्र में दिए जाते हैं। ऐसे कार्यों को मान्यता दी जाती है जिससे आगे की पीढ़ी को कुछ नया इजाद करने की प्रेरणा मिले।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि इमली जुनूनी!! पर्यावरण मित्रता, कृषि जलवायु परिस्थितियों और मिट्टी की विशेषताओं के गहन ज्ञान सहित नवाचारों के प्रणेता वैज्ञानिक को सैल्यूट! नंगे पैर वाला वैज्ञानिक हुनासे हुच्चा से युवाओं को हुनर की अभिप्रेरणा लेने की तात्कालिक ज़रूरत है।

-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ 
एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


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