Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Aalekh, lekh, Veena_advani

इंसानियत को शर्मसार करती एक धांधली

इंसानियत को शर्मसार करती एक धांधली Pic credit -freepik.com बैचेन मन इतना दु:ख से भरा की लिखना भी चाहूं पीड़ा …


इंसानियत को शर्मसार करती एक धांधली

Helpless
Pic credit -freepik.com

बैचेन मन इतना दु:ख से भरा की लिखना भी चाहूं पीड़ा दिल की पर लिख ना पा रही थी ,दो दिन से शब्दों को दिल के भीतर ही , मेरा घायल दिल समाने ही नहीं दे रहा था , कुछ शब्द लिखती फिर मिटा देती , फिर लिखती फिर मिटा देती बस इस क्रम में दो दिन निकल गये , पर आज बस मन कि व्यथा पर बोझिल सा पत्थर रखा पाया तो सोचा , लेखिका हूं मैं , नहीं लिखूंगी तो ये मेरी नजरों में एक गुनाह होगा , लेखिका होने का दायित्व निभा मुझे एसे ही देश के बहुत से राज्यों में चल रही धांधली को सामने लाना था , ये धांधली किसी भी सम्मानित अधिकारियों से संबंधित नहीं है । ये धांधली तो वो धांधली है जो आम जनता द्वारा ही , आम जनता को लूटने की कोशिश है जिसमें वो अकसर सफल भी हो जाते हैं ये एसी धांधली है जिसके अंतर्गत बहुत ही मजबूर इंसांन को इस तरह लूटा जाता हे कि वो बेबस हो लुटने को तैयार हो जाता है स्वयं , केवल ये सोच की आज भी दुनिया में इंसानियत जिंदा है , इतना अधिक विश्वास इस कल युग में की , खुद को ठगा हुआ देख कर दुखी होकर सिर्फ समाज से सिफारिश करता अपने परिवार के किसी सदस्य को बचाने के लिए जो अस्पताल में रक्त की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा , जिसमें उसको कोई भी रक्त देकर नया जीवन दान दे सके पर ये क्या रक्तदान के नाम पर उसके साथ उस दुखद घड़ी में धांधली हो जाती जब पहले से ही उस के सर पर चिंता और दुखों का भारी पहाड़ पड़ा हो ।जी हां मैं बात कर रही उस धांधली की जिसमें यदि किसी के परिवार के सदस्य को ब्लड चाहिए और वो ब्लड के लिए दान दाताओं की तलाश करता , विभिन्न सामाजिक संस्था से संपर्क भी करता जिससे एक शहर के अस्पताल की खबर पूरे भारत देश में वायरल हो जाती विभिन्न एपस से जुड़ी सामाजिक संस्थाओं के द्वारा कि फलाने शहर के फलानी अस्पताल में फलाने मरीज़ को रक्त की जरूरत है । जिसके चलते खबर पाते ही बहुत सी संस्थाएं मरीज के परिचित से संपर्क करती हैं सहयोग में आशा की किरण देकर , परंतु कुछ लोग एसे होते हैं , जो खबर पाते ही मरीज के परिचित से संपर्क कर सहयोग के लिए एक रकम की मांग करते हैं , मरीज के परिचित बताई राशि दे भी देते हैं परंतु उन्हें ये नहीं पता होता कि वो जिन पर आंख बंद करके विश्वास कर रहे हैं । वो ही उनके जज़्बातों और विश्वास को घायल कर देंगे । बहुत से लोग रक्त दान के नाम पर पैसा तो ले लेते हैं पर पैसा मिलने के बाद जाते तक नहीं रक्त दान करने । वो पैसा मिलने के बाद या तो अपना फोन बंद कर लेते हैं, या तो वो फोन उठाते ही नहीं , बेबस लुटा हुआ मरीज का परिचित जैसे-तैसे पैसे का बंदोबस्त कर अपने को बचाने की कोशिश करता है और वही पैसा जब डूब जाता है तो छलनी-छलनी हो जाता उसका दिल । बहुत बार हमारे द्वारा अटेंडेंट को समझाया जाता कि आप पैसा मत देना , अगर आप अपनी स्वेच्छा से देना चाहते तो भी आप जब मरीज को कोई रक्तदान कर दे उसी के बाद देना , पर मजबूर मरीज के परिचित को बस कैसे भी करके अपने परिवार के सदस्य को बचाना होता है फिर क्या वो रक्त दान से पहले ही आनलाईन या कैसे भी करके पैसा दे देता और फिर खुद अपने ही हाथों लुटा सा नजर खुद को पाता है । एसे धांधली करने वाले नकाबपोश चेहरों पर से पर्दा हटाना बहुत जरूरी है । या तो दूसरा रास्ता यही है कि अटेंडर सावधान रहे । हम समाजसेवी सिर्फ समझा सकते और कोशिश कर सकते सहयोग की हर मरीज की । हाल ही में लखनऊ के केस में एक मरीज के परिचित के साथ यही हुआ जो बिहार राज्य से आए थे इलाज करवाने और अपने ही इंसानियत भरे दिल से सोच कि इंसानियत अभी जिंदा है , विश्वास कर पैसे दिए और कोई भी सहयोग प्राप्त नहीं हुआ । इस विश्वास पर ऑनलाइन पैसे भेज दिए ,फिर क्या था खाते में पैसा जाते ही मोबाइल का स्विच ऑफ कर दिखावे की इंसानियत का गला घोंट दिया जाता है। यही कहानी होती जा रही इंसानियत के सौदागरों की । अब हमें इन नकाबपोस इंसानियत के सौदागरों से सावधान रहना पड़ेगा। किसी अनजाने को रक्तदान के नाम पर तीन सौ ,चार सौ ,पांच सौ रुपये खाते में डालने से बचना पड़ेगा। अब बताएं आज कौन किस पर और कैसे यकीन करे की इंसानियत अभी जिंदा है , इंसानियत को तार-तार करती रक्त दान के नाम पर हो रही ये धांधली , उस समय हो रही जब मरीज़ के परिचित अपने परिवार के मोह में आतुर हो उसे बचाने के लिए हर एक संभव वो कोशिश कर रहे कि काल के आगे वो जीत अपने परिवार के सदस्य को नवजीवन दे खुशियों संग जीवन व्यतीत करें , एसे में वो किसी भी तरह लोगों के बहकावे में आकर पैसे तो दे देते हैं , पर उन्हें क्या पता होता है कि वो शिकार बन रहे रक्त दान के नाम पर उन लुटेरों का जो इंसान और इंसानियत के नाम पर बस एक काला कलंक है । चाहकर भी अपने मुंह ना मोड़ पाई अपने दायित्व से , लेखिका हूं समाज सेविका भी हूं हो सकता है कोई लुटेरा इस तरह कि जो लूट करता है वो मेरे जज़्बातों कि स्याही से उंडेले शब्द पढ़ ले और उसे खुद पर ग्लानि हो । यदि कलम से लिखे जज़्बातों को पढ़ एक भी लुटेरा जो रक्त दान के नाम पर पैसा लेकर लूट रहा मजबूरों को वो सुधर जाता है उसका मन उसे एसा करने से रोकता है तो मेरा लिखना सार्थक हो जाएगा ।

About author 

Veena advani

वीना आडवाणी तन्वी
नागपुर , महाराष्ट्र


Related Posts

Lekh ek pal by shudhir Shrivastava

July 11, 2021

 लेख *एक पल*         समय का महत्व हर किसी के लिए अलग अलग हो सकता है।इसी समय का सबसे

zindagi aur samay duniya ke sarvshresth shikshak

July 11, 2021

 जिंदगी और समय ,दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक जिंदगी, समय का सदा सदुपयोग और समय, जिंदगी की कीमत सिखाता है  जिंदगी

kavi hona saubhagya by sudhir srivastav

July 3, 2021

कवि होना सौभाग्य कवि होना सौभाग्य की बात है क्योंकि ये ईश्वरीय कृपा और माँ शारदा की अनुकम्पा के फलस्वरूप

patra-mere jeevan sath by sudhir srivastav

July 3, 2021

पत्र ●●● मेरे जीवन साथी हृदय की गहराईयों में तुम्हारे अहसास की खुशबू समेटे आखिरकार अपनी बात कहने का प्रयास

fitkari ek gun anek by gaytri shukla

July 3, 2021

शीर्षक – फिटकरी एक गुण अनेक फिटकरी नमक के डल्ले के समान दिखने वाला रंगहीन, गंधहीन पदार्थ है । प्रायः

Mahila sashaktikaran by priya gaud

June 27, 2021

 महिला सशक्तिकरण महिलाओं के सशक्त होने की किसी एक परिभाषा को निश्चित मान लेना सही नही होगा और ये बात

Leave a Comment