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आभासी दुनियाँ- सरस्वती मल्लिक

आभासी दुनियाँ अद्भुत है बहुत ,यह आभासी दुनियाँप्यारी है बहुत ,जैसे सपनों की दुनियाँमित्र मिले यहाँ बहुत ,बनी नए रिश्तों …


आभासी दुनियाँ

आभासी दुनियाँ- सरस्वती मल्लिक

अद्भुत है बहुत ,
यह आभासी दुनियाँ
प्यारी है बहुत ,
जैसे सपनों की दुनियाँ
मित्र मिले यहाँ बहुत ,
बनी नए रिश्तों की दुनियाँ
दुखी होता है मन बहुत ,
देखने को मिलता है जब
दोहरे चरित्र वालों की दुनियाँ
खुशी मिलती है बहुत
जब कोई अनजान , अनदेखा
कहता है मुझको बहन और प्यारी बिटिया
देता है आशीष बहुत ,
कहता है “खुश रहो सदा तुम,
आबाद रहे तुम्हारी दुनियाँ “
आते हैं यहाँ बहुत ,
उद्देश्य होता है जिनका सिर्फ दिल बहलाना ,
रहना सदा सावधान
कभी इनकी बातों में न पड़ना ,
घातक है बहुत ,
मीठी बातों से बहकाने वालों की दुनियाँ,
आवश्यक है बहुत ,
जरूरत है सबकी ,
यह आभासी दुनियाँ
फँसना नहीं कभी
किसी के मोहजाल में
बर्बाद हो सकती है ,
वरना हमारी दुनियाँ ।

मौलिक, स्वरचित
सरस्वती मल्लिक
मधुबनी, बिहार


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