Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

आधे अधूरे अरमान- जयश्री बिरमी

आधे अधूरे अरमान अरमानों की चाह में दौड़ी हुं बहुत इश्क की भी तो थी चाहत गहरी चाहतों में घीरी …


आधे अधूरे अरमान

आधे अधूरे अरमान- जयश्री बिरमी

अरमानों की चाह में दौड़ी हुं बहुत
इश्क की भी तो थी चाहत गहरी
चाहतों में घीरी हुई चली भी हुं बहुत
न उठा पाई चाहतों के बोझ को
चलते चलते थकी थी भी बहुत
भूली थी अपनी हस्ति चाहतों की चाह में
मेहनतों के आलम में वक्त की कसौटियों ने
लीये है इम्तहान जो नहीं थे आसान

खुद डूब के भी न डूबने दिया कारवां
आए हुए उन
अश्कों को तो जज्ब्ब कर गई अखियां
आहे भी तो न निकली लिहाज से सिले होटों से
न निकले चाहे दिल के अरमान
जिंदगी गुजरती चली गई
न था माझी और न ही कोई पतवार
बिन पतवार ही खेई थी जो नैया
क्या
आके किनारे तक भी डूब जायेगी

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

सुनियोजित अभियान- जितेंद्र कबीर

November 23, 2021

 सुनियोजित अभियान एक आठवीं फेल नौजवान  इतिहास के एक अध्यापक से बहस के दौरान देकर पूरे इतिहास को झूठा और

बड़े चालाक हो मेरे प्रभु – सिद्धार्थ गोरखपुरी

November 23, 2021

 बड़े चालाक हो मेरे प्रभु  बड़े चालाक हो मेरे प्रभु हर गुत्थी सुलझाए रखते हो। बस हमे ही जीवन मृत्यु

मिलन – अनीता शर्मा

November 23, 2021

 मिलन हो रहा है मधुर मिलनसुदूर गगन धरा का यूँगोधूली की क्षितिज बेला में। गवाह चाँद सितारे हैंगगन ने झुक

कविता- माई से- सिद्धार्थ गोरखपुरी

November 23, 2021

 कविता- माई से हम कितने क़ाबिल है ये कमाई तय करती है। हम हमेशा से क़ाबिल हैं ये बस माई

सफर – अनीता शर्मा

November 23, 2021

 सफर जिंदगी में चुनौतियां बहुत है मगर….. डगर मुश्किल भरी है। सफर तो चुनौतियों भरा है मगर…… बढ़ते जाना बाधाओं

प्रेम हमेशा रहेगा- जितेन्द्र ‘कबीर’

November 23, 2021

 प्रेम हमेशा रहेगा मजबूरियां सांसारिक हैं हमारीख़त्म हो जाएंगी देह के साथ ही,लेकिन प्रेम अमर है आत्मा की तरहरहेगा तब

Leave a Comment