Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

आधे अधूरे अरमान- जयश्री बिरमी

आधे अधूरे अरमान अरमानों की चाह में दौड़ी हुं बहुत इश्क की भी तो थी चाहत गहरी चाहतों में घीरी …


आधे अधूरे अरमान

आधे अधूरे अरमान- जयश्री बिरमी

अरमानों की चाह में दौड़ी हुं बहुत
इश्क की भी तो थी चाहत गहरी
चाहतों में घीरी हुई चली भी हुं बहुत
न उठा पाई चाहतों के बोझ को
चलते चलते थकी थी भी बहुत
भूली थी अपनी हस्ति चाहतों की चाह में
मेहनतों के आलम में वक्त की कसौटियों ने
लीये है इम्तहान जो नहीं थे आसान

खुद डूब के भी न डूबने दिया कारवां
आए हुए उन
अश्कों को तो जज्ब्ब कर गई अखियां
आहे भी तो न निकली लिहाज से सिले होटों से
न निकले चाहे दिल के अरमान
जिंदगी गुजरती चली गई
न था माझी और न ही कोई पतवार
बिन पतवार ही खेई थी जो नैया
क्या
आके किनारे तक भी डूब जायेगी

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

हाजिर जवाबी अटल बिहारी- डॉ. इन्दु कुमारी

December 27, 2021

हाजिर जवाबी अटल बिहारी देश की माटी ने दी सदाअमूल्य तोहफ़ा निशानीवीरता के परचम कोलहराते रहे हैं बलिदानी उन्हीं श्रेणी

रणछोड़ – डॉ. इन्दु कुमारी

December 27, 2021

शीर्षक -रणछोड़ जिस बातों की है वियोगछोड़ कर भागा रणछोड़ढूँढती है नैना तुझकोभूल गए सलोने मुझको वेदना हमें मिले उपहारक्या

बिकते – बहकते वोटर- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 27, 2021

बिकते – बहकते वोटर लोकतंत्र में… वोट के अधिकार के लिएकिसी योग्यता या मेहनत कीजरूरत नहीं पड़ती,बस पैदा होना ही

नंबर आएगा सभी का- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 27, 2021

नंबर आएगा सभी का कत्ल नहीं हुआ अब तक हमारा धर्म मानने वालों में से किसी का,हमारी जाति में से

कोई कुछ साथ न ले जा पाया- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 27, 2021

कोई कुछ साथ न ले जा पाया रिश्वतें देकर रुपयों-पैसों,कीमती धातुओं, हीरे-जवाहरात की,दिन-रात स्तुति गान में रमे रहकर,सौदे बहुत किये

साड़ी- सुधीर श्रीवास्तव

December 27, 2021

साड़ी साड़ी सिर्फ़ परिधान नहींस्त्री गौरव की भी शान हैसाड़ी विश्व में भारतीय नारियों कामान सम्मान स्वाभिमान है। साड़ी में

Leave a Comment