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आत्मविश्वास सफलताओं की सीढ़ी है

आत्मविश्वास सफलताओं की सीढ़ी है!!! मैं सर्वश्रेष्ठ हूं, यह आत्मविश्वास है लेकिन मैं ही सर्वश्रेष्ठ हूं यह अहंकार!! अहंकार असफ़लताओं …


आत्मविश्वास सफलताओं की सीढ़ी है!!!

आत्मविश्वास सफलताओं की सीढ़ी है
मैं सर्वश्रेष्ठ हूं, यह आत्मविश्वास है लेकिन मैं ही सर्वश्रेष्ठ हूं यह अहंकार!!

अहंकार असफ़लताओं का वह घड़ा है, जिसका भरकर फूटना निश्चित है – नम्रता, ईमानदारी, शांतिप्रियता सफ़ल जीवन के मूल मंत्र- एड किशन भावनानी

गोंदिया – पृथ्वीलोक पर सृष्टि में सबसे बुद्धिमान जीव मानव की जब से उत्पत्ति या संरचना हुई है, रचनाकर्ता ने गुण अवगुण का पिटारा भी साथ में सृष्टि पर संलग्न कर दिया!!! इस सृष्टि पर सर्वश्रेष्ठ प्राणी मानव, अपनी बुद्धि कौशलता के आधार पर उस पिटारे में से चुनकर अपने जीवन यात्रा में सलंग्न करें!!! पिटारे में कई गुणों के रूप में अच्छाई, आत्मविश्वास, परोपकार, नम्रता, दीनता, शांतिप्रियता, मनोबल, उत्साह जैसे हजारों पुष्प और अवगुणों के रूप में अहंकार, दुष्टता, गुस्सा, मैं मैं, धोखा, कुटिलता, क्रोध, द्वेष, दुष्चक्र रूपी हजारों बेशर्म की पत्तियां समाहित है!!!
साथियों बात अगर हम उस पिटारे में मानव द्वारा उठाए गए गुणों रूपी पुष्प, अवगुणों रूपी बेशर्म पत्तियों की करें तो हजारों वर्ष पूर्व आदि-अनादि प्राचीन काल से ही हमें इन दोनों स्वरूपी मानव की चर्चा इतिहास में दर्ज पढ़ने को मिली है, जिसका भारतीय स्तरपर राम-रावण कृष्ण-कंस वैश्विक स्तरपर हिटलर, अनेक तानाशाह सहित अनेक हमारे सामने उदाहरण हैं जो आज तक के युग में भी आधुनिक मानव इसी तर्ज पर भी हैं और आगे भी होते रहेंगे!!! बस हम इस आर्टिकल द्वारा सीखना है कि उस पिटारे में से हमें पुष्प ही चुनकर लेनाहै न कि बेशर्म की पत्तियां हर उदाहरण में मेरा पक्ष सकारात्मकता की ओर है!!
साथियों बात अगर हम आज के विषय आत्मविश्वास और अहंकार की करें तो इन दोनों शब्दों में ही पिटारे के गुण- अवगुण का मूल समाया हुआ है सबसे पहले हम चर्चा आत्मविश्वास की करेंगे कि हर व्यक्ति को यह पुष्प उसके जीवन की सफ़लता के हर पड़ाव पर अत्यंत जरूरी है उसे सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए आत्मविश्वास उसकी सफ़लता की पहली सीढ़ी है जिसके सहारे वह आगे बढ़ने में सक्षम होगा।
साथियों आत्मविश्वास मनुष्य के अंदर ही समाहित होता है। आपको इसे कहीं और अन्य जगह से लाने की जरूरत नहीं है। यह आपके अंदर ही है, बस जरूरत है अपने अंदर की आंतरिक शक्तियों को इकट्‍ठा कर अपने आत्मविश्वास को मजबूत करने की!!! वर्तमान समय में अगर हमें कुछ पाना है, किसी भी क्षेत्र में कुछ करके दिखाना है, जीवन को खुशी से जीना है, तो इन सबके लिए आत्मविश्वास का होना परम आवश्यक है। आत्मविश्वास में वह शक्ति है जिसके माध्यम से हम कुछ भी कर सकते है। आत्मविश्वास से हमारी संकल्प शक्ति बढ़ती है और संकल्प शक्ति से बढ़ती है हमारी आत्मिक शक्ति।
साथियों बात अगर हम आत्मविश्वास के बल पर वैश्विक प्रसिद्ध महामानव द्वारा अपने विज़न की सफलताओं की करें तो, इसी आत्मविश्वास ने कोलंबस को अमेरिका की खोज़ में सहयोग दिया था। नेपोलियन ने इसी शक्ति से ओतप्रोत होकर अपने सेनापति से कहा था कि यदि आल्पस पर्वत हमारा मार्ग रोकता है तो वह नहीं रहेगा और सचमुच उस विशाल पर्वत को काटकर रास्ता बना लिया गया। महात्मा गांधी भी इस आत्मविश्वास के बल पर सत्य और अहिंसा के अस्त्र बनाकर स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। अंततः वे भारत माता की दासता रूपी बेड़ी को काटने में सफल रहे।
साथियों अब्राहम लिंकन ने अथक प्रयास कर दासों को मालिकों के शिकंजे से मुक्त कराया। उन्होंने अपनी डायरी में लिखा था कि मैंने अपने ईश्वर को वचन दिया है कि दासों की मुक्ति का कार्य अवश्य पूरा करूंगा। इमर्सन का कथन है- संसार के सारे युद्धों में इतने लोग नहीं हारते, जितने कि सिर्फ घबराहट से। इसलिए अपने ऊपर विश्वास रखकर ही आप दुनिया में बड़े से बड़ा काम सहज ही कर सकते हो और अपना जीवन सफल बना सकते हो।
साथियों आत्मविश्वास एक ऐसा मंत्र है, जिसके आगे सारे संकट दूर हो जाते हैं। दृढ़ इच्छाशक्ति वाले के सामने मुसीबतों का पहाड़ भी सपाट मैदान की तरह बन जाते हैं और जिनके पास इसकी कमी होती है वह छोटी-मोटी समस्याओं से भी इतने घबरा जाते हैं कि उससे बचने के उपाय ढूंढ़ते-ढूंढ़ते खुद ही अपने आस पास के लोगों के लिए मुसीबत बन जाते हैं। इतिहास गवाह है कि कई लोगों ने केवल अपने आंतरिक ताकत के बल पर ही साम्राज्य कायम किया, नहीं तो एक सामान्य से मुखिया के घर में पैदा हुआ चंद्रगुप्त मौर्य कभी सम्राट नहीं बनता।
साथियों अगर हम इतिहासको खंगालें तो विश्व के अधिकांश महानतम व्यक्ति चाहे वो गांधी हों या फिर माक्र्स, सभी के जीवन की शुरुआत सधारण तरीके से हुई, कठिन परिस्थितियों से जूझते हुए उन्होंने अपने जीवन का सफ़र शुरू किया लेकिन आत्मविश्वास की दृढ़ता की वजह से ही कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए वैश्विक मानव की श्रेणी में पहुंचे।
साथियों बात अगर हम अहंकार की करें तो प्राचीन काल से लेकर आज तक के युग में जिसने भी अहंकार किया है या मैं मैं, मैं ही सर्वश्रेष्ठ हूं, मेरे जैसा कोई नहीं रूपी बेशर्म की पत्तियों का चुनाव किया है वह आखिर नष्ट हुआ है!!! यह अवगुण रूपी पिटारे की पत्तियां मानव को नष्ट कर डालती है!!! क्योंकि यह अवगुण मानव का शत्रु है जो किसी भी क्षेत्र में अपने आप को सर्वश्रेष्ठ समझकर और अहंकार करते हैं उनका विनाश हुआ है! अहंकार चूर चूर हुआ है!! जो हमने रावण, कंस, हिटलर सहित आज के युग में भी अनेक मानव देखे हैं जिनका सब कुछ नष्ट हुआ है क्योंकि अहंकार की खाई रूपी फिसलन पर जिसने भी पैर रखा है वह उस खाई में फिसलता ही गया है!!! वह न केवल खुदको बल्कि अपने कुल, कुटुंब को भी इस खाई में धकेलकर बहा ले जाता है।
साथियों बात अगर हम पिटारे से पुष्प उठाने के सकारात्मक फायदों की करें तो हम कितने भी सर्वश्रेष्ठ हो परंतु मैं मैं का भाव कभी अपने अंदर नहीं घुसने देना है!! मानाकि तुम बहुत बड़े टॉप लेवल के अधिकारी, नेता, व्यवसाई, व्यापारी विधि विशेषज्ञ, स्वास्थ्य विशेषज्ञ, तांत्रिक विशेषज्ञ या किसी भी क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञ हो तो भाव यह होना चाहिए कि आप यह सोचिए कि आप के मुकाबले दुनिया में कोई और तुमसे अच्छा जरूर होगा!!! और सिर्फ़ मैं तक सीमित होना है नकि केवल मैं ही और मैं मैं को अपने अंदर पनपने देना है!!! क्योंकि यहीं से अहंकार, घमंड की उत्पत्ति होती है जिससे अपने आप को बचाना है!!! क्योंकि अहंकार असफलताओं का वह घड़ा है जिसका भरकर फूटना तय है जबकि नम्रता, नींवांपन और शांतिप्रियता सफ़ल जीवन का मूल मंत्र है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि आत्मविश्वास, सफलताओं की सीढ़ी है, मैं सर्व श्रेष्ठ हूं यह आत्मविश्वास है, लेकिन सिर्फ मैं ही सर्वश्रेष्ठ हूं यह अहंकार है!!! अहंकार सफ़लताओं का वह घड़ा है जिसका भरकर फूटना तय है!!! नम्रता, नींवांपन, ईमानदारी और शांतिप्रियता सफ़ल जीवन के मूल मंत्र है।

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


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