Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

आज फिर देखा चांद- जयश्री बिरमी

आज फिर देखा चांद सुबह से भूखी प्यासी सीडोल रही थी गली गली कोई भी न था राजी देने को …


आज फिर देखा चांद

आज फिर देखा चांद- जयश्री बिरमी
सुबह से भूखी प्यासी सी
डोल रही थी गली गली

कोई भी न था राजी देने को उसे रोटी
दम मारके चली जा रही थी

बस सिर्फ नहीं थी रोती
दुखो का पहाड़ उठाये दबी थी बोझ तले

चाहकर भी नहीं कर पाती थी चोरी
मांग के खाना था उसे खाना

किंतु न आई किसी को भी उस पर दया
क्या दुनियां से उठ चुकी हैं शर्म– ओ– हया

दुखते खाली पेट की पीड़ा से दुःखी
उम्र के जैसे चलती रही वह सुबह से शाम

आई रात तो आशा छोड़ बैठी ले के ऊपरवाले का नाम
नाम लिया तो देखा उपर शायद वह दिख जाएं
और क्या!

देखा नभ पर तो दिख गई गोल गोल रोटी
खुश हो हाथ बढ़ाया तो भी हाथ न आई रोटी

ध्यान से देखा तो था वो चांद
किंतु दिख रहा था जैसे रोटी

स्वास छोड़ कराहती सी
वह
बूढ़ी हड्डियों के दर्द से या भूख से
चली गई आगोश में नींद के
या फिर बेहोशी के

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

ए-जमीन-ए-वतन ,ए-ज़मीन-ए-वतन -मईनुदीन कोहरी”नाचीज़ बीकानेरी”

January 25, 2022

ए-जमीन-ए-वतन ,ए-ज़मीन-ए-वतन । ए-जमीन-ए-वतन ,ए-ज़मीन-ए-वतन ।तुझको मेरा नमन , तुझको मेरा नमन ।। आबरू तेरी जाने नां देंगें कभी ।

दे दो दर की नौकरी सतगुरु जी एक बार

January 24, 2022

भज़नदे दो दर की नौकरी सतगुरु जी एक बार दे दो दर की नौकरी सतगुरु जी एक बार बस इतनी

गणतंत्र दिवस के उपलक्ष में…

January 24, 2022

गणतंत्र दिवस के उपलक्ष में…. नन्हीं कड़ी में…. आज की बात जीना चाहता हूँ… (कविता…) मैं भी किसी के आँख का तारा

हिंदू राष्ट्र-दीप मदिरा

January 24, 2022

हिंदू राष्ट्र मैं हिंदू राष्ट्र का समर्थक हूं। अगर तुम देने को तैयार हो समानताकिसी को नहीं बता रहे हो

आगे बढ़ते हैं!-डॉ. माध्वी बोरसे!

January 24, 2022

आगे बढ़ते हैं! वक्त बीत गया, समा बदल गया, चलो सब भूल कर आगे बढ़ते हैं,दिल में लाए दया,अब और

यही कुछ फर्क है!- डॉ. माध्वी बोरसे!

January 24, 2022

यही कुछ फर्क है! जब नहीं था हमारे पास अलार्म, स्वयं से याद रखते थे सारे काम,ना था मोबाइल फोन

Leave a Comment