Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, poem

आज की द्रौपदी- जयश्री बिरमी

आज की द्रौपदी एक तो द्रौपदी थी तबअनेक है आज भीक्यों बचा न पाए आज के कृष्णजब बिलखती हैं वहआज …


आज की द्रौपदी

आज की द्रौपदी- जयश्री बिरमी
एक तो द्रौपदी थी तब
अनेक है आज भी
क्यों बचा न पाए आज के कृष्ण
जब बिलखती हैं वहआज भी

क्या कौरव ही रह गए है
चीरहरण के लिए आज
नहीं दिखती उन्हें घर की लाज
तड़पती ,सहमी सी नाजुक

दिल से भावुक और मन से मजबूर
अपने सपनो के जहां को करने आबाद
कली से फूल बनी ओ बन्नो
आगाह करदु तुम्हे आज ए द्रौपदी

नहीं आयेंगे कृष्ण पुरने तुम्हे चिर आज
खुद उठो रख्शो अपनी लाज
लूटी हो बहुत पर अब नहीं
बनो तुम जां बाज

घर हो चाहे हो दफ्तर या हो खुल्ला मैदान
न झुकना तुम न रुकना तुम
अब बन के दुर्गा बढ़ो तुम
अब चाहे न आए कृष्ण
तुम ही बनो रक्षक अपनी

अब तो कृष्ण न आयेंगे

जयश्री बिर्मी
अहमदाबाद


Related Posts

अवसर!-डॉ. माध्वी बोरसे!

March 25, 2022

अवसर! इस अवसर को तू ना गवा, समय बहे जैसे हवा,कदर करे जब मिले अवसर,जीवन में रह जाए ना कोई

एक लेखक की कलम

March 25, 2022

एक लेखक की कलम! चलो बनाते हैं दोस्त, परिश्रम को, हमारे हाथों से हमेशा अच्छे कर्म हो,विश्वास हो बहुत सारा,

हर क्षण की तरंग

March 25, 2022

हर क्षण की तरंग! जिंदगी के खेल में खेलता जा,रोशनी की तरह फैलता जा,खुद पर रख पुरा यकीन,खिलाड़ी तू है

वक्त तो सबका आता है

March 25, 2022

वक्त तो सबका आता है! वक्त तो सबका आता है, बहुत सारी मुश्किलों को भी लाता है,पर कोई बिखर जाता

हवा मेरा संदेश पहुंचाना

March 25, 2022

कविता का शीर्षक हवा मेरा संदेश पहुंचाना ए हवा तुम उसके पास से गुजर ना, जरा रुक कर उसके हाल-चाल

मतदाता जागरूकता पर कविता

March 25, 2022

मतदाता जागरूकता पर कविता| matdata jagarukta par kavita हे मतदाता हे राष्ट्रनिर्माता  हे मतदाता !, हे राष्ट्रनिर्माता ! दारू मुर्गे

Leave a Comment