Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Aalekh, Jayshree_birmi

आजकल घर की कुल देवी और देवता

 आजकल घर की कुल देवी और देवता Jayshree birmi  गर्मियों की छुट्टियों के उपलक्ष में घर में भांति भांति के …


 आजकल घर की कुल देवी और देवता

जयश्री बिरमी अहमदाबाद
Jayshree birmi

 गर्मियों की छुट्टियों के उपलक्ष में घर में भांति भांति के मेहमान आए हुए थे।मैंने भी खूब शरबत आदि बना रखे थे,जिस का सब बड़े प्यार से मजे ले ले कर सेवन करतें थे।सुबह नाश्ते के बाद शाम चार बजे भी तो मैंने सोचा खाना तो जैसे तैसे गर्मी में बन ही जाता हैं किंतु आज गर्मी में रसोई घर में जा चाय नहीं बनानी पड़ेगी।लेकिन नहीं सभी बड़ों को तो चाय चाहिए ही।बच्चे चाहे मान जाएं किंतु बड़ों को कौन समझाएं उन्हे तो कुलदेवी(चाय) के दर्शन करने ही होते हैं।

और दूसरे कुलदेवता आलू जी,सब्जी चाहे कोई भी बनालों आलू तो चाहिएं ही। मैंने भिंडी काट रखी थी जैसे ही रसोई की और मुड़ी तो पिछे से ननंद जी की आवाज आई,” भाभी इसमें आलू जरूर डालियेगा वरना बिट्टू ने नहीं खाना हैं इसे!”

और हो गया कल्याण,फिर भी मैंने प्रत्युत्तर दे ही दिया,” जीज्जी इसमें तो आलू चिकने हो जाने हैं कैसे खाएंगे?”

जिज्जी कहां कम थी इतरा के बोली,”कोई नहीं जरा अलग से तल के मिला लेना तो चिकने कहां से होने हैं!” अब तीन पाव भिंडी में दो पाव तले आलू डल ही गएं।और सब ने खूब मजे से खा भी लिएं।

मैने भी तय कर लिए अगली गर्मियों की छुट्टियों में अतिरिक्त मात्रा में कुल देवता और कुल देवी का आह्वाहन कर घर में प्रस्थापित कर लूंगी।

जयश्री बिरमी

अहमदाबाद


Related Posts

पार्टियों में पीना पिलाना/Throw a party

October 16, 2022

 पार्टियों में पीना पिलाना/Throw a party ‘Throw a party’ एक फैशन बन गया हैं,छोटी बड़ी खुशी को मनाने के।लिए पार्टी

चांद की व्यथा

October 16, 2022

चांद की व्यथा गातें थे बहुत फसाने मेरी चांदनी केपटाने अपने हुस्न की मल्लिका कोरात रात जग कर देख मुझे

शहरों की शान

October 16, 2022

शहरों की शान आज गुजर रहा था सड़क परएक वृद्ध को गाड़ी से होती टक्करसब भागे जा रहे थे अपने

गुजरात चुनाव और आप पार्टी

October 11, 2022

गुजरात चुनाव और आप पार्टी आज कल दिसंबर में आने वाले गुजरात चुनावों के बारे में देश में और मीडिया

व्यंग काव्य

October 10, 2022

व्यंग काव्य सजाया बहुत मुझे रणबीरंगे वस्त्रों सेभरा हैं मुझे कईं घातक पटाखों सेइकठ्ठा हुआ हैं शहर सारा मुझे जलानेऊंचा

और कितने रावण होंगे?

October 10, 2022

और कितने रावण होंगे? आज मैं बाहर जा रही थी तो प्रहलदनगर से थोड़ा आगे जा कर बहुत से लोग

PreviousNext

Leave a Comment