Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

आगे बढ़ते हैं!-डॉ. माध्वी बोरसे!

आगे बढ़ते हैं! वक्त बीत गया, समा बदल गया, चलो सब भूल कर आगे बढ़ते हैं,दिल में लाए दया,अब और …


आगे बढ़ते हैं!

आगे बढ़ते हैं!-डॉ. माध्वी बोरसे!
वक्त बीत गया, समा बदल गया,

चलो सब भूल कर आगे बढ़ते हैं,
दिल में लाए दया,
अब और नहीं लड़ते,
चलो सब भूल कर आगे बढ़ते हैं!

जब जीना हर हाल में है चाहे गर्मी हो या सर्द,
खुशी से जीने की कोशिश करें भुला के सारे दर्द,
क्यों ना अतीत को भूल कर वर्तमान को पढ़ते हैं,
वक्त बीत गया, समा बदल गया,
चलो सब भूल कर आगे बढ़ते हैं!

हममें ताकत है आगे बढ़ने की,
स्वयं को ही नहीं दूसरों को भी बढ़ाने की,
स्वयं की काबिलियत को याद करते हैं,
वक्त बीत गया, समा बदल गया,
चलो सब भूल कर आगे बढ़ते हैं!

यदि अतीत के दर्द में आंसू बहाएंगे,
उज्जवल वर्तमान कैसे बनाएंगे,
भविष्य को कैसे सवार पाएंगे,
अब नहीं किसी से डरते हैं,
वक्त बीत गया, समा बदल गया,
चलो सब भूल कर आगे बढ़ते हैं!

कामयाबी हमारे कदमों को चूम रही है,
खुशियां जिंदगी में भर गई है,
ना मूडे पीछे, आगे की ओर देखते हैं,
वक्त बीत गया, समा बदल गया,
चलो सब भूल कर आगे बढ़ते हैं!!

डॉ. माध्वी बोरसे!
( स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

मन- डॉ.इन्दु कुमारी

December 8, 2021

 मन रे मन तू चंचल घोड़ासरपट दौड़ लगाता हैलगाम धरी नहीं कसकेत्राहि त्राहि मचाने वाली जीवन की जो हरियालीपैरों तले

मेरा एक सवाल- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

December 8, 2021

मेरा एक सवाल…!!! पढ़े लिखे काका भैया से,मेरा एक सवाल।माँ -बहनों की गाली से ,कब होगा देश आजाद.?? अरे !

उलझे-बिखरे सब”- अनीता शर्मा

December 8, 2021

उलझे-बिखरे सब” कितने उलझे-उलझे हुए सब , कितने बिखरे-बिखरे हुए सब। बनावटी दुनिया में उलझे हुए सब, दिखावटी सब सज-धज

चल चला चल राही तू-डॉ माध्वी बोरसे!

December 4, 2021

चल चला चल राही तू! चल चला चल राही तू, मुसाफिर तू कभी रुकना ना,रुकना ना, कभी झुकना ना,तेरेते रह

ऐ उम्मीद -सिद्धार्थ गोरखपुरी

December 3, 2021

ऐ उम्मीद ऐ उम्मीद! मैं तुमसे छुटकारा चाहता हूँ। क्योंकि मैं खुश रहना ढेर सारा चाहता हूँ।तुम न होती तो

बेमानी- जयश्री बिरमी

December 3, 2021

बेमानी उम्रभर देखी हैं ये दुनियां की रस्मेंन ही रवायतें हैं निभाने की कसमेंजब भूले गए थे वादे और तोड़ी

Leave a Comment