Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

आओ होली पर्व उत्सव से प्रेरणा लें!!

आओ होली पर्व उत्सव से प्रेरणा लें!! होलिका दहन के साथ हम अपनी नकारात्मकता और बुराइयों का दहन कर भाईचारे …


आओ होली पर्व उत्सव से प्रेरणा लें!!

आओ होली पर्व उत्सव से प्रेरणा लें!!
होलिका दहन के साथ हम अपनी नकारात्मकता और बुराइयों का दहन कर भाईचारे को मजबूत रंगों में रंगे!!

आओ सब मिलकर होली के रंग में सराबोर हो आपसी सौहार्द, भाईचारा, प्रेम, सामाजिक समरस्ता का संकल्प लें – एड किशन भावनानी

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर त्योहारों के प्रतीक भारत में आदि अनादि काल, हजारों वर्षों से सभी त्यौहारों को बड़े ही आत्मीयता, उत्साह सौहार्द से मनाने की प्रथा रही है जो आज भी उसी लगन, उत्सव, आनंद से शुरू है!!
साथियों बात अगर हम 17-18 मार्च 2022 दो दिवसीय होलीका पर्व उत्सव की करेंतो हर भारतीय त्योहार की तरह होली मनाने का भी अपना एक कारण है जिसको जानना आधुनिक युवाओं के लिए ख़ास महत्वपूर्ण है। पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नामक राक्षस राजा का पुत्र प्रहलाद, भगवान विष्णु का परम भक्त था जो उसके राक्षस पिता को पसंद नहीं था और भक्ति से विमुक्ति करने उसने अपनी बहन होलिका को यह जिम्मेदारी सौंपी, जिसे वरदान प्राप्त था कि अग्नि भी उसकी देह को जला नहीं सकती।
इसलिए होलिका ने भगत प्रह्लाद को मारने उसे गोद में लेकर अग्नि में प्रवेश हो गई परंतु वह खुद जल गई पर भगत प्रल्हाद का बाल भी बांका नहीं हुआ दूसरी ओर रंग वाली होली पर्व उत्सव राधा-कृष्ण के पावन प्रेम के प्रतीक के रूप में भी मनाई जाती है इसके अलावा मीडिया में इसे मनाने को लेकर अनेक पर्यावरणीय योग उपचार, स्वास्थ्य संबंधी वैज्ञानिक कारण भी बताए गए हैं।
साथियों बात अगर हम उपरोक्त पौराणिक और वैज्ञानिक कारणों को मानकर होली मनाने के उद्देश्य समझने की करें तो बुराई में चाहे कितनी भी ताकत हो किंतु अच्छाई की तपिश में खाक हो जाती है। इसलिए हम पिछले दो साल के कोरोनाकाल के दुखदाई क्षणों से उबर रहें हैं तो होलिका दहन के साथ हम अपनी नकारात्मकता और बुराइयों को दहन कर भाईचारे को मजबूत रंगों में रंगे!!
आओ सब मिलकर होली के रंग में सराबोर हो आपसी सौहार्द, भाईचारा, प्रेम सामाजिक समरसता का संकल्प लेकर एक नए मज़बूत भारत में प्रवेश कर अपने विज़न 2047 और 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने की ओर आगे क़दम बढ़ाएं।
साथियों बात अगर हम होली पर्व उत्सव से प्रेरणा की करें तो, अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक, असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक यह त्यौहार हमें बताता है कि अधर्म, असत्य कितना भी बलशाही क्यों न हो, हमारी ताकत, संकल्प, जुनून, जांबाज़ी, ज़ज़बे की ताकत उसे ध्वस्त कर देगी। यह ताकत हमें आपसी भाईचारे, सद्भाव, सौहार्द और मानवीय सामाजिक समरसता से ही मिलेगी जिसकी प्रेरणा हमें होली पर्व महोत्सव से लेने की जरूरत है। यह त्यौहार हमें भीतरी विकारों को त्यागने वह नष्ट करने की प्रेरणा सदियों से देता आया है और इस होलिका दहन पर हम सभी के विकारों का इस पवित्र अग्नि के साथ समूल नाश करें।
साथियों बात अगर हम होलिका दहन के बाद रंगोत्सव की करें तो यह हमेशा परंपरा के साथ वैदिक रीति-रिवाज के अनुसार प्रतिवर्ष प्रकृति के कण-कण की भीनी भीनी सुगंध में महकाने वाले वसंत ऋतु फाल्गुन पूर्णिमा की संध्याकाल में होलिका दहन किया जाता है यह अवसर हमें अपने चारित्रिक अवगुणों, दुर्गुणों को भस्मीभूत करने का आध्यात्मिक संदेश देता है।
हमारे मानवीय मूल्यों की निरंतर अभिवृद्धि होती रहे यह हमें इस दिवस पर संकल्प लेना है तथा देश की संस्कृति में सराबोर होने आपसी सौहार्द के रंग में, रंगों की मस्ती में मस्त होने भाईचारे, प्रेम, भाव को प्रोत्साहित करनेमें अपना अमूल्य योगदान दें।
साथिया बात अगर हम होली पर्व उत्सव को वर्तमान आधुनिक परिपेक्ष में दूषित करने से बचाने की करें तो, होली का त्यौहार भारतीय त्यौहारों में एक महत्व रखता है ,खासकर के पूर्वोत्तर क्षेत्र में। होली का त्यौहार यूं तो आज पूरे विश्व में मनाया जाता है।भारतीय त्योहारों को मनाने के पीछे उसका उद्देश्य छिपा रहता है। यह त्यौहार प्रकृति तथा व्यक्ति के जीवन पर आधारित होता है।इसको मनाने के पीछे वैज्ञानिक तर्क भी कार्य करते हैं।
होली के त्यौहार को भारत के विद्वान तथा बुद्धिजीवी लोग तो जानते हैं ,किंतु कुछ असामाजिक तत्व इसकी मर्यादा को भंग करते हैं। मर्यादा से तात्पर्य यह है कि इसके उद्देश्य को क्षति पहुंचाते हैं। यह त्यौहार खुशियां मनाने का है, एक दूसरे के सुख में शामिल होने का है, अपने दुखों को भूल जाने का है। वहीं कुछ लोग इस त्यौहार को दूषित करते हैं अर्थात दारू, मदिरा, भांग, मांस आदि खाकर इस त्यौहार की मर्यादा को तोड़ते है साथ ही वह अपने परिवार तथा समाज के मर्यादाओं को भी क्षति पहुंचाते हैं। और त्योहार की गरिमा को भंग करते हैं? हालांकि यह उनके विवेक पर निर्भर करता है।
हमारा उद्देश्य है समाज में त्यौहार की मर्यादा को बनाए रखना तथा उसके प्रति समाज को जागरूक करना। जो व्यक्ति इस मर्यादा को तोड़ता है अथवा भंग करता है उसे हम एक सच्चे समाज के व्यक्ति होने के नाते रोक सकते हैं। इसकी गरिमा को बचाए रखने के लिए इसके वैज्ञानिक तथ्य को उसके समक्ष रख सकते हैं। हम सबसे आशा करते हैं तोहार को त्यौहार के रूप में मनाते रहे इससे दारू, मदिरा तथा मांस आदि का सेवन करके समाज को दूषित ना करें।
साथियों बात अगर हम वैश्विक महामारी के कारण दो वर्षों के बाद होली के त्यौहार के उत्सव की करें तो, कोविड-19 वैश्विक महामारी की वजह से पिछले दो सालों के दौरान त्योहारों का उत्साह थोड़ा फीका पड़ गया था। लेकिन, एक लंबे अंतराल के बाद जब कोरोना काफी हद तक नियंत्रण में है तो होली के त्यौहार को लेकर लोगों का उत्साह चरम पर है।
परंतु हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कोविड-19 महामारी पूरी तरह से समाप्त नहीं हो गई है। हमहोली खेलते समयकोविड-19 नियमों का पालन करते हुए कोविड उपयुक्त व्यवहार करना का ध्यान रखना होगा क्योंकि कुछ देशों में फिर महामारी का उबाल हो रहा है। कहीं हमारी लापरवाही के कारण फिर कोई मुसीबत खड़ी ना हो इसका हमें विशेष ध्यान रखना है, क्योंकि हमने इस महामारी में कई अपनों को खोया है, इसलिए हमें अपना, अपने बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं, युवाओं का ध्यान रखने स्वतः संज्ञान लेकर सतर्क रहना होगा क्योंकि थोड़ी सी भी लापरवाही किसी बड़ी विपत्ति की उत्पत्ति कर सकती है जिसका हमें महामारी ने अनुभव दे दिया है हालांकि हमें त्योहारोंको मनाने से कोई मनाही नहीं है। बस सतर्कता रखना हमारी परम आवश्यक ज़वाबदारी और जिम्मेदारी है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि,आओ होली पर्व उत्सव से प्रेरणा लें!!होलिका दहन के साथ हम अपनी नकारात्मकता और बुराइयों का दहन कर भाईचारे को मजबूत रंगों में रंगे,आओ सब मिलकर होली के रंग में सराबोर हो आपसी सौहार्द, भाईचारा, प्रेम सामाजिक समस्सता का संकल्प लें।

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

पॉलिटिकल साइंस बनाम पब्लिक साइंस| political science vs public science

March 15, 2023

सब राज़नीति है और कुछ नहीं! पॉलिटिकल साइंस बनाम पब्लिक साइंस हर जगह बात यहीं समाप्त होती है कि, राजनीति

तपती धरती, संकट में अस्तित्व | Earth warming, survival in trouble

March 15, 2023

तपती धरती, संकट में अस्तित्व भारत में, 10 सबसे गर्म वर्षों में से नौ पिछले 10 वर्षों में दर्ज किए

प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ भारत की लड़ाई| India’s fight against plastic pollution

March 15, 2023

प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ भारत की लड़ाई एक नई रिपोर्ट के अनुसार, जी20 देशों में प्लास्टिक की खपत 2050 तक

आध्यात्मिकता से जुड़कर हेट स्पीच, अनैतिक आचरण को दूर भगाएं

March 13, 2023

आओ हेट स्पीच को छोड़, मधुर वाणी का उपयोग करें आध्यात्मिकता से जुड़कर हेट स्पीच, अनैतिक आचरण को दूर भगाएं

क्या अब प्यार और संबंध भी डिजिटल हो जाएंगे

March 13, 2023

क्या अब प्यार और संबंध भी डिजिटल हो जाएंगे मनुष्य के बारे में कहा जाता है कि वह सामाजिक प्राणी

सुख-सुविधा का पागलपन रौंद रहा मनुष्यता

March 13, 2023

सुख-सुविधा का पागलपन रौंद रहा मनुष्यता आज के भागदौड़ भरे जीवन में अच्छे जीवन की एक संकीर्ण धारणा पर ध्यान

PreviousNext

Leave a Comment