Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

आओ मिलकर जीवन बचाएं।

आओ मिलकर जीवन बचाएं। धीरे-धीरे पर्यावरण हो रहा है प्रदूषित,वायु, जल, भूमि सब हो रहा है दूषित,बढ़ती जा रही है …


आओ मिलकर जीवन बचाएं।

धीरे-धीरे पर्यावरण हो रहा है प्रदूषित,
वायु, जल, भूमि सब हो रहा है दूषित,
बढ़ती जा रही है हर जगह बीमारी,
इससे त्रस्त हो रही है दुनिया सारी,
पहले बिकता था सिर्फ पानी,
बिक रही है अब हवा सुहानी,
शुद्ध वायु का ना होना,
शांत वातावरण को खोना,
शुद्ध जल नहीं मिलना,
शुद्ध खाद्य के बिना जीना,
पर्यावरण में जहर घोलता हुआ प्लास्टिक,
इन हालातों के साथ कैसे रहेंगे जीवित,
शारीरिक ऊर्जा कम हो रही है,
स्वयं के साथ नहीं कर रहे सही है,
बहिष्कार करें प्लास्टिक,
जिम्मेदार बने हर एक नागरिक,
पेड़ लगाए, स्वच्छ वातावरण बनाएं,
स्वयं के जीवन और पर्यावरण को मिलकर बचाएं।।

About author             

dr madhvi borse

डॉ. माध्वी बोरसे!
( स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

Jivan jeene ki kala by Anita Sharma

July 31, 2021

 जीवन जीने की कला! मानव जीवन ईश्वर प्रदत्त उपहार है ।      कितनी लहरें उठती गिरती जीवन में।  

Sochte bahut ho kavita by Sudhir Srivastava

July 31, 2021

 सोचते बहुत हो शायद तुम्हें अहसास नहीं है कि तुम सोचते बहुत हो, इसीलिए तुम्हें पता ही नहीं है कि

Pyar ke rang by Indu kumari

July 31, 2021

 शीर्षक- प्यार के रंग सावन की पहली फुहार प्रकृति में  फैले    हैं हौले- हौले मंद बयार प्यार के रंग

Mansik shanti ke upay by Jitendra Kabir

July 31, 2021

 मानसिक शांति के उपाय मानसिक शांति के लिए करके देखें यह कुछ एक उपाय, समय दें उस शख्स को जो

misail man kalam by Sudhir Srivastava

July 31, 2021

मिसाइल मैन कलाम 15 अक्टूबर 1931को जन्में   रामेश्वरम, तमिलनाडु के गरीब मुस्लिम परिवार में कलाम धरा पर आये। गरीबी की

Bhukhe ke hisse ki roti by Jitendra Kabir

July 31, 2021

 भूखे के हिस्से की रोटी मैं देखता हूं बहुत बार अपनी छोटी सी बिटिया को खाना खाते हुए, साथ में

Leave a Comment