Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

आओ कुदरत की अद्भुत रचना पशुओं की देखभाल और उन्हें प्यार करें

आओ कुदरत की अद्भुत रचना पशुओं की देखभाल और उन्हें प्यार करें पशुओं के दर्द और पीड़ा को संवेदनशीलता से …


आओ कुदरत की अद्भुत रचना पशुओं की देखभाल और उन्हें प्यार करें

आओ कुदरत की अद्भुत रचना पशुओं की देखभाल और उन्हें प्यार करें

पशुओं के दर्द और पीड़ा को संवेदनशीलता से पहचान कर उनके हित में कल्याणकारी कार्य करना उच्च मानवीय धर्म – एडवोकेट किशन भावनानी

गोंदिया – सृष्टि रचनाकर्ता ने 84 लाख़ योनियों की रचना कर माननीय योनि को सबसे अनमोल बुद्धि रत्न के रूप में अनमोल हीरा बक्शा इस विश्वास के साथ कि जैव विविधता की रक्षा करने में सामंजस्य का स्थापित करने में महत्वपूर्ण रोल अदा करके और इस सृष्टि की खूबसूरती में चार चांद लगाएगा परंतु मेरा मानना है कि इस सोच में हम माननीय जीव खरे नहीं उतरे क्योंकि हमने अपने स्वार्थ के कारण इन बाकी योनियों का पृथ्वी लोक पर जीना मुश्किल कर दिया है। किसी का शिकार, वध, फालतू बनाने इत्यादि के माध्यम से उनपर अत्याचार और अनेक योनियों को विलुप्त कर दिए हैं तथा अनेक योनियों को विलुप्तता की कगार पर जिम्मेदारी से भिड़े हुए हैं। हमारे बड़े बुजुर्गों की कहावत है सुबह का भूला शाम को घर लौटे तो उसे भूला नहीं कहते इसीलिए आज भी हम जागृत हो जाएं और जीव-जंतुओं पशुओं के दर्द और पीड़ा को संवेदनशीलता से पहचान कर उनके हित में कल्याणकारी कार्य कर अपने मानवीय धर्म निभानें का परिचय दे। वैसे भी हमने पिछले दिनों गुजरात में शेरों और एमपी में चीतों के रिहैबिलिटेशन के माध्यम से पशुओं जानवरों की सुरक्षा चिंता, समर्थन की अपनी मंशा जाहिर कर चुके हैं। चूंकि 4 अक्टूबर 2022 को विश्व पशु कल्याण दिवस मना रहे हैं इसलिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सहयोग से आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे कि आओ कुदरत की अद्भुत रचना पशुओं की देखभाल और प्यार करें।
साथियों बात अगर हम पशुओं की देखभाल करने उन्हें बचाने प्यार करने की करें तो, विश्व पशु दिवस पशुओं जानवरों के साम्राज्य को समर्पित एक दिन को संदर्भित करता है। हर साल 4 अक्टूबर को विश्व पशु कल्याण दिवस के रूप में मनाया जाता है, यह मनुष्यों और जानवरों के बीच संबंधों का जश्न मनाने के लिए किया जाता है। हम सभी जानते हैंकि जानवर हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, वे न केवल समर्थन देते हैं और हमारे जीवन को बेहतर बनाते हैं बल्कि वे मानव को दोस्ती का सही अर्थ भी सिखाते हैं। इसलिए, यह दिन हमें उनके अस्तित्व का जश्न मनाने की अनुमति देता है।
साथियों बात अगर हम पशुओं की देखभाल करने उन्हें बचाने की करें तो, अगर पशुओ के प्रति हम संवेदनशील और जागरूक हो जाएँ तो और क्या चाहिए। कुछ बातों को अपना कर हम इनकी मदद कर सकते है, जो इस दिन पर संगोष्ठी यां वेबीनार आयोजित करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है।हम देखते हैं की अक्सर लावारिस गायें कचरे के ढेर से भोजन ढूंढ़ कर खाती हैं, जिनमे रोटी, सब्जी के छिलके, और अन्य चीज़ेँ शामिल होती हैं, हम अक्सर ये गलती करते हैं की छिलकों तथा अन्य बची सामग्री को पॉलिथीन मे बांध कर फेंक देते हैं। अब गाय थैली तो खोल नहीं सकती अतः वो उस सामग्री को थैली सहित ही खा जाती है, अनुमानतः हर साल भारत मे हज़ारों गायों की मृत्यु पॉलीथिन खाने से होती है, विचार कीजिये की हमारी छोटी सी चूक बेज़ुबान को काल का ग्रास बना देती है। ये हमारे द्वारा अनजाने मे की जाने वाली क्रूरता ही है तो हम यहाँ से निराकरण शुरू कर सकते हैं, और किसी भी बची हुई खाद्य सामग्री को किसी स्वच्छ एवं पक्के फर्श पर रख दें और पॉलिथीन का इस्तेमाल ना करें।

साथियों एक और चूक जो हमसे होती रही है वो ये की हम कई बार घर की सफाई के दौरान या अन्य किसी मररम्मत के दौरान निकलने वाली धातु की वस्तुओं जैसे कील, कांच, फ्यूज बल्ब, डिस्पोजल सुई, नट बोल्ट या अन्य नुकीली वस्तुओं को यूँ ही खुले कचरे मे फेंक देते हैं और उसे भूख प्यास से बेहाल जानवर खाने की तलाश मे मुँह मे ले लेते हैं परिणामतः मुख मे घाव, पेट और आंतो मे घाव और अंततः दुखद मौत, हम इसे रोक सकते हैं , बस करना इतना सा है की इस तरह की नुकीली धातु , बल्ब , एक्सपायरी डेट्स की दवाइयां इत्यादि खुले मे ना फेंके इसकी बजाय उन्हें कबाड़ी को दें और दवाइयों को फ्लश मे बहा दें। हमारी छोटी सी कोशिश इन्हे बीमार और घायल होने से बचा सकती है।
साथियों हम दैनिक जीवन मे कई बार चमड़े से बनी वस्तुओं का प्रयोग करते हैं जैसे ,पर्स, बेल्ट, जूते जैकेट इत्यादि, क्या हम जानते हैं चमड़ा उद्योग मे कितने ही जानवरों को उनकी खाल के लिए ख़रीदा और मारा जाता है। विचार करें और तय करें की चमड़े की चीज़ों का अन्य विकल्प इस्तेमाल करें और चमड़े का बहिष्कार करें।
साथियों बात अगर हम भारत में पशुओं की रक्षा में संविधान कानून कायदों नियमों की करें तो, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पास जानवरों पर अनावश्यक दर्द या पीड़ा रोकने के लिए और पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम के लिए पशु क्रूरता निवारण (पीसीए) अधिनियम, 1960 लागू करने का अधिकार है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51(A) के मुताबिक हर जीवित प्राणी के प्रति सहानुभूति रखना भारत के हर नागरिक का मूल कर्तव्य है।भारतीय दंड संहिता की धारा 428 और 429 के मुताबिक कोई भी व्यक्ति किसी जानवर को पीटेगा,ठोकर मारेगा,उस पर अत्यधिक सवारी और बोझ लादेगा,उसे यातना देगा कोई ऐसा काम करेगा जिससे उसे अनावश्यक दर्द हो दंडनीय अपराध है। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और खाद्य सुरक्षा अधिनियम में इस बात का उल्लेख है कि कोई भी पशु (मुर्गी समेत) सिर्फ बूचड़खाने में ही काटा जाएगा। बीमार और गर्भधारण कर चुके पशु को मारा नहीं जाएगा। अगर कोई व्यक्ति किसी पशु को आवारा छोड़ कर जाता है तो उसको तीन महीने की सजा हो सकती है। बस ज़रूरी है, शासन प्रशासन को इन नियमों अधिनियम कानूनों को सख्ती से पालन करने की।
साथियों बात अगर हम विश्व पशु दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की करें तो, शिक्षा और जागरूकताअभियान चलाने के लिए कार्यक्रम, विभिन्न जानवरों से संबंधित मुद्दों के बारे में बात करने और जागरूकता फैलाने के लिए कार्यशाला और सत्जानवरों के लिए धन जुटाने के लिए संगीत कार्यक्रम और शो, बच्चों के लिए जानवरों को समझने के लिए स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित करना, विभिन्न पशु घर खोलना, एक घटना जो जानवरों को अपनाने पर केंद्रित है, विभिन्न समाजों या लोगों, पालतू जानवरों, मालिकों और कई अन्य को लक्षित करने के लिए कार्यक्रम और कार्यक्रम। रेबीज और अन्य बीमारियों के लिए टीकाकरण, निःशुल्क स्वास्थ्य जांच के लिए पशु चिकित्सालयों में कार्यक्रम, बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंचने के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का उपयोग पशु कल्याण के लिए सभा और चर्चा, जागरूकता पैदा करने और पशु अधिकारों के लिए लड़ने के लिए विरोध और रैलियां।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि विश्व पशु कल्याण दिवस 4 अक्टूबर 2022 पर विशेष है।आओ कुदरत की अद्भुत रचना पशुओं की देखभाल और उन्हें प्यार करें,पशुओं के दर्द और पीड़ा को संवेदनशीलता से पहचान कर उनके हित में कल्याणकारी कार्य करना उचित मानवीय धर्म है।

About author

Kishan sanmukh

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

Related Posts

प्रभु श्री राम की प्राणप्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024

December 31, 2023

 नव वर्ष 2024-22 जनवरी 2024 को बजेगा भारत का आध्यात्मिक डंका  विश्व को नए वर्ष 2024 का नायाब तोहफा-प्रभु श्री

सेक्स में रूचि कम हो रही है तो सावधान हो जाएं

सेक्स में रूचि कम हो रही है तो सावधान हो जाएं

December 30, 2023

सेक्स में रूचि कम हो रही है तो सावधान हो जाएं ऐसी तमाम महिलाएं हैं, जिनकी समय के साथ सेक्स

तापमान भले शून्य हो पर सहनशक्ति शून्य नहीं होनी चाहिए

December 30, 2023

तापमान भले शून्य हो पर सहनशक्ति शून्य नहीं होनी चाहिए  समाज में जो भी दंपति, परिवार, नौकरी और धंधा टिका

नया साल, नई उम्मीदें, नए सपने, नए लक्ष्य।

December 30, 2023

नया साल, नई उम्मीदें, नए सपने, नए लक्ष्य। नए साल पर अपनी आशाएँ रखना हमारे लिए बहुत अच्छी बात है,

नागपुर की वीना आडवाणी “तन्वी” को 26 वे अन्तर्राष्ट्रीय जुनूँ अवार्ड से किया जायेगा सम्मानित

December 30, 2023

नागपुर की वीना आडवाणी “तन्वी” को 26 वे अन्तर्राष्ट्रीय जुनूँ अवार्ड से किया जायेगा सम्मानित महाराष्ट्र, नागपुर । विगत वर्षों

सर्दियों में बच्चे की छाती में जम गया है कफ?

सर्दियों में बच्चे की छाती में जम गया है कफ?

December 30, 2023

सर्दियों में बच्चे की छाती में जम गया है कफ? अपनाएं यह तरीका तुरंत मिलेगा आराम। सर्दियों की ठंड अक्सर

Leave a Comment