Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

आओ एक और एक ग्यारह बने

आओ एक और एक ग्यारह बने हम सब भारतीय एक ही दिशा में एक एक कदम चलते हैं तो एक …


आओ एक और एक ग्यारह बने

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

हम सब भारतीय एक ही दिशा में एक एक कदम चलते हैं तो एक साथ 135 करोड़ कदम आगे बढ़ते हैं

विश्व को भारत की 135 करोड़ जनसंख्या का बुद्धि कौछल, कार्यबल, शुभ संकल्प दिख़ाने का समय आ गया है- जनसंख्या वृद्धि की सकारात्मक सोच- एड किशन भावनानी

गोंदिया- भारत के बड़े बुजुर्गों, बुद्धिजीवियों, कौशलता निपुण विद्वानों, कुछल नेतृत्व धारक मनीषियों के विचारों का अण्खुट खज़ाना है हमारे देश में,हालांकि इनकी वैचारिक शक्ति का प्रयोग और क्रियान्वयन भी संस्कारों की जननी भारतमाता के गोद में किया जाता है।परंतु वर्तमान समय में हमारे भारतवर्ष में जो एक विषय जोरों से चर्चा में है, उस पर बहुत गंभीरता से हर देशवासी को सकारात्मक सोचना होगा यह विषय है! 135 करोड़ जनसंख्या के कार्यबल, बुद्धि कौशल और शुभ संकल्प का संपूर्ण क्षमता के साथ दोहन करना।
साथियों यह विषय अगर हर भारतीय नागरिक जिसमें राजनैतिक, शासन-प्रशासन, पक्ष विपक्ष, सभके समझ में आ गया है, उसका क्रियान्वयन पूर्ण स्केल के साथ करना शुरू हुआ तो दुनिया की कोई ताकत भारत को विश्व का सर्वश्रेष्ठ विकसित देश बनाने में नहीं रोक सकती!
साथियों बात अगर हम 23 मई 2022 को माननीय पीएम जापान के टोक्यो में क्वाड सम्मेलन में भाग लेने के दौरान भारतीय समुदाय से बातचीत की करें तो पीआईबी के अनुसार उन्होंने कहा आज हिन्दुस्तान से 130 करोड़ लोग और मैं जापान में बैठे हुए लोगों की भी आंखों में वही देख रहा हूं 130 करोड़ देश्वासियों का आत्मविश्वास, 130 करोड़ संकल्प 130 करोड़ सपने और इस 130 करोड़ सपनों को पूर्ण करने का ये विराट सामर्थ्य परिणाम निश्चित लेके रहेगा दोस्तों। हमारे सपनों का भारत हम देखके रहेंगे। आज भारत अपनी सभ्यता, अपनी संस्कृति, अपनी संस्थाओं के, अपने खोये हुए विश्वास को फिर से हासिल कर रहा है।
साथियों बात अगर हम कुछ अवधि से चर्चाओं में चल रहे विषय जनसंख्या नियंत्रण कानून की करें तो हालांकि नीतिगत फैसला अभी नहीं हुआ है। परंतु अभी ज़रूरत है वर्तमान ज़नसंख्या स्थिति को संज्ञान में लेकर उसके कार्यबल, बौद्धिक कौशलता का उपयोग करने के रणनीतिक रोडमैप बनाने की, क्योंकि भारत माता की मिट्टी के गुण इतने प्रभावी हैं कि यहां हर नागरिक में किसी न किसी कौशलता बुद्धिमता का गुण समाया हुआ है! बस! ज़रूरत है उसे तराशने की, उचित ट्रेनिंग देने की, जिसमें अगर हम सफ़ल हो जाते हैं तो रोज़गार मांगने वाला रोज़गार सृजन कर्ता बन जाएगा! 135 करोड़ लोगों के हाथों में काम होगा तो हम भारतीय अर्थव्यवस्था को पांच क्या? 25 ट्रिलियन डॉलर तक की अर्थव्यवस्था भी ले जाने की क्षमता रखते हैं!
साथियों अगर हम वैश्विक रचना पर नजर घूमांए तो हमारा एक राज्य यूपी,दुनिया के सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देशों के पांचवे देश के नम्बर में है,तो हम विचार करें कि, हमारे एक संयुक्त भारत में आज राज्य 35 हैं तो हमसे बहुत छोटी जनसंख्या वाले देशों के नागरिकों के हाथ में काम है, और कौछलता है तथा उनका जीवन स्तर उच्चतर है, तो फिर भारत में तो अपेक्षाकृत अधिक बुद्धि कौशलता और कार्य करने की क्षमता और काबिलियत है! बस जरूरत है उसे तराशने की जो काम राजनीतिक कौशलबुद्धि और वैचारिक एकता के मंत्र को अपनाने पर क्रियान्वयन होगा।
साथियों बात अगर हम 135 करोड़ साथियों के कार्यबल बुद्धि कौशलता के निखार की करें तो हालांकि अलग-अलग मंत्रालयों के तहत कार्य योजनाएं चलाई जा रही है। परंतु मेरा एक सुझाव है जिस तरह से सेनाओं के तीनों अंगों के लिए एक पीडीएफ पद का सृजन कर नियुक्ति की गई है ठीक उसी प्रकार 135 करोड़ जनसंख्या के लिए अलग-अलग मंत्रालयों के तहत कार्यबल बुद्धि कौशलता क्षमता का उपयोग करने बनाए गए अपने-अपने विभाग के रणनीतिक रोडमैप को एक सूत्रीय पद याने एक विशेष मंत्रालय बनाकर यानें तालमेल के लिए उस मंत्रालय का सृजन कर माननीय पीएम के अंतर्गत दिया जाए तो इस कार्य में तीव्रता से वृद्धि होगी और हमारी 135 करोड़ जनसंख्या की कार्यक्षमता और उनकी कौछल क्षमता के दोहन का अभूतपूर्व विकास होगा और हम शीघ्र ही लक्ष्यों को प्राप्त करेंगे और आत्मनिर्भर बहुत तेज़ी से बनेंगे।साथियों बात अगर हम जातिगत, राजनीतिक स्थिति आंदोलनों, आरक्षण की लड़ाई की करें तो मेरा मानना है कि अगर 135 करोड़ पूरी जनसंख्या को उनके कार्यबल और कौछलता का आभास करा कर उनको निख़ारा जाएगा तो उनको यह एहसास कराकर सफ़लता की चाबी उनको दी गई, तो उपरोक्त सभी मामलों का अंत होने की भी संभावना है, क्योंकि हर हाथ में रोज़गार होगा तो जातीयता, आरक्षण, राजनीति, नकारात्मकता की ओर किसी का ध्यान नहीं जाएगा, हालांकि अगर हम इस मुद्दे को नकारात्मकता से संज्ञान में लेकर विश्लेषण करें तो नकारात्मक रिजल्ट ही निकलेगा इसीलिए हमें इस विषय को सकारात्मकता से संज्ञान में लेने की ज़रूरत है।
साथियों बात अगर हम कुछ कुछ समय पहले केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा एक कार्यक्रम के संबोधन की करें तो पीआईबी के अनुसार उन्होंने भी 135 करोड़ जनसंख्या के बारे में कहा कि आज़ादी का अमृत महोत्सव भारत के उज्ज्वल भविष्य और विश्व में भारत को उन्नत स्थान दिलाने के लिए मन में आशा जगाने, संकल्प लेने और अपने कार्यों से इन आशाओं को पूरा करने का है। उन्होंने कहा कि भारत 130 करोड़ की आबादी वाला देश है और अगर सभी 130 करोड़ भारतीय आज़ादी के अमृत महोत्सव में एक-एक संकल्प लें तो एक बहुत बड़ी शक्ति बन जाएगी।
अगर हम सब भारतीय एक ही दिशा में एक एक कदम चलते हैं, तो हम सब एक साथ 130 करोड़ कदम आगे बढ़ते हैं। ये हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि हम आज़ादी के अमृत महोत्सव को प्रेरणा का एक स्रोत व चेतना जागृत करने का माध्यम बनाकर भारत के विकास का राजमार्ग बनाएं।
अतः अगर हम उपरोक्त विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि आओ एक और एक ग्यारह बने। हम सब भारतीय एक ही दिशा में एक एक कदम चलते हैं तो हम सब एक साथ 135 करोड़ कदम आगे बढ़ते हैं,विश्व को भारत की 135 करोड़ जनसंख्या का बुद्धि कौशलता, कार्यबल, शुभ संकल्प दिखाने का समय आ गया है।

-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

अग्निपथ योजना का विरोध बेरोजगारी संकट का सूचक है।

July 15, 2022

 अग्निपथ योजना का विरोध बेरोजगारी संकट का सूचक है। प्रियंका ‘सौरभ’ बेरोजगारी आज भारत में चिंताजनक चिंता का कारण बनता

“फ़िल्म को हीट बनाने के नया फार्मूला” /Film ko hit banane ke naya formula

July 15, 2022

 “फ़िल्म को हीट बनाने के नया फार्मूला” /Film ko hit banane ke naya formula  फ़िल्मों के साथ हमारा समाज गहराई

World Youth Skills Day 2022/विश्व युवा कौशल दिवस 15 जुलाई 2022/

July 14, 2022

विश्व युवा कौशल दिवस 15 जुलाई 2022 पर विशेष कौशलता विकास संकट मोचक बौद्धिक अस्त्र कौशलता विकास परिवर्तन के वाहक

शेरों के बहाने हंगामा, विपक्ष की दहशत का प्रतीक

July 14, 2022

 शेरों के बहाने हंगामा, विपक्ष की दहशत का प्रतीक/sheron ke bahane hangama, vipaksh ki dahshat ka prateek   प्रियंका ‘सौरभ’  (क्या

बारिश बाढ़ का कहर / badh ka kahar

July 13, 2022

 बारिश बाढ़ का कहर  मानसून की बारिश से तबाही, प्राकृतिक आपदा या फ़िर सिस्टम की नाकामी?  मानसून की बारिश में

जन संख्या नियंत्रण कानून जल्दी से लागू हो

July 13, 2022

 “जन संख्या नियंत्रण कानून जल्दी से लागू हो” प्रतिवर्ष 10 जुलाई जनसंख्या नियंत्रण दिवस पर सबको याद आता है कि

Leave a Comment