Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, vijay_lakshmi_pandey

आई पिया की याद..!!

आई पिया की याद..!! मन मयूर तन तरुण हुआबरखा नें छेड़े राग।गरज गरज घन बरस रहेआई पिया की याद।। छानी …


आई पिया की याद..!!

मन मयूर तन तरुण हुआ
बरखा नें छेड़े राग।
गरज गरज घन बरस रहे
आई पिया की याद।।

छानी मेरी भई पुरानीं
लौट के आ परदेशी,
बिन तेरे अब कौन कराए
आषाढ़ मास की खेती।।

सब सखियन घर कन्त रसीले
रस रस सावन गाई।
अमराई में झूले पड़ गए
अब घर आ हरजाई।।

बारिश के बूँदों की झालर
मन में बिरह बढ़ा दी।
कोकिल मोर पपीहा बोले
सोइ प्रीत जगा दी।।

मास आषाढ़ मेघ सम बरसे
दोनों नैंन हमारे।
आस “विजय” की टूट न जाए
आना प्रियतम प्यारे।।

बाग की मेंहदी हरियाई है
पुरुवा पलक बिछा दी
सावन के संग मैंने भी तो
धानीं चुनर रँगा ली।।

About author

vijay-lakshmi-pandey
विजयलक्ष्मीपाण्डेय
स्वरचित मौलिक रचना
आजमगढ़,उत्तर प्रदेश

Related Posts

आम्रपाली

October 23, 2021

 आम्रपाली  मां  ऐसी क्या मजबूरी थी  जो जन्म देते ही मुझे आम्रवन मे छोड़ कर चली गई  शायद मेरे नसीब.

पति – पत्नी का रिश्ता

October 23, 2021

 पति – पत्नी का रिश्ता दुनिया में बहुत से लोग पति – पत्नी के रूप में  साथ साथ रहे एक

नकाब ओढ़े चेहरे

October 23, 2021

 नकाब ओढ़े चेहरे चुंकि फायदेमंद रहती हैं हिंसक व अराजक परिस्थितियां चुनावों में वोटों के ध्रुवीकरण के लिए, इसलिए ज्यादातर

हृदय के चाँद

October 23, 2021

 हृदय के चाँद                                  

Pahle se bhi jyada by Jitendra Kabir

October 23, 2021

 पहले से भी ज्यादा भ्रष्टाचार मुक्त भारत का नारा देकर सरकार बनाने वाले लोग जब खुद ही लिप्त रहें सारा

Sharad chandra kirne by Anita Sharma

October 23, 2021

 शरद-चंद्र-किरणें* ऐ तकदीर मेरी मुझको चाँद से मिला रही। इक चाँद आसमान में इक है मेरे पास भी। सितारों ने

Leave a Comment