Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

आइए एकजुट होकर आगे बढ़ें

 आइए एकजुट होकर आगे बढ़ें  स्वर्ण भारत का निर्माण करने विविधता में एकता का प्रतीक भारतीय संस्कृति तथा धरोहर की …


 आइए एकजुट होकर आगे बढ़ें 

आइए एकजुट होकर आगे बढ़ें

स्वर्ण भारत का निर्माण करने विविधता में एकता का प्रतीक भारतीय संस्कृति तथा धरोहर की सुरक्षा करना ज़रूरी 

विभिन्न संस्कृतियों के लोगों के बीच रिश्तों के सुदृढ़ीकरण से वसुधैव कुटुम्‍बकम के सभ्यतागत मूल्यों को बढ़ावा मिलता है – एड किशन भावनानी 

गोंदिया – भारत में 2 अप्रैल 2022 को विभिन्न नामों तथा रीति-रिवाजों से अनेक समाजों ने पारंपरिक नववर्ष समारोह चेट्रीचंड्र, गुड़ी पाड़वा, नवरात्रा, उगांडी, युगांडी, चैत्र शुक्ला दी, रमजान, सजीबू, चेराओबी, नवरेह, नवसंवतसर,इत्यादि नामों से त्योहार अपने-अपने समाजों में मना कर अनेकता में एकता, विविधता में एकता की प्रतीक हमारी भारतीय संस्कृति तथा धरोहर का एक अच्छा खासा उदाहरण पेश किए!!! इस अवसर पर पारंपरिक नववर्षपर किए समारोहों पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष सहित महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर बैठे अनेक नामी -गिरामी हस्तियों ने ट्विटर और प्रत्यक्ष स्वयंमुख से बधाईयों के संदेश दिए जो एक सबसे महत्वपूर्ण और खूबसूरत पल था कि इतने सारे अलग -अलग भाषाई पर्वों को खूबसूरती के साथ एक ही दिन पर मनाया गया था। कुछ की शुरुआत की गई जो कुछ दिन समारोह, पूजा-अर्चना चलेगी। 

साथियों बात अगर हम इसी विविधता में एकता पर्वों, रीति-रिवाजों से स्वर्ण भारत का निर्माण करने की करें तो विवधता में एकता की प्रतीक हमारी भारतीय संस्कृति और सभ्यता और इसीलिए एकजुटता से मिलकर संजोए रखें और इसकी सुरक्षा करते रहें जिससे हमारा आपसी भाईचारा, प्रेम, मोहब्बत, लोगों के बीच रिश्तो में सुदृढ़ीकरण होकर और अधिक मजबूत होंगे जिसकी ताकत से हमारी अनेक मूलभूत समस्याएं जैसे बेरोजगारी पर काबू पाना, अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने, आपसी मतभेद समाप्त करने, हमें हमें आसानी होगी।मिलकर काम करनेसे हमें एकजुटता ज़ज्बाऔर जांबाजी हासिल होगी जिसके बल पर हम एक और एक ग्यारह की कहावत को धरातल पर उतारकर एक शक्तिशाली स्वर्ण भारत बना सकते हैं जो वैश्विक नेतृत्व करने के लिए सबसे उपयुक्त राष्ट्र होगा। 

साथियों बात अगर हम स्वर्ण भारत के वैश्विक नेतृत्व की करें तो एक दिन पूर्व से ही हम मीडिया में सुबसुबाहट सुन रहे है कि यूक्रेन-रूस के बीच चल रहे महायुद्ध के बीच भारत को मध्यस्तता के लिए नियुक्त किया जा सकता है ताकि भारत अपने बौद्धिक कौशलता से दोनों राष्ट्रों के नेताओं के बीच आपसी बैठक और बात करा कर युद्ध विराम कर समस्याओं के सुलझाने में महत्वपूर्ण रोल अदा करने की भूमिका निभा सकता है। 

साथियों बात अगर हम दिनांक 2 अप्रैल 2022 को माननीय उपराष्ट्रपति द्वारा एक कार्यक्रम में संबोधन की करें तो उन्होंने भी, युवाओं से भारतीय संस्‍कृति को संरक्षित तथा सुरक्षित करने और प्रत्‍येक भारतीय त्‍यौहार के पीछे के महत्‍व को समझने की अपील की। उन्‍होंने शुभकामना जताई कि पारंपरिक नववर्ष देश के लोगों के जीवन में समृद्धि और प्रसन्‍नता लाए। यह याद दिलाते हुए कि नव वर्ष के त्‍यौहार प्रकृति के उपहार का भी समारोह है, उन्होंने प्रत्‍येक व्‍यक्ति से नव वर्ष पर प्रकृति को संरक्षित करने तथा टिकाऊ पद्धतियों को अपनाने की अपील की। उन्‍होंने, लोगों विशेष रूप से युवाओं को निष्क्रिय जीवन शैली का त्‍याग करने तथा स्‍वस्‍थ आदतों को अपनाने का भी सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि विभिन्‍न संस्‍कृतियों के लोगों के बीच रिश्‍तों के सुदृढ़ीकरण से समाज में सद्भावना को बढ़ावा मिलता है। भारत के वसुधैव कुटुम्‍बकम के सभ्‍यतागत मूल्‍य का स्‍मरण करते हुए उन्होंने प्रत्‍येक व्‍यक्ति से देश की प्रगति के लिए सतत प्रयास करने को कहा। उन्‍होंने कहा, आइए एकजुट हों तथा आगे बढ़ें, आइए आत्म निर्भर भारत अर्जित करें। उन्होंने कहा कि पारंपरिक नव वर्ष समारोह देशभर में विभिन्‍न नामों तथा रीति रिवाजों जैसे कि उगाडी, युगाडी, गुडी परवा, चैत्र शुक्‍लादि, चेतिचांद, सजीबू, चेराओबा, नवरेह, के साथ मनाया जाता है और यह अपनी विविधता तथा अतंरनिहित एकता को प्रदर्शित करता हुआ भारतीय संस्‍कृति का प्रतीक है।

उन्होंने सार्वजनिक जीवन में भारतीय भाषाओं के उपयोग के महत्‍व पर जोर दिया और सुझाव दिया कि प्रत्‍येक व्‍यक्ति को जहां तक संभव हो, अपने दैनिक जीवन में अपनी मातृभाषा का उपयोग करना चाहिए और उससे प्‍यार करना चाहिए’। उन्‍होंने इच्‍छा जताई कि स्‍कूलों में कम से कम प्राथमिक स्‍तर पर निर्देश का माध्‍यम मातृभाषा होनी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि भारतीय भाषाओं का प्रशासन एवं न्‍यायालयों में उपयोग निरंतर बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक शासन ने भारत का शोषण किया जिससे  भारतीयों के बीच हीन भावना पैदा हो गई। उन्‍होंने कहा कि प्रत्‍येक व्‍यक्ति से भारत की प्राचीन विरासत के प्रति गौरव महसूस करने का आग्रह किया तथा कहा कि भारत के सभी क्षेत्रों में तेज विकास देखा जा रहा है और समस्‍त दुनिया की भारत पर दृष्टि है। सार्वजनिक चर्चाओं में बहस की सर्वोच्‍च गुणवत्‍ता बनाए रखने की अपील करते हुए उन्‍होंने कहा कि किसी को भी विश्‍व के मंच पर भारत की स्थिति को कमतर नहीं दिखाना चाहिए। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि आइए एकजुट होकर आगे बढ़े!!!स्वर्ण भारत का निर्माण करने विविधता में एकता का प्रतीक भारतीय संस्कृति तथा धरोहर की सुरक्षा करना ज़रूरी है।विभिन्न संस्कृतियों के लोगों के बीच रिश्तो के सुदृढ़ीकरण से वसुधैव कुटुम्‍बकम की सभ्यतागत मूल्यों को बढ़ावा मिलता है। 

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

मध्यम वर्ग का संघर्ष कभी खत्म क्यों नहीं होता?

August 11, 2023

मध्यम वर्ग का संघर्ष कभी खत्म क्यों नहीं होता? मध्यम वर्ग के लोगों की चिंताओं का कोई अंत नहीं होता।

धंधा गैरकानूनी होगा पर जीएसटी कानूनी लगेगा !

August 10, 2023

धंधा गैरकानूनी होगा पर जीएसटी कानूनी लगेगा ! जीएसटी काउंसिल की 51 वीं बैठक में ऑनलाइन गेमिंग, कैसीनों, हॉर्स रेसिंग

ख़ुद के साथ समय बिताने में जीवन के गहरे संकेत छिपे हैं

August 10, 2023

ख़ुद के साथ समय बिताने में जीवन के गहरे संकेत छिपे हैं मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक ऊर्जा और तनाव मुक्त जीवन

फ्लाइंग किस्स बनाम मणिपुर मुद्दा

August 10, 2023

फ्लाइंग किस्स बनाम मणिपुर मुद्दा बात का बतंगड़ – आंख मारने से फ्लाइंग किस्स तक रण लोकतंत्र के मंदिर में

अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक 2023 राज्यसभा में पारित

August 10, 2023

अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक 2023 राज्यसभा में पारित – दलालों पर नकेल कसना तय सुनिए जी ! न्यायालयों, विभिन्न सरकारी प्राधिकरणों

Super quick for special vs slow for common

August 10, 2023

 24 घंटे बनाम 72 घंटे ख़ास के लिए जबरदस्त फुर्ती बनाम आम के लिए सुस्ती   सुनिए जी ! आगे से

PreviousNext

Leave a Comment