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Dr_Madhvi_Borse, poem

अब भी हिम्मत बाकी है!

अब भी हिम्मत बाकी है! मुसीबतों का भंडार है,हर तकलीफ का संहार है,अब भी तुझ में हिम्मत बाकी है,दृढ़ता तेरा …


अब भी हिम्मत बाकी है!

मुसीबतों का भंडार है,
हर तकलीफ का संहार है,
अब भी तुझ में हिम्मत बाकी है,
दृढ़ता तेरा संस्कार है!

चारों तरफ से प्रहार है,
नैया बीच मझधार है,
अब भी तुझ में हिम्मत बाकी है,
साहस तेरा संस्कार है!

इस वक्त तू लाचार है,
बुराई का प्रचार है,
अब भी तुझ में हिम्मत बाकी है,
स्वाभिमान तेरा संस्कार है!

परेशानियां हजार है,
रिश्तो में तकरार है,
अब भी तुझ में हिम्मत बाकी है,
विनम्रता तेरा संस्कार है!

कोशिश हर प्रकार है,
ना ठीक होने के लगते आसार है,
अब भी तुझ में हिम्मत बाकी है,
धैर्य रखना तेरा संस्कार है!

जिंदगी जीत और हार है,
तू भी एक कलाकार है,
हमेशा तुझ में हिम्मत बाकी है,
आत्मविश्वास तेरा संस्कार है!!

About author

डॉ. माध्वी बोरसे!
डॉ. माध्वी बोरसे!
(स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)

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