Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Aalekh, Bhawna_thaker

अपेक्षाओं का दायरा छोटा रखिए

“अपेक्षाओं का दायरा छोटा रखिए” क्यूँ हम चाहते है कि सब हमारी सोच के मुताबिक ही हो? इनको ऐसा करना …


“अपेक्षाओं का दायरा छोटा रखिए”

क्यूँ हम चाहते है कि सब हमारी सोच के मुताबिक ही हो? इनको ऐसा करना चाहिए, उनको वैसा करना चाहिए और ऐसा नहीं होने पर अकुलाहट क्यूँ?
नेकी कर दरिया में ड़ाल इस कथन को याद रखकर सिर्फ़ अपने कर्तव्यों का पालन करते रहेंगे, तो मन शांत और सकारात्मक रहेगा। अपेक्षाओं का दायरा हंमेशा छोटा रखिए, अपेक्षाएँ हटते ही दुनिया अपरिचित और अन्जान लगेगी और अन्जानों से कैसी अपेक्षा? जहाँ अपेक्षा ख़त्म हो जाती है सुकून की शुरुआत जीवन में वहीं से होती है।
बेशक हर इंसान के मन में अपेक्षाएँ रहती है, जब व्यक्ति की अपेक्षाएँ पूर्ण हो जाती है तब ज़ाहिर सी बात है खुशी मिलती है। लेकिन जब अपेक्षा के बदले उपेक्षा मिलती है तो इंसान अंदर से टूट जाता है। अपेक्षाएं मन का मोह है, चाहे व्यक्ति की अपेक्षाएं पूरी न हों, परन्तु वह अपेक्षा रखता जरूर है। माता-पिता बच्चों से, बच्चे माता-पिता से, पति, पत्नी से, पत्नी, पति से, गुरु, से, दोस्त को दोस्त से अपेक्षाएँ रहती ही है। रिश्ता कोई भी हो अपेक्षा से परे नहीं होता। सीधा गणित है अगर कोई इंसान हमारी अपेक्षाओं पर खरा उतरता है तो वह सही और अच्छा वरना बुरा है।
यदि किसीके लिए कुछ अच्छा करने के बाद मन में ये लालच उत्पन्न होती है कि हाँ मैंने तो इनके कितना कुछ किया, उसको भी मेरे लिये ये करना चाहिए, वो करना चाहिए वो गलत है। जब आपकी अच्छाईयों का प्रतिभाव नहीं मिलता तब मन खिन्न हो जाता है, सामने वाला पराया बन जाता है। उनके हर व्यवहार में कमियां नज़र आने लगती है। ये हमारी अपेक्षा की वजह से होता है। किसीके लिए कुछ करके भूल जाना बेहतर होता है।
हमारे कर्मों का हिसाब जहाँ होना चाहिए वहाँ अचूक होता है, और उसका फल भी मिलता है। आज हर रिश्ता स्वार्थ की क्षितिज पर खड़ा है। जब तक आप किसीको देते रहेंगे आप सर्वश्रेष्ठ है, जैसे ही किसी दिन ना बोल दी आप दुश्मन की श्रेणी में खड़े कर दिए जाओगे। इस परिस्थिति में किसीसे भी उम्मीद या अपेक्षा रखना रेत में से पानी निचोड़ने के बराबर है।
अपेक्षाएँ मौन एहसास चाहती है। जैसे पति की पत्नी से केयरिंग होने की अपेक्षा, तो अभिभावकों की बच्चों से यह अपेक्षा कि वे बुढ़ापे में उन की देखभाल करेंगे। जबकि बच्चे यह अपेक्षा करते हैं कि वे अपनी सोच और मन मर्ज़ी के अनुसार जिंदगी जिएंगे, जिस में माता-पिता की टोका-टोकी न हो। लेकिन व्यावहारिक जीवन में ऐसा नहीं होता कि सामने वाला आप की अपेक्षा के अनुरूप व्यवहार करे या आप की सोच के मुताबिक आपसे रिश्ता रखें।
कर्तव्य और फ़र्ज़ निभाने की पहली शर्त है नि:स्वार्थ परोपकार करते जाओ, अपने हिस्से की धूप से किसी ओर का आशियां रोशन करते जाओ आपके घर की दीवारें हंमेशा झिलमिलाएगी। नेकी के पेड़ पर मीठा फल ही उगेगा। अगर ज़िंदगी में सुकून चाहिए और रिश्तों को ताउम्र बरकरार रखना चाहते हो तो कर्तव्य परायण अपना कर अपेक्षाओं को निजात दे दो। किसीसे भी अधिक उम्मीद निराश करेगी, कर्मों पर श्रद्धा रखिए अपेक्षाओं से सदा ही अधिक मिलेगा।

About author

bhawna thaker

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु

Related Posts

मनुष्य में अनमोल गुणों का भंडार

September 13, 2022

मनुष्य में अनमोल गुणों का भंडार चुप रहना और माफ करना दो अनमोल हीरे – चुप रहने से बड़ा कोई

जीते जी कद्र कर लो श्राद्धकर्म की जरूरत नहीं

September 13, 2022

“जीते जी कद्र कर लो श्राद्धकर्म की जरूरत नहीं” Pic credit freepik.com सर्वतीर्थमयी माता सर्वदेवमयः पिता मातरं पितरं तस्मात् सर्वयत्नेन

हर महिला को आज़ाद ज़िंदगी जीने का पूरा अधिकार है

September 13, 2022

“हर महिला को आज़ाद ज़िंदगी जीने का पूरा अधिकार है” Pic credit freepik.com “मत सहो बेवजह प्रताड़ना की जलन जागो

अखंड भारत को जोड़ने का नाटक क्यूँ

September 13, 2022

“अखंड भारत को जोड़ने का नाटक क्यूँ” कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भारत जोड़ो पदयात्रा का मतलब समझ नहीं आ

विश्व डेयरी शिखर सम्मेलन 12 से 15 सितंबर 2022

September 13, 2022

विश्व डेयरी शिखर सम्मेलन 12 से 15 सितंबर 2022 सफेद क्रांति का आगाज़ भारतीय डेयरी उद्योग के विकास और उपलब्धियों

पितृ पक्ष – श्राद्ध 2022

September 13, 2022

 पितृ पक्ष – श्राद्ध 2022  श्रद्धया इदं श्राद्धम्‌ मान्यता है पितृपक्ष में यमराज पितरों को अपने परिजनों से मिलने 15

PreviousNext

Leave a Comment