Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

अपने अपने राम

 अपने अपने राम जब भी कुमार विश्वास के प्रोग्राम का विज्ञापन देखती हूं जिसमे बड़े बड़े शब्दों में लिखा हैं”अपने …


 अपने अपने राम

अपने अपने राम

जब भी कुमार विश्वास के प्रोग्राम का विज्ञापन देखती हूं जिसमे बड़े बड़े शब्दों में लिखा हैं”अपने अपने राम” पढ़ती हूं तो वाकई में खयाल आता हैं,राम अपने अपने कैसे? मैने उनका प्रोग्राम देखा तो नहीं हैं लेकिन मेरे हिसाब से भी राम सबके अपने अपने ही होते हैं ।

  वैसे देखें तो बचपन वाले राम तो गुरु ऋषि विश्वामित्र के आश्रम में विद्या प्राप्ति के समय हवन में विध्न डालने वाले रक्षशों के काल थे तो अपने तीनों भाइयों को पथ दर्शक और आदर्श भी तो राम ही थे।

पिता दशरथ और माता कौशल्या के वे आज्ञाकारी और आदर्श पुत्र ,जिन्हें ने अपने राज्याभिषेक की घड़ी में भी वनवास बिना हिचक स्वीकार कर लिया ये राम की त्याग की भावना का मूर्त स्वरूप हैं। अपने माता पिता के साथ पूरी अयोध्या नगरी को वियोग में रोते हुए छोड़ के जाना एक साधु जैसा परित्याग का दर्शन करवाता हैं।वैसे ही अपने राजकुमारों वाला वैभव को छोड़ वन की और वलकल पहन कर वन के विषम वातावरण में जाना ये सब

 राम का साधुत्व का दर्शन करवाता हैं।जहां राम का भ्रातृ प्रेम हर एक प्रसंग में दिखता हैं।वह चाहे लक्ष्मण हो या भरत हो दोनों ही उन्हे अति प्यारे थे।जब हनुमानजी जड़ी बूटी ले कर आए थे तो उन्हें गले से लगा कर बोले थे–तुम मम प्रिय भरत सम भाई– ये उनका उत्कंठ प्रेम अपने भाइयों के प्रति दिख रहा हैं।भाइयों के अलावा अपने सेवकों के प्रति भी उतना ही प्यार था सुग्रीव के प्रति,सुग्रीव को न्याय दिला के उनकी पत्नी और राज्य दोनों ही वापस दिलवा देने के बाद उसने प्रभु राम की शरण में सदा के लिए ही स्थान पा लिया था।वैसे ही बाली जैसे अनाचारी को उसके पाप कर्म का फल स्वयं प्रभु राम ने दिलवाया था।

 वैसे ही जटायु, नील और नल जैसे अनेक प्रकार के मानव,वानर , रिंछ आदि ने प्रभु राम के शरण में स्थान पाया वह प्रभु राम की ही कृपा का परिणाम हैं।

वहीं शबरी के जूठे बेर खा कर उसे भी कृतज्ञ करने वाले प्रभु राम ने अहिल्या का भी उद्धार किया और वहीं पर केवट के शक का समाधान करवाने हेतु पग प्रक्षालन करवाया और उसे भी धन्य कर दिया।

 हनुमान जी जैसे बलशाली वानर जो सदा के लिए उनके दास बन जाएं और उनकी भक्ति को ही अपना जीवन मंत्र बना कर विष्णु जी के अवतार प्रभु राम को जीवन मंत्र ही तो उन्होंने माना था ।

विभीषण जो अपने भाई रावण के दुष्कृत्यों से सहमत नहीं होने से परेशान थे उन्हे भी अपनी शरण में स्थान दिया और विभीषण ने भी अपना फर्ज समझ कर रावण के साथ हुए युद्ध में उनकी मदद की और राम की शरण में अप्रतिम स्थान भी पाया था।

अगर हम भी राम की भक्ति में रत हो जाएं,पूर्ण श्रद्धा और विश्वास से भक्ति करें तो हमे भी अपने, हां अपने अपने राम जरूर मिल जायेंगे।

जयश्री बिरमी

जयश्री बिरमी

अहमदाबाद


Related Posts

हर घर तिरंगा अभियान और ध्वज संहिता का मान

August 13, 2023

हर घर तिरंगा अभियान और ध्वज संहिता का मान अपना राष्ट्रीय ध्वज यानी तिरंगा। इसको लहराते देख गर्व से सीना

सीआरपीसी आईपीसी एविडेंस एक्ट को रिप्लेस करने वाले बिल संसद में पेश

August 13, 2023

अंग्रेज़ी संसद द्वारा बनाए भारतीय क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के तीन कानूनों 1860-2023 का युग समाप्ति की प्रक्रिया शुरू सीआरपीसी आईपीसी

भारतीय संस्कृति के विविध रंगों और आध्यात्मिक शक्ति का आकर्षण

August 13, 2023

हमारे देश में कला की सबसे प्राचीन और सबसे श्रेष्ठ परिभाषाएं व परंपराएं विकसित हुई हैं वैश्विक स्तरपर भारतीय संस्कृति

चीन पर प्रतिबंधों का ज़बरदस्त प्रहार

August 13, 2023

भारत अमेरिका मिलकर ड्रैगन को दे रहे झटके पे झटका ! भारत ने ड्रैगन पर लैपटॉप टेबलेट तो अमेरिका ने

बदलेंगे अंग्रेजों के ज़माने के कानून

August 13, 2023

बदलेंगे अंग्रेजों के ज़माने के कानून आपराधिक न्याय प्रणाली ब्रिटिश औपनिवेशिक न्यायशास्त्र की प्रतिकृति है, जिसे राष्ट्र पर शासन करने

सेलिब्रिटीज सावधान ! विज्ञापन की नई गाइडलाइंस 2023 ज़ारी

August 11, 2023

सेलिब्रिटीज सावधान ! विज्ञापन की नई गाइडलाइंस 2023 ज़ारी Image credit -Google  स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती उत्पादों के विज्ञापनों संबंधी केंद्र

PreviousNext

Leave a Comment