Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh

अपनीं सांस्कृतिक विरासत से संपर्क बनाए रखना ज़रूरी

युवाओं को अपनीं सांस्कृतिक विरासत से संपर्क बनाए रखना ज़रूरी – अपनी मातृभाषा में बोलने पर गर्व का अनुभव होना …


युवाओं को अपनीं सांस्कृतिक विरासत से संपर्क बनाए रखना ज़रूरी – अपनी मातृभाषा में बोलने पर गर्व का अनुभव होना चाहिए

अपनीं सांस्कृतिक विरासत से संपर्क बनाए रखना ज़रूरी
भारत ख़ूबसूरत मानवीय बोलियों, भाषाओं का एक विश्वप्रसिद्ध अभूतपूर्व संगम – एड किशन भावनानी गोंदिया 
भारत माता की गोद में एक से बढ़कर एक अनेक ऐसी ख़ूबसूरत उपलब्धियां, हजारों वर्ष पूर्व से उपलब्ध है जिनकी अणखुट संरचना, प्राकृतिक ख़ूबसूरती, विशाल भारतीय संस्कृति, भारतीय भाषाओं के साहित्यग्रंथों सहित अनेक अपार क्षमता वाली बौद्धिक संपदा का विशाल भंडार देख संपूर्ण विश्व हैरान था!! जिस पर नज़र लग गई थी!! जिससे हजारों वर्षो की गुलामी से आजादी के बाद 1947 में भारत का विभाजन हुआ। साथियों फ़िर भी हम अपनी मेहनत, लगन से फिर अपनी ताकत, ज़ाज़बे और जांबाज़ी के साथ वैश्विक पटल पर प्रमुख हस्ती के रूप में अपने हर क्षेत्र की समृद्धि व ताकत के आगाज़ के साथ वैश्विक पटल पर अहम स्थान रखते हैं, जिसे देखकर विश्व की नजरें फिर भारत की ओर आकस्मिकता से देश भारत का लोहा मान रही है। आज भारत उस स्थिति में है जहां भारत की ओर नज़र लगाने वाले को हज़ार बार सोचना पड़ेगा!! यह है हमारा आज का भारत!!! साथियों बात अगर हम अपनी संस्कृति, विशाल मातृभाषा और भारतीय भाषाओं के साहित्यग्रंथों की करें तो यह हमारी पहचान है। यूं तो भारत में बावीस भाषाओं को संविधान में मान्यता दी गई है परंतु पूरे भारत की बात करें तो यहां भाषाएं व उपभाषाएं हजारों की संख्या में होंगी, जिसकी रक्षा करना और विलुप्तता से बचाने की ज़वाबदारी हमारे आज के युवाओं के ऊपर है क्योंकि आज हमारे देश की 68 प्रतिशत आबादी युवा है और इस युवा भारत के युवाओं को ही हमारी संस्कृति, भाषाओं को जीवित रखना है। इसलिए हमें अपनी मातृभाषा को महत्व देना होगा और अपने समाज, घर, क्षेत्र में अपनी मातृभाषा में बात करना होगा ताकि उसे हम विलुप्तता से बचा सके!!! आज इसकी ज़रूरत इसलिए पड़ गई है, क्योंकि आज के बदलते परिवेश में हमारे देश में पाश्चात्य संस्कृति का प्रचलन कुछ तेज़ी से बढ़ रहा है। खासकर के युवाओं में इसका क्रेज अधिक महसूस किया जा रहा है जो बड़े शहरों से होकर अब हमारे छोटे शहरों गांवों में भी फैलने की संभावना बढ़ गई है। जिसका संज्ञान बुजुर्गों को लेना होगा और युवाओं को अपनी मातृभाषा में बोलने, संस्कृति, साहित्यग्रंथों, भाषाओं की तरफ ध्यान आकर्षित कराकर उन्हें इसके लिए प्रोत्साहन देना होगा ताकि भारतीय धरोहर को विलुप्तता से बचाया जा सके। हमने इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के माध्यम से कई बार देखा, पड़ा, वह सुना है कि हमारे माननीय उपराष्ट्रपति का संज्ञान इस भाषाई क्षेत्र की ओर बहुत अधिक है!! और हर मौके पर इस दिशा में सुझाव, मार्गदर्शन, अपील प्रोत्साहन देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते जो काबिले तारीफ है!!! साथियों बात अगर हम माननीय उपराष्ट्रपति की दिनांक 12 दिसंबर 2021 को एक विश्वविद्यालय में स्थापना दिवस समारोह को संबोधन करने की करें तो पीआईबी के अनुसार उन्होंने इस संबंध में विश्‍वविद्यालयों से भारतीय भाषाओं में उन्नत अनुसंधान करने तथा भारतीय भाषाओं में वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली में सुधार लाने का सुझाव लाने की अपील की, जिससे कि उनकी व्‍यापक पहुंच तथा शिक्षा क्षेत्र में उपयोग को सुगम बनाया जा सके। उन्होंने ने आज विभिन्‍न भारतीय भाषाओं में साहित्यिक ग्रंथों के अनुवादों की संख्‍या बढ़ाने के लिए सक्रिय तथा ठोस प्रयासों की अपील की। इस संबंध में उन्‍होंने क्षेत्रीय भारतीय साहित्‍य की समृद्ध धरोहर को लोगों की मातृभाषाओं में सुलभ कराने के लिए अनुवाद में प्रौद्योगिकीय उन्‍नति का लाभ उठाने का सुझाव दिया। यह देखते हुए कि भूमंडलीकरण का व्‍यापक प्रभाव है, उपराष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि यह अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि युवा अपनी सांस्‍कृतिक विरासत से संपर्क बनाए रखे। पहचान बनाने तथा युवाओं में आत्मविश्‍‍वास को बढ़ावा देने में भाषा के महत्व को देखते हुए उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी मातृभाषा में बोलने में गर्व का अनुभव करना चाहिए। बाद में, उन्होंने भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा विश्वविद्यालय में आयोजित एक भारत श्रेष्ठ भारत की चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। आगन्तुक पुस्तिका में लिखने के दौरान उन्होंने तेलंगाना और हरियाणा के जोड़ीदार राज्यों की संस्‍‍कृति को प्रदर्शित करने में आयोजकों के प्रयासों की सराहना की। लोगों को प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए प्रोत्‍साहित करते हुए उन्होंने लिखा कि ऐसी पहलें जोड़ीदार राज्यों की समृद्ध सांस्‍कृतिक विरासत को प्रचारित करने तथा लोगों के बीच आपसी संपर्कों को बढ़ावा देने में महत्‍‍वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 का लक्ष्‍य भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना तथा बच्चों की मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा को प्रोत्‍साहित करना है। उन्होंने कहा कि अनिवार्य रूप से उच्‍चतर शिक्षा तथा तकनीकी पाठ्यक्रमों के लिए भी शिक्षा का माध्यम मातृभाषा होनी चाहिए। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से संपर्क बनाए रखना अत्यंत ज़रूरी है उनको अपनी मातृभाषा में बोलने पर गर्व का अनुभव होना चाहिए तथा भारत ख़ूबसूरत मानवीय बोलियों, भाषाओं का विश्वप्रसिद्ध संगम है जिसे संजोकर रखने का हर भारतीय नागरिक का कर्तव्य है।

-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

azadi aur hm-lekh

November 30, 2020

azadi aur hm-lekh आज मौजूदा देश की हालात देखते हुए यह लिखना पड़ रहा है की ग्राम प्रधान से लेकर

Previous

Leave a Comment