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अपना हाथ जगगन्नाथ-जयश्री बिर्मी

अपना हाथ जगगन्नाथ बचपन में ही कही पढ़ी या सुनी थी,ये स्वश्रय का जीता जागता प्रमाण ही समझो।एक ईख का …


अपना हाथ जगगन्नाथ

अपना हाथ जगगन्नाथ-जयश्री बिर्मी
बचपन में ही कही पढ़ी या सुनी थी,ये स्वश्रय का जीता जागता प्रमाण ही समझो।एक ईख का खेत था बहुत बड़ा,उसमे गैरैया ने घोंसला बनाया,तिनका तिनका जोड़ अपने आशियाने को दोनो चिड़िया बना रहे थे।एकदीन आया की घोंसला अंडो से भर गया।दोनो मिया बीवी बारी बारी से सेते थे ,एक सेता था दूसरा दाना चुगने जाता था।ऐसे ही दिन कटने लगे और चूजों की चू चू से घोंसले में रौनक आ गई।धीरे धीरे बच्चे बड़े होने लगे,वैसे ही ईख की फसल भी पक गई।अब जब बच्चे बड़े हो गए थे तो दोनों चिड़ियां दाना चुगने चली जाती थी बच्चें घोंसले के इधर उधर घूमते थे।एक दिन खेत के मालिक को बात करता सुन सारे उदास हो कर बैठ गए।जैसे शाम हुई मां बाप आए तो वो उदासी से बोले मां अब हमे ये जगह छोड़ देनी चाहिए।मां बाप हैरानी से पहले बच्चों को देखा फिर एक दूसरे की और। बच्चों ने आगे बताया कि खेत का मालिक और उसकी बीबी बात कर रहे थे कि कल मजदूर बुलाए हैं और फसल कटनी शुरू कर देंगे।मां थोड़ी देर चुप हो गई फिर बोली कोई बात नहीं बाद मैं चलेंगे।दूसरे दिन दोनो फिर दाना चुगने चले गए,ऐसे ही दो चार दिन निकल गए।फिर एक शाम बच्चो ने बताया कि उनसे मजदूर का इंतजाम नहीं हो पाया तो रिश्तेदारों को बुलाया है कल से कटाई शुरू हो जाएगी,मां फिर थोड़ी देर चुप फिर बोली बाद मैं देखेंगे, इसबार बच्चे भी परेशान थे।फिर सुबह वही उनका दाना चुगने जाना और शाम को घर वापसी।तीन चार दिन और बीते,फिर बच्चो ने खबर दी की वो रिश्तेदार भी नही आए कल से उनके घर के सदस्य मिलके कटाई करने वाले है।अब मां थोड़ी चिंतित दिखाई दी और कहा कल सुबह तड़के ही हम ठिकाना बदल देंगे।बच्चो ने आश्चर्य से पूछा कि इतनी बार कटाई नहीं की तो अब भी नहीं होगी तो वह चिंतित क्यों हो रही थी।
मां ने कहा अब तक वो दूसरो पर भरोसा कर काम करना चाहते थे,लेकिन अब उन्हों ने खुद करने की ठानी हैं इसलिए कल कटाई जुरूर होगी इसलिए हमे चलना चाहिए।
सुबह तड़के पास ही के पेड़ पर नया आशियाना बना लिया।थोड़ी देर में उस खेत में कटाई शुरू हो गई और बच्चो को मां की स्वश्राय वाली बात समाज मैं आई।

जयश्री बिर्मी
अहमदाबाद


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