Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

अपना हाथ जगगन्नाथ-जयश्री बिर्मी

अपना हाथ जगगन्नाथ बचपन में ही कही पढ़ी या सुनी थी,ये स्वश्रय का जीता जागता प्रमाण ही समझो।एक ईख का …


अपना हाथ जगगन्नाथ

अपना हाथ जगगन्नाथ-जयश्री बिर्मी
बचपन में ही कही पढ़ी या सुनी थी,ये स्वश्रय का जीता जागता प्रमाण ही समझो।एक ईख का खेत था बहुत बड़ा,उसमे गैरैया ने घोंसला बनाया,तिनका तिनका जोड़ अपने आशियाने को दोनो चिड़िया बना रहे थे।एकदीन आया की घोंसला अंडो से भर गया।दोनो मिया बीवी बारी बारी से सेते थे ,एक सेता था दूसरा दाना चुगने जाता था।ऐसे ही दिन कटने लगे और चूजों की चू चू से घोंसले में रौनक आ गई।धीरे धीरे बच्चे बड़े होने लगे,वैसे ही ईख की फसल भी पक गई।अब जब बच्चे बड़े हो गए थे तो दोनों चिड़ियां दाना चुगने चली जाती थी बच्चें घोंसले के इधर उधर घूमते थे।एक दिन खेत के मालिक को बात करता सुन सारे उदास हो कर बैठ गए।जैसे शाम हुई मां बाप आए तो वो उदासी से बोले मां अब हमे ये जगह छोड़ देनी चाहिए।मां बाप हैरानी से पहले बच्चों को देखा फिर एक दूसरे की और। बच्चों ने आगे बताया कि खेत का मालिक और उसकी बीबी बात कर रहे थे कि कल मजदूर बुलाए हैं और फसल कटनी शुरू कर देंगे।मां थोड़ी देर चुप हो गई फिर बोली कोई बात नहीं बाद मैं चलेंगे।दूसरे दिन दोनो फिर दाना चुगने चले गए,ऐसे ही दो चार दिन निकल गए।फिर एक शाम बच्चो ने बताया कि उनसे मजदूर का इंतजाम नहीं हो पाया तो रिश्तेदारों को बुलाया है कल से कटाई शुरू हो जाएगी,मां फिर थोड़ी देर चुप फिर बोली बाद मैं देखेंगे, इसबार बच्चे भी परेशान थे।फिर सुबह वही उनका दाना चुगने जाना और शाम को घर वापसी।तीन चार दिन और बीते,फिर बच्चो ने खबर दी की वो रिश्तेदार भी नही आए कल से उनके घर के सदस्य मिलके कटाई करने वाले है।अब मां थोड़ी चिंतित दिखाई दी और कहा कल सुबह तड़के ही हम ठिकाना बदल देंगे।बच्चो ने आश्चर्य से पूछा कि इतनी बार कटाई नहीं की तो अब भी नहीं होगी तो वह चिंतित क्यों हो रही थी।
मां ने कहा अब तक वो दूसरो पर भरोसा कर काम करना चाहते थे,लेकिन अब उन्हों ने खुद करने की ठानी हैं इसलिए कल कटाई जुरूर होगी इसलिए हमे चलना चाहिए।
सुबह तड़के पास ही के पेड़ पर नया आशियाना बना लिया।थोड़ी देर में उस खेत में कटाई शुरू हो गई और बच्चो को मां की स्वश्राय वाली बात समाज मैं आई।

जयश्री बिर्मी
अहमदाबाद


Related Posts

बेपरवाह

September 3, 2022

चाह गई चिंता मिटी, मनुआ बे परवाह।जिनको कछू न चाहिए, वे साहन के साह।। बेपरवाह साधारण बातों और संदेह से

बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाने की जरूरत।

September 3, 2022

बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाने की जरूरत। दुनिया में बोली जाने वाली प्रत्येक भाषा एक विशेष संस्कृति, माधुर्य, रंग

ज़िम्मेदार आख़िर कौन

September 3, 2022

“ज़िम्मेदार आख़िर कौन” pic credit -freepik यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:।यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफला: क्रिया:। अर्थात : जिस परिवार

पहले अपने अवगुणों का बाॅयकोट करो

September 2, 2022

“पहले अपने अवगुणों का बाॅयकोट करो” आजकल सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड चल रहा है “बाॅयकोट” यानी कि बहिष्कार का।

आईएनएस विक्रांत( INS-VIKRANT)

September 2, 2022

आईएनएस विक्रांत( INS-VIKRANT) मेक इन इंडिया – विमान वाहक युद्धपोत बनाने में भारत की आत्मनिर्भरता की क्षमता का प्रदर्शन भारत

लड़कियों को लड़कों से ज्यादा पोषण में सुधार की जरुरत

September 1, 2022

लड़कियों को लड़कों से ज्यादा पोषण में सुधार की जरुरत लड़के और लड़कियों दोनों के कुपोषित होने की संभावना लगभग

Leave a Comment