Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

अपना एक घर- जितेन्द्र ‘कबीर’

अपना एक घर बहुत आलीशान न भी हो,मामूली-सी छत के नीचे होचाहे साधारण सा एक कमरा,घांस-फूस से बनी झोंपड़ी होअथवा …


अपना एक घर

अपना एक घर- जितेन्द्र 'कबीर'
बहुत आलीशान न भी हो,
मामूली-सी छत के नीचे हो
चाहे साधारण सा एक कमरा,
घांस-फूस से बनी झोंपड़ी हो
अथवा हो पॉलिथीन से बना

एक अस्थाई टेंट ही,
जिसमें इंतजार कर रहे हों
माता-पिता, भाई-बहन एवं
बीवी बच्चों में से कोई

या फिर इंतजार करती हों
उनकी यादें ही,
तो काम के बाद
इंसान घर लौटता है जरूर
अपने अस्तित्व को महसूस करने।

जिसके पास नहीं कोई कारण
घर लौटने का
वो बंजारा हो जाता है भटकता दर-बदर,
बहुत जरूरी है इंसान के लिए
होना अपना एक घर।

जितेन्द्र ‘कबीर’
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति – अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

कविता– उस दिन ” दशरथ केदारी ” भी मरा था !

September 22, 2022

कविता- उस दिन ” दशरथ केदारी ” भी मरा था !  उस दिन बहुत गहमागहमी थी  जब एक हास्य कलाकार

सोच को संकुचित होने से बचाएं।

September 21, 2022

सोच को संकुचित होने से बचाएं। अपनी सोच को संकुचित ना होने दें,इस अपार समझ को कभी ना खोने दें,असीम

मेरी दर्द ए कहानी

September 19, 2022

मेरी दर्द ए कहानी ना हो कभी किसी की भी मेरी तरह जिंदगानीना हो कभी किसी कीमेरी तरह आंखों में

कविता-सहज़ता में संस्कार उगते हैं

September 17, 2022

कविता-सहज़ता में संस्कार उगते हैं अपने आपको सहज़ता से जोड़ो सहज़ता में संस्कार उगते हैं सौद्राहता प्रेम वात्सल्य पनपता है

कविता-भ्रष्टाचार करके परिवार को पढ़ाया

September 17, 2022

कविता-भ्रष्टाचार करके परिवार को पढ़ाया भ्रष्टाचार करके परिवार को पढ़ाया टेबल के नीचे पैसे लेकर परिवार बढ़ाया कितना भी समेट

कविता-भारतीय संस्कृति में नारी

September 17, 2022

कविता-भारतीय संस्कृति में नारी भारतीय संस्कृति में नारी लक्ष्मी सरस्वती पार्वती की रूप होती हैसमय आने पर मां रणचंडी दुर्गा,

PreviousNext

Leave a Comment