Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

अनकही चीखें ( गर्भपात)

अनकही चीखें आज मैं अपनी बेटी के क्लिनिक में बैठ उसके काम को बड़े ध्यान से देख रहा था।कुछ सगर्भा …


अनकही चीखें

अनकही चीखें ( गर्भपात)

आज मैं अपनी बेटी के क्लिनिक में बैठ उसके काम को बड़े ध्यान से देख रहा था।कुछ सगर्भा औरतें तो कुछ स्वास्थ्य संबंधी प्रश्नों को ले आ रही थी।उसके दर्दियों की सूची खत्म होते ही वह बाहर आई तो उसके हाथ में एक सी डी थी जिसे उसने मुझे दिया और बोली,” पापा,जब समय मिले इसे देख लेना।”मैंने भी ले ली और उसके साथ गाड़ी बैठ गया।घर जा कर खाना खाया और आराम करने बिस्तर पर लेट के कब नींद ने आ घेरा पता ही नहीं चला।शाम को उठकर चाय पी और सी डी के बारे में भूल गया।बहुत दिनों बाद जब अपनी टेबल पर जमा फालतू कागज़ हटा रहा था तो सी डी हाथ में आई तो उसे लैपटॉप में लगा कर देखना शुरू किया तो जैसे हिल सा गया।अतीत की घटना नजर के सामने से चित्रपट जैसे गुजर ने लगी।
मैं उदास था अंदर से ग्लानि भाव से ग्रस्त संध्या को देख रहा था,जब उसने बोला,” आप तैयार हो जाओ डॉक्टर से मुलाकात का समय हो रहा हैं।” में फ़िर से सहम गया था मैंने कहा,” संध्या छोड़ो नहीं जाते डॉक्टर के पास ,सहेली तो हैं तुम्हारी मना कर दो हम नहीं जा पाएंगे।” संध्या रोनी सी शक्ल बना कर बोली,” मैं भी कहा चाहती हूं,लेकिन घर वाले और रिश्तेदारों के तानों से जीवन नर्क बन कर रह जायेगा।मुझे बदनसीब गिना जाएगा।” मैं भी उसकी मजबूरी समझ रहा था तो बुझे मन से तैयार हो गया।संध्या की रिपोर्ट में जातीपरीक्षण में स्त्री शब्द मुझे अंदर तक झकझोर गया था,छोटे से हाथों का स्पर्श,जो मेरे गालों को सहला रहे थे।बेटी हैं तो उसका गृहप्रवेश को वर्जित कर उसकी जन्म से पहले दुनिया में आने से पहले उसे विदा करना मन को अंदर से कचोटता था।
जैसे ही पहुंचे हमें डॉक्टर ने पूछा कि इस गर्भपात में दोनों को सम्मति पत्र में हस्ताक्षर करने होंगे।घर वालों के दबाव में सम्मत तो हम दोनों हो गए लेकिन मन नहीं मान रहा था।हमारी द्विधा देख डॉक्टर सेजल बोली,”क्या बात हैं कोई प्रश्न है क्या?” तब संध्या ने पूरी बात बताई तो वह पूरा मामला समझ गई।थोड़ी देर बाद पेपर पर कुछ लिख के बोली,”ये लो इसमें लिखा है को माता की जान को खतरा होगा अगर गर्भपात करवाया गया।कुछ दवाइयां लिखी हैं जिसे लेने से मां और बच्चे को स्वास्थ्य लाभ होगा।”हमदोनों खुशी खुशी घर आएं थे एक पाप का आचरण करने से बच गए थे।

सी डी में जन्मे बच्चे की चीखें थी जो बेअवाज थी।उसकी तड़प, वह समझ गई थी कि जान ली जा रही थी।उसे बाहर की दुनिया का एहसास हो गया था।उसकी तड़प जो देखी नहीं जा रही थी।क्या ये मेरी बेटी के साथ भी होना था,जो आज खुद उन सगर्भा स्त्रियों की सेवा कर रही थी।

About author  

Jayshree birimi
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद (गुजरात)


Related Posts

Pahla safar ,anubhuti by Jay shree birmi

September 9, 2021

 पहला सफर,अनुभूति करोना काल में लगता था कि शायद अब दुनिया से कट कर ही रह जायेंगे। ऑनलाइन देख खूब

Zindagi choti kahani bandi by Kashmira singh

September 9, 2021

 जिंदगी छोटी कहानी बड़ी । हमारे चारो तरफ कहानियों का जाल सा फैला हुआ है । यह दीवार पर टँगी

Langoor ke hath ustara by Jayshree birmi

September 4, 2021

लंगूर के हाथ उस्तरा मई महीने से अगस्त महीने तक अफगानिस्तान के लड़कों ने धमासान मचाया और अब सारे विदेशी

Bharat me sahityik, sanskriti, ved,upnishad ka Anmol khajana

September 4, 2021

 भारत प्राचीन काल से ही ज्ञान और बुद्धिमता का भंडार रहा है – विविध संस्कृति, समृद्धि, भाषाई और साहित्यिक विरासत

Bharat me laghu udyog ki labdhiyan by satya Prakash Singh

September 4, 2021

 भारत में लघु उद्योग की लब्धियाँ भारत में प्रत्येक वर्ष 30 अगस्त को राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस मनाने का प्रमुख

Jeevan banaye: sekhe shakhayen by sudhir Srivastava

September 4, 2021

 लेखजीवन बनाएं : सीखें सिखाएंं      ये हमारा सौभाग्य और ईश्वर की अनुकंपा ही है कि हमें मानव जीवन

Leave a Comment