Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Alka_Pandey, lekh

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का सम्मान समारोह कार्यक्रम संपन्न

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का सम्मान समारोह कार्यक्रम संपन्न भारतीय अग्निशिखा मंच ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में महिलाओं के …


अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का सम्मान समारोह कार्यक्रम संपन्न

भारतीय अग्निशिखा मंच ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में महिलाओं के रचनात्मक कार्यक्रम का साथ सम्मान समारोह का आयोजन किया ,और महिलाओं को ही नहीं पुरुषो को भी सम्मानित किया । बहुत सफल आयोजन रहा मंच की अध्यक्षा अलका पांडे ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार हम ऑफलाइन कार्यक्रम नहीं ले पाए ,क्योंकि स्वर्गीय पांडे जी को अभी 1 साल पूरा नहीं हुआ है ।
इसलिए यह ऑनलाइन ही कार्यक्रम रखा गया और इस कार्यक्रम में 45 महिलाओं और पुरुषों ने भाग लिया ।
इस कार्यक्रम के समारोह अध्यक्ष राम राय जी मुख्य अतिथि आरती आनंद विशेष अतिथि मंजू गुप्ता संतोष साहू ,जनार्दन सिंह ,पन्ना लाल शर्मा ,आशा जाकर, शिवपूजन पांडे ,आदि अतिथियों ने मंच की गरिमा बढ़ाई और कार्यक्रम का संचालन किया अलका पांडे , सुरेंद्र हरडे ,शोभा रानी तिवारी ने किया सभी रचनाकारों की रचनाएं काफी अच्छी रही एक से बढ़कर एक रचनाकार आए ।
महिला दिवस के इस अवसर पर अलका पांडे ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकार तो जानने हैं ,और वह आज बखूबी उनका इस्तेमाल कर रही हैं परंतु मैं कहना चाहूंगी कि महिलाएं अपने अधिकारों का दुरुपयोग ना करते हुए उन्हें सही दिशा में इस्तेमाल करे, समाज को एक नई दिशा दें ,एक मिसाल कायम करें ना कि घर और बाहर लोगों को परेशानी में डालें या विघटन का काम करें हमें हमारे अधिकारों का कभी भी दुरुपयोग नहीं करना चाहिए एक सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए हम पुरुषों की बराबरी जरूर करें उनके गुणों की उनकी कार्य क्षमता को देखते हुए ,ना कि हम उनकी बुराइयों को अपनाए,हमें उनकी बुराइयां नहीं अपनाना है ।हम उनकी तरह नहीं बन सकते हम महिलाएं हैं हमने संवेदना है हम में ममता है हमें अपने गुणों का और विकास करना है ,और समाज को एक नई दिशा देना है
आदि।
आभार निर्जा ठाकुर ने व्यक्त किया और चंद लाइने जो सब ने कहीं उनकी देखिए

*स्त्री *

स्त्री कैद से मुक्ति असंभव हैं।
जन्म से हथकड़ी लगा दी जाती है
उठने , बैठने , पहने , ओढ़ने , खाने , पीने यहाँ तक हंसने और बोलने पर भी पहरे बैठा दिये जाते हैं ।।
दुनिया की समस्त पाबंदियाँ केवल स्त्री पर आकर दम लेती है …
यहाँ तक की चरित्र के समस्त आयाम
केवल स्त्री के लिए ही परिभाषित हैं…
पुरुष मुक्त है हर बंदिशों से
चरित्र की परिभाषा सिर्फ स्त्री को समझना होगा…!!
कुँवारी तो कुँवारी ब्याहता भी जकड़ी हैं
अजीब रीति रिवाजों में …
कायनात के सारे नियम उसके लिये है ….
वह सिंदूर लगाना भूल गई तो क़यामत ..
और हर जगह स्टेटस में मैरिड दिखाना निहायत जरुरी वर्ना ….
जैसे मंगल सुत्र , सिंदूर, बिंदी कोई सुरक्षा चक्र हो….
स्त्री डरती है हर समय
जब कोई पुरुष उसका दोस्त बनता है… एक कप चाय रेस्टोरेंट में पीना तो
दूर बात करना ..भी प्र्शन चिंन्ह ……?

उसे बहुत सोच समझ कर करना पड़ता है , शब्दों का चयन… आत्मीयता , स्नेह , प्रेम का प्रदर्शन …
और भावों की उन्मुक्त अभिव्यक्ति
सदैव स्त्री के चरित्र पर एक प्रश्न चिह्न लगाती है…. ?
स्त्री कि बेबाकियाँ उसे बिना सोचे समझे चरित्रहीन बनाती हैं ।
और उसकी अपनी उन्मुक्त हँसी
एक अनकहे आमंत्रण का
पर्याय मान ली जाती है… जो कंलक बन उसे अभिशप्त कर जाती हैं ।।
पुरुष की खुली सोच को स्वीकार न करने के लिए अनेकों अप्रिय शब्दों को सुनना पड़ता हैं ।।
और साथ ही विवश होती है
अपनी खुली सोच पर नियंत्रण रखने के लिए.. वाह रे पुरुष प्रधान समाज …?
हर स्त्री चाहती हैं , ख़ूबसूरत लगना, बनना , संवरना , खिलखिलाना ….
स्वादिष्ट भोजन पकाना , खिलाना , सबको ख़ुश रखना ।उन्मुक्त गगन में उड़ना …
और मिलकर घर की तमाम ज़िम्मेदारियाँ उठाना …
वह साझा करना चाहती है हर ज़िम्मेदारी को हर मन की भावनाओं को
जब वह समाज के दायरे के बाहर सोचती हैं
तो कहीं जगह नहीं पाती…
पुरुष तो पुरुष स्त्री समाज ही उसे जलन और हेय की दृष्टि से देखता है…
स्त्री ही स्त्री कि दुश्मन बन जाती है
और लुका छिपी से पुरुष समाज
स्त्री में अपने अवसर तलाश करता है…
स्त्री की तमाम सोच..
उसकी तमाम संवेदनाएँ … और वेदनाएँ
उसको घुटन भरी ज़िंदगी देती हैं ।
वह छटपटाती हैं गरजती भी हैं ।।
पर स्वयं की क़ैद से मुक्ति संभव है……क्या ….?
क्या स्त्री , को कभी समानता का दर्जा मिल पायेगा यह एक अनुत्तरित प्रश्न हैं …….?
कब हल होगा या कभी नहीं …
स्त्री कोमलांगी है पर लाचार नहीं
वह संवेदनशील है , तो पाषाण भी
यह समझना होगा समाज को
स्त्री कमजोर नहीं… अपने के लिये प्यार के लिये सहती हैं , और जीती है
क्यों की वह स्त्री है ।

डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई

मै नारी हूँ अबला नही
मै नारी हूँ सृष्टि करता हूँ।
कठीन परीक्षा हर पल देती
हां। मै नारी.हू् नारी हूं।
बृजकिशोरी त्रिपाठी
गोरखपूर यू.पु
आज की नारी
नहीं मानती लक्ष्मण रेखा
अपने रास्ते खुद बनाती है
कमज़ोर नहीं है ये,
नहीं मानती दकियानुसी बातों को
बिना तर्क नही मानती खोखले रिवाज़ो को ।।।।

वीना अचतानी
जोधपुर ।।।

*नारी तुम महान हो, तुम मौन हो*
*विपदाओं से हारी नहीं*
*ममता से भरी हो*
*सत्य की ज्वाला में भी हर पल खरी हो*!*

सुरेंद्र हरडे कवि
नागपुर

नारी तो बस नारी है।
उसमें दुनिया सारी है।
8मार्च ही महिला दिवस क्यों?
हर दिवस ही महिला दिवस यों।

रानी अग्रवाल,मुंबई।

मैं नारी हूंँ हॉं गर्व है मुझे मै़ नारी हूंँ,
सदियों से दबाई कुचली, मसली गई।
धीरे धीरे मैने पहचाना स्वयं को
और नारी से नारायणी बनती चली गई

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोंबिवली
महाराष्ट्र

नारी है जग का गौरव,
विश्व की पहचान है,
झांसी की रानी मंदिर टेरेसा,
नारी तुम वह शक्ति हो जो खंडहर को भी घर बना देती हो ।
तुम्हारें संस्कार घर का नींव है,
तुम्हारा कर्तव्य त्याग मनोबल
ईट गारे का मिश्रण ।और विश्वास घर की दीवारें हैं।नारी ही हिन्दुस्तान है।

श्रीमती शोभा रानी तिवारी इन्दौर

नारी तुम वह शक्ति हो जो खंडहर को भी घर बना देती हो ।
तुम्हारें संस्कार घर का नींव है,
तुम्हारा कर्तव्य त्याग मनोबल
ईट गारे का मिश्रण ।और विश्वास घर की दीवारें हैं।

पल्लवी झा।

मैं स्त्री हूं,
मैं पोषक हूं,
मैं सृजक हूं,
मेरे अनगिनत रूप हैं,
अनगिनत नाम हैं,
मैंने अनगिनत किरदारों को ओढ़ा है ।

डॉ . आशालता नायडू .
मुंबई . महाराष्ट्र .


Related Posts

12 वें विश्व हिंदी सम्मेलन फ़िजी 15 -17 फ़रवरी 2023 पर विशेष

February 16, 2023

 12 वें विश्व हिंदी सम्मेलन फ़िजी 15 -17 फ़रवरी 2023 पर विशेष  विश्व हिंदी सम्मेलन भारतकोश, ज्ञान का हिंदी महासागर

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हैं स्वयं सहायता समूह

February 16, 2023

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हैं स्वयं सहायता समूह स्वयं सहायता समूह दृष्टिकोण ग्रामीण विकास के लिए एक सक्षम, सशक्त और

मानवता पर लेख| manavta

February 16, 2023

मानवता पर लेख कईं रसों से हमारा ह्रदय समृद्ध है।सब रस बहुत ही आवकारदायक है।जैसे प्रेम,जिससे मानव सहृदय बनता है,

काल बनाम दयाल| kal vs dayal

February 16, 2023

काल बनाम दयाल काल और दयाल की माया काल से बचकर दयाल की शरण जाना माननीय बौद्धिक निर्णय क्षमता के

देश के सामने बुनियादी मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश! संविधान खतरे में?

February 16, 2023

बयानवीरों की जय हो! देश के सामने बुनियादी मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश! संविधान खतरे में? पक्ष-विपक्ष अपनी सुविधानुसार

आज का भारत तेज़ सोचता है, दूर की सोचता है और तुरंत फैसले लेता है

February 16, 2023

नई सोच नई एप्रोच आज का भारत तेज़ सोचता है, दूर की सोचता है और तुरंत फैसले लेता है भारत

PreviousNext

Leave a Comment