Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

अंतर्मन को संवारते जा। Antarman ko sanwarte ja

अंतर्मन को संवारते जा। जाने वाले को बार-बार रोका नहीं करते,अकेले जीने से डरा नहीं करते,टूट गया जो बर्तन टूटना …


अंतर्मन को संवारते जा।

जाने वाले को बार-बार रोका नहीं करते,
अकेले जीने से डरा नहीं करते,
टूट गया जो बर्तन टूटना था,
टूटे हुए बर्तन को भरा नहीं करते।

जाने दो जो आपका है नहीं,
वक्त पर मिलेगा जो आपके लिए है सही,
माना बहुत वक्त निकल चुका है,
पर विश्वास बाकी अभी हे कहीं।

क्यों किसी की राह को रोके हम,
क्यों समझे खुद को कम,
हर चीज बस में होती नहीं,
क्यों रखना किसी बात का वहम।

खुद को समझने में वक्त तो लगता है,
अपनों से जुदा होने का दर्द
कोई अपना समझता है,
धैर्य के साथ स्वयं का धीरज बांधों
किसी भी दर्द को जाने में
थोड़ा वक्त तो लगता है।

तू निडर बन, तू लहर बन,
आगे बढ़ और गदर बन,
अपनी लड़ाई कभी-कभी होती है खुद से,
अपनी कमजोरियों को हटाकर
एक नया सफर बन।

जीवन में आना जाना लगा रहता है,
हर वक्त तुमसे बस यही कहता है,
आगे बढ़ तू चलता जा,
अपनी कमजोरियों को हटाकर
सवरता जा,
अपनी कमजोरियों को हटाकर
सवरता जा।

About author

डॉ. माध्वी बोरसे! ( स्वरचित व मौलिक रचना) राजस्थान (रावतभाटा)


डॉ. माध्वी बोरसे!
( स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

Bas tujhko hi paya by pravin pathik

July 11, 2021

 ” बस,तुझको ही पाया है” खो दिया सब कुछ मैंने यूॅं बस, तुझको ही पाया है।        

geet daduron tum chup raho ab by shivam

July 3, 2021

– गीत दादुरों तुम चुप रहो अब ऐ किनारों, इन हिलोरों को तुम्हें सहना पड़ेगा।जिंदगी दिन- रात है, दिन रात

Kavita ek seema jaruri hai by jitendra kabir

July 3, 2021

 एक सीमा जरूरी है रिश्तों में अनुचित मांग पर एक बार जब हम झुक जाते हैं, तो आने वाले बहुत

Kavita thoda sa chintan by Jitendra kabir

July 3, 2021

 थोड़ा सा चिंतन बहुत बातें हो गई हों अगर पैट्रोल के दाम पैंतीस रुपए पर लाने की, तो थोड़ा सा

Kavita koi aashcharya nhi hai by Jitendra kabir

July 3, 2021

 कोई आश्चर्य नहीं है मौका मिलने पर हममें से ज्यादातर लोग हो सकते हैं ठग, चोर, झूठे और बेईमान, तो

kavita aise apradh se hm bachte hai by vinod kumar

July 3, 2021

.कविता-ऐसे अपराध से हम बचते हैं हम इंसानों ने मंदिर बनाने में पैसा लगाया हम इंसानों ने मस्जिद बनाने में

Leave a Comment