Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Deep madira, lekh, poem

हिंदू राष्ट्र-दीप मदिरा

हिंदू राष्ट्र मैं हिंदू राष्ट्र का समर्थक हूं। अगर तुम देने को तैयार हो समानताकिसी को नहीं बता रहे हो …


हिंदू राष्ट्र

हिंदू राष्ट्र-दीप मदिरा
मैं हिंदू राष्ट्र का समर्थक हूं।

अगर तुम देने को तैयार हो समानता
किसी को नहीं बता रहे हो सर्वश्रेष्ठ
किसी से नहीं कर रहे हो छुआछूत
और सबके साथ रखना चाहते हो
रोटी-बेटी का रिश्ता और एकता
तो मैं… आपके हिंदू राष्ट्र का समर्थक हूं।

अगर तुम लड़ने को तैयार हो
दलित, आदिवासी और पिछड़े
लोगों की लड़ाई लड़ने को…
और जनसंख्या के आधार पर
सबको हिस्सेदारी देने को…
अपनी संकीर्ण मानसिकता
और व्यवहार बदलने को…
तो मैं आपके हिंदू राष्ट्र का समर्थक हूं।

– दीप मदिरा


Related Posts

chhoti behna kavita by Anita Sharma jhasi

July 23, 2021

 छोटी बहिना एक डाली के फूल थे हम ,     कितने बसंत साथ जिये।         हर

jitendra kabir ki kavitayien champa hp

July 23, 2021

जितेंद्र  कबीर की कविताएँ   इंसान को इंसान से तो मिलाया होशो-हवास में अक्सर दूसरे धर्म के लोगों के खिलाफ नफरत

Lekh jeena jaruri ya jinda rahna by sudhir Srivastava

July 23, 2021

 लेखजीना जरूरी या जिंदा रहना        शीर्षक देखकर चौंक गये न आप भी, थोड़ा स्वाभाविक भी है और

Meri abhilasha kavita by sudhir Srivastava

July 23, 2021

 मेरी अभिलाषा मेरे मन की यह अभिलाषा पूरी हो जन जन की आषा, मिटे गरीबी और निराशा संस्कार बन जाये

Yadon ka sahara by hare Krishna Mishra

July 23, 2021

 यादों का सहारा अपराधी मैं तेरा हूं , सजा चाहे जो भी दो, नहीं शिकवा नहीं गिला, आंशू तो हमारे

tum mere ho kavita by Anita Sharma jhasi

July 23, 2021

 तुम मेरे हो कहाँ खो गये गिरधारी। मोर मुकुट,बंसीवाले। ग्वाले ,गोपियाँ सब रीझे, पर….तुम मेरे हो गिरधारी। कब से बाँट

Leave a Comment