Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Deep madira, lekh, poem

हिंदू राष्ट्र-दीप मदिरा

हिंदू राष्ट्र मैं हिंदू राष्ट्र का समर्थक हूं। अगर तुम देने को तैयार हो समानताकिसी को नहीं बता रहे हो …


हिंदू राष्ट्र

हिंदू राष्ट्र-दीप मदिरा
मैं हिंदू राष्ट्र का समर्थक हूं।

अगर तुम देने को तैयार हो समानता
किसी को नहीं बता रहे हो सर्वश्रेष्ठ
किसी से नहीं कर रहे हो छुआछूत
और सबके साथ रखना चाहते हो
रोटी-बेटी का रिश्ता और एकता
तो मैं… आपके हिंदू राष्ट्र का समर्थक हूं।

अगर तुम लड़ने को तैयार हो
दलित, आदिवासी और पिछड़े
लोगों की लड़ाई लड़ने को…
और जनसंख्या के आधार पर
सबको हिस्सेदारी देने को…
अपनी संकीर्ण मानसिकता
और व्यवहार बदलने को…
तो मैं आपके हिंदू राष्ट्र का समर्थक हूं।

– दीप मदिरा


Related Posts

Pran priye kavya by salil saroj

September 22, 2021

 प्राण-प्रिय अधरों पर कुसुमित प्रीत- परिणय केशों में आलोकित सांध्य मधुमय चिर- प्रफुल्लित  कोमल किसलय दिव्य-ज्योति जैसी मेरी प्राण-प्रिय  1

Madhur sangeet bina ka by Dr. H.K. Mishra

September 22, 2021

 मधुर संगीत वीणा का तेरी वीणा की मधुर ध्वनि, मां सदा भाव भर देती है, अंधकार भरे अंतर उर में,

Bhav rishto ke by Jay shree birmi

September 22, 2021

 बहाव रिश्तों का रिश्ते नाजुक बड़े ही होते हैं किंतु कोमल नहीं होते।कभी कभी रिश्ते दर्द बन के रह जाते

Aabhasi bediyaan by Jitendra Kabir

September 22, 2021

 आभासी बेड़ियां पिंजरे का पंछी उससे बाहर निकलकर भी उड़ान भरने में हिचकिचाता है बहुत बार, वो दर-असल कैद है

Insan ke prakar by Jay shree birmi

September 22, 2021

 इंसान के प्रकार हर इंसान की लक्षणिकता अलग अलग होती हैं।कुछ आदतों के हिसाब से देखा जाएं तो कुछ लोग

Harj kya hai by Jitendra Kabir

September 22, 2021

 हर्ज क्या है? भाषण से पेट भरने की कला सीख ली है हमनें, रोटी को गाली देनें की  हिमाकत करने

Leave a Comment