Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Aalekh, Bhawna_thaker, lekh

हर महिला को आज़ाद ज़िंदगी जीने का पूरा अधिकार है

“हर महिला को आज़ाद ज़िंदगी जीने का पूरा अधिकार है” Pic credit freepik.com “मत सहो बेवजह प्रताड़ना की जलन जागो …


“हर महिला को आज़ाद ज़िंदगी जीने का पूरा अधिकार है”

Girls freedom
Pic credit freepik.com

“मत सहो बेवजह प्रताड़ना की जलन जागो औरतों अपनी क्षमता को पहचानों, नहीं हो तुम सज़ा की अधिकारी, संसार रथ की सारथी हो कर दो असमानता की आँधी का हनन”

सम्मान की अधिकारी कुछ औरतें समाज के डर से और लोक निंदा के भय से अपनी स्वाधीनता की बलि चढ़ाते, ऐसे दुराचारी पति या पुरुष के हाथों दमन सहती रहती है, जिनको स्त्रियों के सम्मान से कोई लेना-देना ही नहीं होता। पत्नी को पैरों की जूती समझने वाले पति की अंध भक्ति महज़ इसलिए करती है की पति है। अपने जीवन के बारे में सोचना चाहती ही नहीं। उनको पता ही नहीं होता की हज़ारों राहें और असंख्य मौके उनके स्वागत में तैयार है बस हिम्मत करके कदम आगे बढ़ाने की जरूरत होती है। कोई भी महिला कमज़ोर नहीं, अगर लाचारी बेबसी वाली मानसिकता से बाहर निकले तो अपना जीवन सार्थक बना सकती है। पर नहीं समाज की थोपी गई कुछ रवायतों का अनुसरण करते प्रताड़ना सहते यूँहीं जीवन बीता देती है। आज नहीं तो कल पति सुधर जाएगा इस आस में श्मशान में बुझ चुकी राख में चिंगारी तलाश करती रहती है। एक बार खुद पर यकीन करके उस नर्क से निकलने की कोशिश तक नहीं करती।
कुछ लड़कियों के ज़हन में माँ-बाप एक ग्रंथी बाँध देते है कि जहाँ लड़की की डोली उतरती है, वहीं से अर्थी उठनी चाहिए। शादी के बाद पति का घर ही लड़कियों की असली जगह होती है, और चार लोग सुनेंगे तो क्या कहेंगे वाली मानसिकता बच्चियों की ज़िंदगी खराब कर देती है। समाज क्या हमारे घर में दो बोरी अनाज डालने आता है? या मुसीबत में साथ खड़ा रहता है? जो समाज के डर से बेटियों की बलि नरपिशाचों के हाथों चढ़ा दें। क्यूँ चुटकी सिंदूर के बदले पूरी ज़िंदगी दाँव पर लगानी है?
हर गाँव और शहर में नारी सुरक्षा संस्थाएँ होती है, सारे कायदे कानून स्त्रियों के हक में है अपने अधिकारों का उपयोग करो। अगर आप कोई काम जानती है, आपमें कोई हुनर है तो आत्मनिर्भर बनकर दिखाओ। निर्वहन कैसे होगा इस डर की वजह से तामसी मानसिकता सहते ज़िंदगी मत काटिए। दीये की उम्र लंबी करने के लिए दमन का तेल सिंचकर उसकी रोशनी कम मत कीजिए। हर महिला को आज़ाद ज़िंदगी जीने का पूरा अधिकार है। क्यूँ शादी को गुलामी की जंजीर समझकर ढ़ोते रहना है।
हर कुछ दिन बाद कहीं न कहीं महिलाओं के दमन के किस्से पढ़ने सुनने को मिलते है। कहीं मारपिट, कहीं बलात्कार, कहीं बच्चियों का शोषण तो कहीं बेटियों को जलाने की वारदातें। आख़िर कब ख़त्म होगी मर्दों के हाथों महिलाओं के शोषण की घटनाएँ। शायद कभी नहीं, क्यूँकि समाज को इस मुद्दे से कोई लेना-देना ही नहीं। हर घटना कुछ दिन कोहराम मचाकर शांत हो जाती है। अब महिलाओं को जागरूक होने की जरूरत है। सबसे पहले महिलाओं से निवेदन है एक दूसरे को समझो, बहूओं को बेटियों की तरह रखिए, सास शब्द की गरिमा बढ़ाईये। जब तक स्त्री ही स्त्री को समझने का प्रयास नहीं करेगी, मर्दों से अपेक्षा रखना फ़िज़ूल है। खुद को इतना तराशो, इतना काबिल बनाओ की मर्द नाम के हिटलर का मोहताज ही न होना पड़े। अपनी बेटियों के लिए एक ऐसी राह का निर्माण कीजिए की, उनके जीवन में दमन या प्रताड़ना शब्द का सामना करने की नौबत ही न आए।
अगर अब भी नहीं जगी महिलाएँ तो आने वाली कई सदियाँ ऐसे ही स्त्री विमर्श से साहित्य के पन्नें सजते रहेंगे।

About author

bhawna thaker

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु

Related Posts

हमास का इजरायल पर वार

October 9, 2023

हमास का इजरायल पर वार  भारत अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ़ तैयार कान खोलकर सुन लो आतंकवाद ! तुम्हारे खिलाफ़ भारत

जीएसटी काउंसिल की 52 वीं बैठक में महत्वपूर्ण बड़े फैसले

October 8, 2023

जीएसटी काउंसिल की 52 वीं बैठक में महत्वपूर्ण बड़े फैसले हुए जीएसटी काउंसिल की 52 वीं बैठक में मिलेट्स, वकीलों

पत्थर होती मानवीय संवेदना

October 6, 2023

पत्थर होती मानवीय संवेदना वह मानव जिसकी पहचान ही उसके मानवीय गुणों जैसे कि सहानुभूति, संवेदना, दुःख आदि होती है

साहित्य क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार 2023 विजेता साहित्यकार का नाम घोषित

October 6, 2023

साहित्य क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार 2023 विजेता साहित्यकार का नाम घोषित आओ साहित्य में ऐसी धार लगाऐं कि नोबेल पुरस्कार

जाति जनगणना की जरूरत का समय

October 5, 2023

जाति जनगणना की जरूरत का समय 21वीं सदी भारत के जाति प्रश्न को हल करने का सही समय है, अन्यथा

दुनिया का 68 अरब डालर का आर्ट बाजार

October 5, 2023

दुनिया का 68 अरब डालर का आर्ट बाजार सितंबर महीने में भारतीय कला जगत ने इतिहास रच दिया। अमृता शेरगिल

PreviousNext

Leave a Comment