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Dr_Madhvi_Borse, poem

हम फरिश्ते से हो जाएं!

हम फरिश्ते से हो जाएं! फरिश्तों की तलाश क्यों आसमान में,फरिश्ते तो है इसी जहान में,जो भी मानवता भलाई के …


हम फरिश्ते से हो जाएं!

फरिश्तों की तलाश क्यों आसमान में,
फरिश्ते तो है इसी जहान में,
जो भी मानवता भलाई के कार्य करें,
वह भी तो फरिश्तों सा ही महान है।

क्यों हम फरिश्तों को निकले ढूंढने,
क्यों ना हम खुद ही एक फरिश्ता बने,
नेकी, प्रेम और अच्छाई के साथ,
निकल जाए हम भी फरिश्ता बनने।

निगाहों में चमक फरिश्तों सी हो,
कर्मों में दमक फरिश्तों सी हो,
आसानी से नहीं मिलते हैं फरिश्ते,
स्वयं में बनने की ललक फरिश्ते सी हो।

सम्मान, समान और इमानदारी,
ज्ञानी, दयावान एवं जानकारी,
इन गुणों को हृदय से अपनाएं
करें आज से ही एक फरिश्ता बनने की तैयारी।।

About author
Dr madhvi borse
डॉ. माध्वी बोरसे।
(स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)

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