Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, poem

हदें

हदें शान हैं उसी में इंसान अपनी हद में रहेंजब छोड़ हद न समंदर न ही नदी बहेँइंसान ही हद …


हदें

शान हैं उसी में इंसान अपनी हद में रहें
जब छोड़ हद न समंदर न ही नदी बहेँ
इंसान ही हद न जाने वह हद से बढ़े
बेईमानी की कोई हद ना सदा ही बढे
जूठ के पैर कोई न फिर भी तीव्र चलें
रिश्ते सच्चे बनते जूठे फिर भी निभें
तिजारत भी है बेमानी धोखे से चलें
शिक्षा दीक्षा पढ़ाई सब में धोखा करें
बनावट भरी दुनियां, सब ही शक करें
लिखावट नकली खयालात भी नकली
खबरों की दुनियां भी तो नकली
नेता नकली बेईमान रियाया नकली
असल की खोज में मैं भी तो निकली
पाएं जो जन सत का पाठ वही असली

About author

Jayshree birimi
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद (गुजरात)

Related Posts

कवि का ह्रदय है – नंदिनी लहेजा

March 25, 2022

शीर्षक-कवि का ह्रदय है  कवि का ह्रदय है खजाना विचारों का , कविता हैं उसकी कुंजी।हँसाते, रुलाते,कभी दिल को छू

हमेशा के लिए कुछ भी नहीं-जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

हमेशा के लिए कुछ भी नहीं न यह जीत आखिरी हैऔर न यह हार आखिरी है,रोजाना का संघर्ष है जीवनचलेगा

पाखंड लगता है- जितेन्द्र ‘ कबीर ‘

March 25, 2022

पाखंड लगता है एक विजेता!अपने सारे संसाधनझोंक देता हैयुद्ध के मैदान मेंजीत के लिए,विजय उसका चरित्र हैलेकिनजब वो लगाता है

हालात बदलेंगे क्या?- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

हालात बदलेंगे क्या? आज जब नारे बुलंद होंगेदुनिया भर मेंमहिलाओं की सुरक्षा के,बहुत सारी महिलाएं संघर्ष कर रही होंगीहवस के

कोई रंग ऐसा बरस जाए- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

कोई रंग ऐसा बरस जाए इस बार होली में कोई रंग आसमां सेऐसा बरस जाए,कि बस इंसानियत के रंग में

इतिहास साहित्य में नजर आता हैै जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

इतिहास साहित्य में नजर आता है उन लोगों की बुद्धि को नमन!जो समझते हैंकि फिल्मकार इतिहास दिखाता हैजबकि ज्यादातर वोपैसा

Leave a Comment