Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh, Priyanka_saurabh

स्वास्थ्य सेवाओं को वंचित एवं गरीब तबके तक पहुँचाया जाये।

स्वास्थ्य सेवाओं को वंचित एवं गरीब तबके तक पहुँचाया जाये। सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों के साथ साथ हाशिए पर स्थित …


स्वास्थ्य सेवाओं को वंचित एवं गरीब तबके तक पहुँचाया जाये।

स्वास्थ्य सेवाओं को वंचित एवं गरीब तबके तक पहुँचाया जाये।

सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों के साथ साथ हाशिए पर स्थित लोगों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है| ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य तंत्र का अधिक से अधिक आधुनिकीकरण होना चाहिए। हालाँकि भारत ने स्वास्थ्य पर काफी तरक्की की है पर अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। निजी क्षेत्र आज लगभग 60% स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान करता है जो कई बार आम आदमी की पहुँच से बाहर होती है। हमें सार्वजनिक क्षेत्र को सुद्रढ़ करना होगा। निवेश बढाने के साथ-साथ हमें स्वास्थ्य सुविधाओं को गाँवों तक ले जाना होगा। नयी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वन के लिए हमें पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक कुशलता की आवश्यकता होगी।

-प्रियंका सौरभ

रोगी सुरक्षा की वैश्विक समझ को बढ़ाने, स्वास्थ्य देखभाल की सुरक्षा में सार्वजनिक जुड़ाव बढ़ाने और रोगी सुरक्षा बढ़ाने और रोगी के नुकसान को कम करने के लिए वैश्विक कार्यों को बढ़ावा देने के लिए 2019 में विश्व रोगी सुरक्षा दिवस की स्थापना की गई थी। हेल्थकेयर पिछले दो वर्षों में नवाचार और प्रौद्योगिकी पर अधिक केंद्रित हो गया है और 80% हेल्थकेयर सिस्टम आने वाले पांच वर्षों में डिजिटल हेल्थकेयर टूल्स में अपने निवेश को बढ़ाने का लक्ष्य बना रहे हैं। भारत में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के हेल्थकेयर उद्योग में अस्पताल, चिकित्सा उपकरण, नैदानिक परीक्षण, आउटसोर्सिंग, टेलीमेडिसिन, चिकित्सा पर्यटन, स्वास्थ्य बीमा और चिकित्सा उपकरण शामिल हैं। भारत की स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली को दो प्रमुख घटकों में वर्गीकृत किया गया है – सार्वजनिक और निजी।

किसी भी देश में वहां की जनता का स्वास्थ सरकार के एजेंडे में प्रमुख होता है खासतौर पर महिलाओं औऱ बच्चों का स्वास्थ्य। देश में स्वास्थ्य यूं तो राज्यों का विषय है लेकिन केंद्रीय सरकार ने इसे मिशन के तौर पर लिया है। देश में पोषण सप्ताह मनाया जाता है जिसका मकसद महिलाओं और बच्चों में पोषण का खास ख्याल रखते हुए। सरकार (सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली), प्रमुख शहरों में सीमित माध्यमिक और तृतीयक देखभाल संस्थानों को शामिल करती है और ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों (पीएचसी) के रूप में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करती है।

भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र के साथ कई चुनौतियाँ हैं? चिकित्सा पेशेवरों की कमी, गुणवत्ता आश्वासन की कमी, अपर्याप्त स्वास्थ्य खर्च, और सबसे महत्वपूर्ण, अपर्याप्त शोध निधि जैसी बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं तक अपर्याप्त पहुंच। प्रमुख चिंताओं में से एक प्रशासन का अपर्याप्त वित्तीय आवंटन है। स्वास्थ्य सेवा पर भारत का सार्वजनिक व्यय 2021-22 में सकल घरेलू उत्पाद का केवल 2.1% है जबकि जापान, कनाडा और फ्रांस अपने सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 10% सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा पर खर्च करते हैं। यहां तक कि बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की जीडीपी का 3% से अधिक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की ओर जाता है।

भारत में निवारक देखभाल का कम मूल्यांकन किया जाता है, इस तथ्य के बावजूद कि यह नाखुशी और वित्तीय नुकसान के मामले में रोगियों के लिए कई तरह की कठिनाइयों को कम करने में काफी फायदेमंद साबित हुआ है। भारत में, अनुसंधान एवं विकास और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के नेतृत्व वाली नई परियोजनाओं पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है। प्रभावी और कुशल स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में नीति निर्धारण निस्संदेह महत्वपूर्ण है। भारत में, मुद्दा मांग के बजाय आपूर्ति का है, और नीति निर्धारण मदद कर सकता है।

भारत में, डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों की कमी है। एक मंत्री द्वारा संसद में प्रस्तुत किए गए एक अध्ययन के अनुसार, भारत में 600,000 डॉक्टरों की कमी है। डॉक्टर अत्यधिक परिस्थितियों में काम करते हैं, जिसमें भीड़भाड़ वाले बाहरी रोगी विभाग, अपर्याप्त स्टाफ, दवाएं और बुनियादी ढाँचे शामिल हैं। भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र की क्षमता क्या है? भारत का प्रतिस्पर्धात्मक लाभ अच्छी तरह से प्रशिक्षित चिकित्सा पेशेवरों के अपने बड़े पूल में निहित है। भारत एशिया और पश्चिमी देशों में अपने साथियों की तुलना में लागत प्रतिस्पर्धी भी है। भारत में सर्जरी की लागत अमेरिका या पश्चिमी यूरोप की तुलना में लगभग दसवां हिस्सा है।

भारत में इस क्षेत्र में वृद्धि के लिए सभी आवश्यक तत्व हैं, जिसमें एक बड़ी आबादी, एक मजबूत फार्मा और चिकित्सा आपूर्ति श्रृंखला, 750 मिलियन से अधिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ता, वीसी (वेंचर कैपिटल फंड) तक आसान पहुंच के साथ विश्व स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप पूल शामिल हो। वैश्विक स्वास्थ्य समस्याओं को हल करने की तलाश में वित्त पोषण और नवीन तकनीकी उद्यमी की जरुरत है। उत्पाद विकास और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए भारत में चिकित्सा उपकरणों के तेजी से नैदानिक परीक्षण के लिए क्लस्टर चाहिए। यह क्षेत्र जीवन प्रत्याशा, बीमारी के बोझ में बदलाव, वरीयताओं में बदलाव, बढ़ते मध्यम वर्ग, स्वास्थ्य बीमा में वृद्धि, चिकित्सा सहायता, बुनियादी ढांचे के विकास और नीति समर्थन और प्रोत्साहन से प्रेरित होगा।

सार्वजनिक अस्पतालों के बुनियादी ढांचे में सुधार की तत्काल आवश्यकता है, जो भारत की बड़ी आबादी के परिणामस्वरूप अधिक बोझ हैं। सरकार को निजी अस्पतालों को प्रोत्साहित करना चाहिए क्योंकि वे महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। क्योंकि कठिनाइयाँ गंभीर हैं और केवल सरकार द्वारा ही इसका समाधान नहीं किया जा सकता है, निजी क्षेत्र को भी इसमें शामिल होना चाहिए। क्षेत्र की क्षमताओं और दक्षता में सुधार के लिए, अधिक चिकित्सा कर्मियों को शामिल किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य प्रणाली में बिंदुओं को जोड़ने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाना चाहिए।

अस्पतालों और क्लीनिकों में मेडिकल गैजेट्स, मोबाइल हेल्थ ऐप, वियरेबल्स और सेंसर तकनीक के कुछ उदाहरण हैं जिन्हें इस क्षेत्र में शामिल किया जाना चाहिए। यह तो सर्वविदित है कि स्वास्थ्य ही धन है इसलिए इस क्षेत्र में सुधारों की हमेशा से जरूरत भी रही है। हाल ही में वर्तमान सरकार के द्वारा इस दिशा में किये गए प्रयास निश्चित ही सराहनीय है लेकिन अभी राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार दोनों को मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं को वंचित एवं गरीब तबके तक पहुंचाने की कोशिश करनी चाहिए।

स्वास्थ्य क्षेत्र हमारे देश में व्यापक चुनौतियों से भरा हुआ है। जनसंख्या का अत्यधिक दबाव, स्वास्थ्य क्षेत्र में संसाधनों का अभाव जैसे डॉक्टर, विशेषज्ञ, स्किल्ड पेरा मेडिकल स्टाफ, अत्याधुनिक तकनीक एवं सुविधा कि कमी है। इन चुनौतियों से निपटने हेतु एक व्यापक और विस्तृत सरकारी तंत्र एवं अस्पतालों का ढाचा है। आवश्यकता है कि चल रहे कार्यों एवं योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर तरीके से हो। इस दिशा में सरकार की आयुष्मान भारत योजना, राष्ट्रीय पोषण मिसन, एनआरएचएम, आईसीडीएस, आशा कार्यकर्ता निश्चित ही सकारात्मक परिणाम लायेगे। सरकार की नीतियां जितनी सराहनीय है उसका क्रियान्वयन उतना ही चुनौतीपूर्ण है|

सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों के साथ साथ हाशिए पर स्थित लोगों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है| ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य तंत्र का अधिक से अधिक आधुनिकीकरण होना चाहिए। हालाँकि भारत ने स्वास्थय पर काफी तरक्की की है पर अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। निजी क्षेत्र आज लगभग 60% स्वास्थय सुविधाएँ प्रदान करता है जो कई बार आम आदमी की पहुँच से बाहर होती है। हमें सार्वजनिक क्षेत्र को सुद्रढ़ करना होगा। निवेश बढाने के साथ साथ हमें स्वस्थ्य सुविधाओं को गाँवों तक ले जाना होगा। नयी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वन के लिए हमें पारदर्शिता,जवाबदेही और प्रशासनिक कुशलता की आवश्यकता होगी।

About author 

प्रियंका सौरभ 

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,

कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार

facebook – https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/

twitter- https://twitter.com/pari_saurabh


Related Posts

maa ko chhod dhaye kyo lekh by jayshree birmi

September 13, 2021

 मां को छोड़ धाय क्यों? मातृ भाषा में व्यक्ति अभिव्यक्ति खुल के कर सकता हैं।जिस भाषा सुन बोलना सीखा वही

Hindi maathe ki bindi lekh by Satya Prakash

September 13, 2021

हिंदी माथे की बिंदी कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, साक्षर से लेकर निरीक्षर तक भारत का प्रत्येक व्यक्ति हिंदी को

Jeevan aur samay chalte rahenge aalekh by Sudhir Srivastava

September 12, 2021

 आलेख        जीवन और समय चलते रहेंगें              कहते हैं समय और जीवन

Badalta parivesh, paryavaran aur uska mahatav

September 9, 2021

बदलता परिवेश पर्यावरण एवं उसका महत्व हमारा परिवेश बढ़ती जनसंख्या और हो रहे विकास के कारण हमारे आसपास के परिवेश

Jungle, vastavikta he jiski khoobsurati hai

September 9, 2021

 Jungle, vastavikta he jiski khoobsurati hai जंगल स्वतंत्रता का एक अद्वितीय उदाहरण है, जहां कोई नियम नहीं , जिसकी पहली

covid 19 ek vaishvik mahamaari

September 9, 2021

 Covid 19 एक वैश्विक महामारी  आज हम एक ऐसी वैश्विक आपदा की बात कर रहे है जिसने पूरे विश्व में

Leave a Comment