Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

स्वाभिमान!

स्वाभिमान! सम्मान मांगो ना, कमाओ,पैसे मांगो ना, कमाओ,और कमाना कैसे हैं, इस गौरवशाली जीवन में,सीखो और सिखाओ! खुद के हक …


स्वाभिमान!

स्वाभिमान! स्वाभिमान!
सम्मान मांगो ना, कमाओ,
पैसे मांगो ना, कमाओ,
और कमाना कैसे हैं,
इस गौरवशाली जीवन में,
सीखो और सिखाओ!

खुद के हक का खाओ,
हाथ ना फैलाओ,
अपने स्वाभिमान को बचाओ,
ऊपर वाले पर भरोसा रखकर,
स्वयं के आत्मसम्मान को जगाओ!

अपनी भी कदर करो,
दूसरों पर ना निर्भर हो,
लाचारी जीवन में आने ना पाए,
यह खुशहाल और आजाद जीवन,
खुद्दारी के साथ बिताएं!

स्वयं के निर्णय पर करो यकीन,
अपनी जिंदगी के फैसले लो प्रतिदिन,
निर्णय बदल देता है जिंदगी का अंदाज,
यह दूसरों की नहीं तेरी जिंदगी है,
तुझ में भी है, ताक़त-ए-परवाज़!!

डॉ. माध्वी बोरसे!
(स्वरचित व मौलिक रचना)

राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

bihadon ki bandook by priya gaud

June 27, 2021

 “बीहड़ों की बंदूक” बीहड़ों में जब उठती हैं बंदूकें दागी जाती हैं गोलियां उन बंदूकों की चिंगारी के बल पर

Rajdaar dariya by priya gaud

June 27, 2021

 राज़दार दरिया दरिया  सबकी मुलाकातों की गवाह रहती है कुछ पूरी तो कुछ अधूरी किस्सों की राजदार रहती है आँखे

sawam ki rachyita by priya gaud

June 27, 2021

 “स्वयं की रचयिता” तुम्हारी घुटती हुई आत्मा का शोर कही कैद न हो जाये उलाहनों के शोर में इसलिए चीखों

kavita Prithvi by priya gaud

June 27, 2021

 “पृथ्वी “ पृथ्वी के उदर पर जो पड़ी हैं दरारें ये प्रमाण है कि वो जन्म चुकी है शिशु इतंजार

kavitaon ke aor by priya gaud

June 27, 2021

 “कविताओं के ओर” खोजें नही जाते कविताओं और कहानियों के ओर ये पड़ी रहती है मन के उस मोड़ पर 

Kabir par kavita by cp gautam

June 27, 2021

कबीरदास पर कविता  होश जब से सम्भाला , सम्भलते गयेआग की दरिया से निकलते गयेफेंकने वाले ने फेंक दिया किचड़

Leave a Comment