Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, lekh

सौम्य नज़रों से देखो

 “सौम्य नज़रों से देखो” “कैसे कोई वासना भरी नज़रों से कलंकित कर सकता है उमा, लक्ष्मी और दुर्गा के स्वरुप …


 “सौम्य नज़रों से देखो”

सौम्य नज़रों से देखो
“कैसे कोई वासना भरी नज़रों से कलंकित कर सकता है उमा, लक्ष्मी और दुर्गा के स्वरुप को, जिसकी कोख से जन्म लेते हो उसी को तार-तार करते हो”

सांसारिक रथ का एक अहम पहिया, दुन्यवी रंग मंच का बेहद जरूरी किरदार और अपने आप में गरिमा शब्द को परिभाषित करती शख़्सियत है स्त्री। कोई मांस का टुकड़ा नहीं जिसे नोंचने की फ़ितरत रखते हो। या स्त्री कोई लालायित करते शब्द नहीं, अंतर्ध्यान करने वाला मौन है। पढ़ो नहीं महसूस करो, स्त्री किताब नहीं जो एक दिन रद्दी बन जाएगी, प्रशस्ति सी सन्मानित करो शिवा के तन का टुकड़ा है। 

स्त्री के शारीरिक या मानसिक दायरे में उसकी इजाज़त के बगैर कदम रखने की कोशिश आपकी हल्की सोच का आईना होगा। एक नज़र देखते रहे तो रात भर सो ना सके एसा दर्द-ए-दिल मत बनाओ,

स्त्री धूप सी पाक है दूर से उसकी महक को पहचानो मंदिर में देवी सी जानों, 

तन को पाने की लालसा काम जगाती है,

मन का संभोग प्रेम है, और रूह से रूह का संभोग ध्यान। स्त्री की रूह को छूओ नज़रों से नहीं, ऊँगलियों से नहीं, मन की आँखों से वासना की परत हटाकर अपने साफ़ पाक इरादों से ध्यानाकर्षण की दहलीज़ पर खड़े रहकर बस साँसों में भरो। पराग सी छुईमुई झीनी तितली के पंखों सी नाजुक स्त्री आपकी स्नेहिल शर्तों पर संपूर्ण समर्पित सी आपकी अपनी महसूस करोगे।

आँखों से बलात्कार की भाषा बखूबी जानती है स्त्री। हवस भरी नज़रें और निर्मल निश्चल भावों के बीच का फ़र्क समझती है। स्त्री के प्रति मोह स्वाभाविक है पर, नज़रों में दिये सी पवित्र लौ जलाओ, शब्दों में अगरबत्ती का अलख, और छुअन में इबादत सी असर रखो आपको आपकी छवि ही मंदिर में मूरत सी महसूस होगी।

स्त्री का एक ही लुभावने वाला रुप नहीं, 

स्त्री माँ है, बहन है, बेटी है, बहु है, भाभी है, देवी है आपके अपने घर की इज्जत सी मानों। जगत जननी, जगदाधार है स्त्री, कोई मांस का टुकड़ा नहीं मत नोच कर खाओ कभी नज़रों से, कभी हाथों से, कभी जुबाँ से, गालियों की बौछारों में मत उलझाओ। 

स्त्री सन्मान की, प्रशस्ति की, प्रेम की हकदार है गुल से खेलना बंद करो सहज कर रखो सीप में मोती सी, अपने मजबूत बाजूओं से पनाह में लेकर सुरक्षित सी महसूस करवाओ, निर्भय सी ज़िंदगी दो 

स्त्री को उसका हक दो, सन्मान दो और उसका उचित स्थान दो। जब तक मौन है नारी मौन ही रहने दो, मुखर हुई जिस दिन ज़लज़लों का सैलाब उठेगा जो पूरे कायनात को बहा ले जाएगा। स्त्रियों के दुर्गा से सौम्य रुप को निर्मल नज़रों से देखो, चंडी काली बनने पर मजबूर करना रहने दो।

भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर


Related Posts

2024 चुनावी रण के लिए अमेरिका मिस्त्र स्टेट विजिट गेम चेंजर साबित होगी

June 29, 2023

2024 चुनावी रण के लिए अमेरिका मिस्त्र स्टेट विजिट गेम चेंजर साबित होगी 2024 रण की दौड़ – विपक्षी महा

योग @ एक विश्व एक परिवार – अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 june yoga day

June 20, 2023

योग @ एक विश्व एक परिवार – अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2023 पर विशेष आओ योग को अपनी दिनचर्या

गुलजार की ‘किताब’ में पैरेंटिंग का पाठ| Parenting lesson in Gulzar’s ‘kitaab’

June 17, 2023

सुपरहिट:गुलजार की ‘किताब’ में पैरेंटिंग का पाठ 1977 में आई ‘किताब’ फिल्म में एक दृश्य है। फिल्म का ‘हीरो’ बाबला

नई पीढ़ी के लिए विवाह में फ्लेक्सिबल बनना जरूरी है |

June 17, 2023

नई पीढ़ी के लिए विवाह में फ्लेक्सिबल बनना जरूरी है ‘विवाह‘ यह हमेशा से चुनौतीपूर्ण संबंध रहा है। दो परिचित

पितृ देवो भव: पिताजी दिवस 18 जून 2023 पर विशेष

June 17, 2023

पितृ देवो भव: पिताजी दिवस 18 जून 2023 पर विशेष पितृ देवो भव: पिताजी दिवस 18 जून 2023 पर विशेष

उतावला पन नही- सतर्कता बहुत जरूरी- ऐसे पहचाने

June 17, 2023

उतावला पन नही- सतर्कता बहुत जरूरी- ऐसे पहचाने हां जी हां, सही कह रही हूं। बहुत ही सरल तरीका पहचानने

PreviousNext

Leave a Comment