Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

सोच को संकुचित होने से बचाएं।

सोच को संकुचित होने से बचाएं। अपनी सोच को संकुचित ना होने दें,इस अपार समझ को कभी ना खोने दें,असीम …


सोच को संकुचित होने से बचाएं।

सोच को संकुचित होने से बचाएं।

अपनी सोच को संकुचित ना होने दें,
इस अपार समझ को कभी ना खोने दें,
असीम है सब कुछ इस ब्रह्मांड में,
हर स्वप्न को स्वयं के नेत्रों में संजोने दे।

अनगिनत ज्ञान को ग्रहण करते चले जाएं,
नेक कर्मों पर विराम चिह्न ना लगाएं,
जीवन का संपूर्ण आनंद ले,
हर लक्ष्य को दृढ़ता से पार कर जाए।

हमारी अंतरात्मा क्या कहती है,
आभास करें हम में कितनी शक्ति है,
स्वयं की अलौकिक सामर्थ्य को पहचाने,
हम नहीं साधारण व्यक्ति है।

बौद्धपूर्वक जीवन है अनिवार्य,
प्रभावशाली हो हमारे सर्व कार्य,
प्रसन्नता हमारे मुख मंडल पर रहे,
बने इस भव्य जीवन के आचार्य।

अपनी सोच को संकुचित ना होने दें,
इस अपार समझ को कभी ना खोने दें,
असीम है सब कुछ इस ब्रह्मांड में,
हर स्वप्न को स्वयं के नेत्रों में संजोने दे।

About author 

Dr. Madhvi borse
डॉ. माध्वी बोरसे।
(स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)

Related Posts

तुम्हारा प्रेम मेरी दुनिया है- जितेन्द्र ‘ कबीर ‘

February 24, 2022

तुम्हारा प्रेम मेरी दुनिया है तुम्हारा प्रेम…मेरे लिए पुल सरीखा है,जिस पर चलकरनिकल जाता हूं मैं अक्सरखोजने प्रेम के गहनतम

करे कोई और भरे को- जितेन्द्र ‘कबीर’

February 24, 2022

करे कोई और भरे को खूब मुनाफा कमायाजिन लोगों नेअंधाधुंध खनन करकेनदियों और पहाड़ों में,इसके कारण हुएप्रकृति के कोप से

अपनी व्यथा किसे सुनाएं

February 24, 2022

अपनी व्यथा किसे सुनाएं अपनी व्यथा किसे सुनाऊं बात समझ ना आई दुखों का पहाड़ टूटा घर में वीरानी छाई

कविता मैं बहुत खुश था

February 24, 2022

कवितामैं बहुत खुश था मैं बहुत ख़ुश था जब मेरे माता-पिता बहन हयात थे मुझे कोई फ़िक्र जिम्मेदारी चिंता नहीं

Sundar bachpan Raunak Agrawal

February 17, 2022

सुंदर बचपन !! सोनी सी मुस्कान है वो, हर माँ की जान है वो !!ये बच्चे मन के सच्चे,थोड़े कच्चे

Maa- Archana chauhan

February 16, 2022

माँ इंसान नहीं अब सामानों की ,फिक्र बस रह गई तू ही बता ए जिंदगी , तू इतनी सस्ती कैसे

Leave a Comment