Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Praveen pathik

“सोचता हूॅं”/sochta hun

“सोचता हूॅं” सोचता हूॅं, कुछ लिख लूॅं।लिखना,दर्द को कुरेदता है; याहृदय को झकझोरता है।दोनो स्तिथियों में,आहत होता हृदय ही।जिसने प्रश्रय …


“सोचता हूॅं”

सोचता हूॅं,
कुछ लिख लूॅं।
लिखना,
दर्द को कुरेदता है; या
हृदय को झकझोरता है।
दोनो स्तिथियों में,
आहत होता हृदय ही।
जिसने प्रश्रय दिया था इन्हें।
सोचता हूॅं,
सोचना छोड़ दूॅं।
भूत का भविष्य
इन बोझों को लाद दूॅं;
प्रारब्ध के कंधों पर।
और मूक देखता रहूॅं,
काल के चक्र को।
सोचता हूॅं,
उस दिवास्वप्न को भूल जाऊॅं।
जिसे जाड़ों की रातों में
ओढ़ के सोता था
या गर्मी के चाॅंदनी रातों में,
बिछा देता था।
सोचता हूॅंं,
उस आशा को छोड़ दूॅं।
जो मानस में,
पानी के बुलबुले-सा बनते बिगड़ते हैं।
जिसे पाने की लालसा,
मेरा चैन छीन लेती;
और धकेल देती,
अंधेरे अतीत के गर्त में,
कई शताब्दियों तक ।

About author 

प्रवीन “पथिक “
बलिया (उत्तरप्रदेश)


Related Posts

अधूरे ख़्वाब-नंदिनी लहेजा

February 7, 2022

अधूरे ख़्वाब मन की अनेकों हसरतों को, इक सांचे में जो ढाले।नयनों में समाते है वो,बन ख़्वाब बड़े ही प्यारे।लक्ष

कृत्रिम बुद्धिमता-एडवोकेट किशन सनमुखदास

February 7, 2022

कविताकृत्रिम बुद्धिमता आजकल कृत्रिम बुद्धिमता की लहर छाई है हर काम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भावना समाई है मानवीय दिनचर्या

गणतंत्र दिवस-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 7, 2022

गणतंत्र दिवस! 26 जनवरी 1950 में भारतीय संविधान लागू किया,भारत को पूर्ण रूप से गणतंत्र घोषित कर दिया! परेड, भाषण,

हम अत्यंत सौभाग्यशाली हैं

February 7, 2022

कविता हम अत्यंत सौभाग्यशाली हैं हम अत्यंत सौभाग्यशाली हैं हमारी किस्मत खुली भारतीय सभ्यता संस्कृति हमें मिली हमारी पीढ़ियों की

ई-कचरा

February 7, 2022

ई-कचरा! कंप्यूटर और उससे संबंधित अन्य उपकरण,टीवी, वाशिंग मशीन, मोबाइल फोन से जुड़े उत्पादन,उपयोग से बाहर होने पर कहते हैं

हां ये तपिश हैं

February 7, 2022

हां ये तपिश हैं ठंडे न होंगे ये सिने जिसमे हैं दहकलाखों में न सही हजारों में हीललकार हैं प्रतिकार

Leave a Comment