Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr-indu-kumari, poem

सुहानी शाम- डॉ इंदु कुमारी

सुहानी शाम जिंदगी में सुरमईशाम आ जाएउदासी की समंदर मेंएक उफान आ जाएदुख भरी दिनों में भीसुर्ख होठों परमुस्कान आ …


सुहानी शाम

सुहानी शाम- डॉ इंदु कुमारी

जिंदगी में सुरमई
शाम आ जाए
उदासी की समंदर में
एक उफान आ जाए
दुख भरी दिनों में भी
सुर्ख होठों पर
मुस्कान आ जाए
जिंदगी एक जंग है
आहुति वक्त की देते
खींचा तानी सफर है
उस पल में भी हमें एक
हंसी शाम आ जाए
निराशा और हताशा से
धैर्य खोने लगे हम
उस घड़ी उस पल में
खुशियां हमारी
दरमियां आ जाए
सोच के महल बनाने में
पैसो के पीछे भागते रहे
हम रिश्तो की किस्तों में
असली थकान मिटाएं
चलो सुरमई शाम में
तन मन को नहाएँ
जिंदगी में सुरमई
शाम आ जाए
सबकी खुशियों के लिए
वक्त निकालते रहे आज तक
चले आज लरजते शाम को
अपने नाम कर जाए
सुहानी शाम की सफर
यादगार बनाएं
जिंदगी में सुरमई
जब शाम आ जाए।

डॉ इंदु कुमारी
मधेपुरा बिहार


Related Posts

बंद कमरों की घुटन-सुधीर श्रीवास्तव

May 9, 2022

 बंद कमरों की घुटन आधुनिकता की अंधी दौड़ में हमने खुद ही खुद को कैद कर लिया है कंक्रीट के

कविता डिजिटल भारत मेक इन इंडिया

May 9, 2022

कविता डिजिटल भारत मेक इन इंडिया रचनात्मक नवाचार से जुड़ा विज्ञान आम आदमी के लिए जीवन में सहजता लाता है

शोहरतों का परचम- सुधीर श्रीवास्तव

May 9, 2022

 शोहरतों का परचम शोहरतों के परचम  लहराने का गर इरादा है तो कुछ ऐसा कीजिए जो अलग हो औरों से

ज़िंदगी- सुधीर श्रीवास्तव

May 9, 2022

 ज़िंदगी वाह री जिंदगी तू भी कितनी अजीब जाने क्या क्या गुल खिलाती है कभी हंसाती, कभी रुलाती है और

कविता – ख्वाब – सिद्धार्थ गोरखपुरी

May 9, 2022

 कविता – ख्वाब  ये ख्वाब न होते तो क्या होता? झोपड़ी में रहने वाले लोग जब थोड़े व्यथित हो जाते

जलियांवाला बाग-

May 9, 2022

 जलियांवाला बाग बैशाखी का पावन दिन तारीख तेरह अप्रैल उन्नीस सौ उन्नीस एक सभा हो रही थी रौलेट एक्ट का

PreviousNext

Leave a Comment