सुनो दिकु…..
तुम हो तो जीवन की खूबसूरती है
तुम हो तो सांसो में ताजगी है
तुम्हारे बिना हर महफ़िल अधूरी
तुम हो तो अंधेरों में भी रोशनी है
ना कोई तत्व मिटा सका तुम्हारी यादों को
ना कोई समां भुला सका तुम्हारी बातों को
प्रेम का इंतज़ार अपनी दिकु के लिये
सुनो दिकु….. तुम हो तो जीवन की खूबसूरती हैतुम हो तो सांसो में ताजगी है तुम्हारे बिना हर महफ़िल अधूरीतुम …
तुम हो तो जीवन की खूबसूरती है
तुम हो तो सांसो में ताजगी है
तुम्हारे बिना हर महफ़िल अधूरी
तुम हो तो अंधेरों में भी रोशनी है
ना कोई तत्व मिटा सका तुम्हारी यादों को
ना कोई समां भुला सका तुम्हारी बातों को
प्रेम का इंतज़ार अपनी दिकु के लिये
June 24, 2022
माँ अनिता शर्मा एक शब्द में संसार समाहित, जग जननी है माँ। कितनी भोली, कितनी प्यारी, मुझे प्यारी है माँ
June 24, 2022
तन्हा सी!!!! अनिता शर्मा भीड़ में तन्हा-तन्हा सी, कुछ सकुचाई कुछ शरमाई। कह न सकी दिल की बातें, मन ही
June 24, 2022
वर्षा ऋतु ! डॉ. माध्वी बोरसे! ढेर सारी खुशियों की बौछार,सभी करते हैं इस ऋतु का इंतजार ,पशु पक्षियों और
June 24, 2022
खुशनुमा वातावरण बनाएं! डॉ. माध्वी बोरसे! लाए खुशियों की बहार, चाहे परेशानियां हो हजार, जिंदगी तो है कुछ पलों की,
June 24, 2022
जरूर लड़े! डॉ. माध्वी बोरसे! लड़ना है तो अपने क्रोध से लड़े,अपने अंदर के अहंकार से लड़े,स्वयं को मजबूत और
June 24, 2022
पारदर्शी जीवन! डॉ. माध्वी बोरसे! चलो सोचे और बोले एक समान, जिंदगी को बना ले, थोड़ा और आसान,दिल से और