Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Narayan-Lal, poem

सुंदरता-कविता। Sundarta par kavita

सुंदरता सुंदरता की रूप है नारी.इसीलिए तो सबकी प्यारी.बोली इनकी मीठी न्यारी.पर जाती है सब पर भारी.कठिनाईयों से कभी न …


सुंदरता

सुंदरता-कविता। Sundarta par kavita

सुंदरता की रूप है नारी.
इसीलिए तो सबकी प्यारी.
बोली इनकी मीठी न्यारी.
पर जाती है सब पर भारी.
कठिनाईयों से कभी न हारी.
मन में है संकल्प जो भारी.
गुण की खान सहेजे सारी.
पर खुशियों पर हो जो वारी.
नहीं दिखाए अपनी लाचारी.
रिश्तों की भी समझ है भारी.
जिसे निभाती बारी बारी.
चाहे बनना पडे़ बेचारी.
सबकी करती है तैयारी.
नारी की परिधान है साड़ी.
दिखती इसमें बेहद प्यारी.
कर्तव्यों से बंधी है नारी.
संस्कारों से युक्त है नारी.
इसीलिए वो सबको प्यारी.
रस और गंध की खान है नारी.
इसीलिए पुरूषों पर भारी.

About author 

नारायण लाल
स्वरचित@ सर्वाधिकार सुरक्षित


Related Posts

नेताजी – डॉ. इन्दु कुमारी

January 25, 2022

नेताजी सुभाष चंद्र बोस तू ,गये तो गएभारत माँ के भाल, सजा के गएस्वर्णाक्षरों में नाम, लिखा के गएलाल थे

सबसे ख़तरनाक जहर- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

सबसे ख़तरनाक जहर वो बहुत अच्छे से जानते हैंकि जहर की कितनी मात्रा रोज देने सेमर जाती हैं एक इंसान

ऐ चाँद- डॉ. इन्दु कुमारी

January 25, 2022

ऐ चाँद लिख रही तेरी दास्तानशीतलता करते प्रदानदागदार वह कहलाते हैंजीवों के हित आते हैंचाँदनी फिर छिटकाते हैंनिशब्द भरी रातों

भारत माता – डॉ. इन्दु कुमारी

January 25, 2022

भारत माता भारत जननी तू हो महानतूने जने हो वीर संतानसिर हिमालय की पायीचरणों को धोता सागर हैशेरों की है

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 25, 2022

कविता -मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम चतुर्भुज रूप में जन्म लियाअयोध्या को अनुराग दियामाँ कौशल्या के कहने परमूल रूप को त्याग दियाबाल्यकाल

जरा सोचो इंसान – मईनुदीन कोहरी”नाचीज बीकानेरी”

January 25, 2022

जरा सोचो इंसान अपनी जुबां से किसी को कभी ना सताना।मौत भी आकर कहे तो बहाना ये बनाना।।सम्भल कर कदम

Leave a Comment