Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

साहिल- डॉ.इन्दु कुमारी

 साहिल ओ मेरे मन के मीत दिल लिया क्यों जीत निश्छल है मेरी प्रीत रेजीवन की है ये रीत सदा …


 साहिल

साहिल-   डॉ.इन्दु कुमारी
ओ मेरे मन के मीत

दिल लिया क्यों जीत

निश्छल है मेरी प्रीत रे
जीवन की है ये रीत

सदा से चली आई रे
तू कैसा है नाविक

जीवन है मझधार रे
बस एक ही पतवार

बन कर तू साहिल
क्या समझा न काबिल

मेरी जीवन की नैया को
गैरों के हाथों ही थमा दी

मायावी जिन्दगी तूने दी
मेरी आरजू हो प्रिय तुम

मेरी आबरू तुझसे ही है
बेदर्द सनम तूने -तूने रे

कठपूतली बना-2 डाला
मायावी संसार में ढकेला

हाले दिल सुनाऊं कैसे रे
तू किनारे -किनारे कर बैठे

मैं किरण बन-बनकर ढूँढू
तू बादल बन-बनकर छुपते

सूरत के झरोखे में दिलवर
दिदार मन मंदिर में करती रे

ह्रदय के आंगन में बसेरा है
मिलन की सुबह तो आएगी
साईं तू है बस साहिल मेरा रे।

डॉ.इन्दु कुमारी
मधेपुरा बिहार


Related Posts

Rakshabandhan by Anita Sharma

August 25, 2021

 रक्षाबंधन सालभर के इन्तजार के बाद  आता राखी का त्यौहार है। रेशम के धागों में सजता  भाई-बहिन का प्यार है।

Bhookh by Anita Sharma

August 25, 2021

 भूख भूख की आग से तड़पता है कि भिखारी हाथ फैलाए भीख मांगता। कहीं कचड़े में कोई जीर्ण शीर्ण सा

Samaj ki tasveer by Sudhir Srivastava

August 25, 2021

 समाज की तस्वीर समाज की तस्वीर का बखान क्या करें साहब ? समाज कोई वस्तु तो है नहीं जो किसी

Rakhi ka tyohar by indu kumari

August 25, 2021

 राखी का त्योहार राखी का त्योहार हम मनाएं रे उमंग भरी है मन में मिलकर गाएं रे बचपन की तकरार

Sabaka apna mahatva hai by Jitendra Kabeer

August 22, 2021

 सबका अपना महत्व है किसी क्षेत्र में कामयाब होने के लिए इंसान को जितनी बड़ी भूमिका किसी का प्रोत्साहन निभाता

Sangharsh akela hota hai by Jitendra Kabeer

August 22, 2021

 संघर्ष अकेला होता है उस वक्त साथ नहीं थे बहुत से लोग शायद जानते भी न हों उनका नाम, खेलों

Leave a Comment