Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Veena_advani

साहित्यकार महान

 साहित्यकार महान शब्दों के महाजाल का चक्रव्यूह बड़ा जंजाल इसमें उलझ सुलझ बने तीखे शब्द विकार लेखक है रोक ना …


 साहित्यकार महान

जो जैसा करेगा , वैसा भरेगा

शब्दों के महाजाल का चक्रव्यूह बड़ा जंजाल

इसमें उलझ सुलझ बने तीखे शब्द विकार

लेखक है रोक ना पाए गहन जज़्बात कलाम

लिख देता दिल में होता जो यही गहन विज्ञान

कहां सोचता फल कि इच्छा यही उसका ज्ञान

हर मुद्दे पर कलम चला खींचे सबका ध्यान

जिसका ध्यान न हो उसे भी दिलाए ये संज्ञान 

निकाले शब्द एसे-एसे चुभे जैसे तीर कमान।।

शब्द संजो कर प्रेम से करे श्रृंगार रसपान

शब्द संजोए द्वेष से जबब रौद्र रुप करे ना विश्राम

हर रुप , रस , रंग को संजोता साहित्यकार महान।।

वीना आडवाणी तन्वी

नागपुर, महाराष्ट्र


Related Posts

Pran priye kavya by salil saroj

September 22, 2021

 प्राण-प्रिय अधरों पर कुसुमित प्रीत- परिणय केशों में आलोकित सांध्य मधुमय चिर- प्रफुल्लित  कोमल किसलय दिव्य-ज्योति जैसी मेरी प्राण-प्रिय  1

Madhur sangeet bina ka by Dr. H.K. Mishra

September 22, 2021

 मधुर संगीत वीणा का तेरी वीणा की मधुर ध्वनि, मां सदा भाव भर देती है, अंधकार भरे अंतर उर में,

Aabhasi bediyaan by Jitendra Kabir

September 22, 2021

 आभासी बेड़ियां पिंजरे का पंछी उससे बाहर निकलकर भी उड़ान भरने में हिचकिचाता है बहुत बार, वो दर-असल कैद है

Harj kya hai by Jitendra Kabir

September 22, 2021

 हर्ज क्या है? भाषण से पेट भरने की कला सीख ली है हमनें, रोटी को गाली देनें की  हिमाकत करने

Bura man kar mat baitho by Jitendra Kabir

September 22, 2021

 बुरा मनाकर मत बैठो उस समय भले ही बुरा लगे जब हमारे बुजुर्ग  डांट देते हैं हमें गुस्से में आकर,

Prem pathik by Jitendra Kabir

September 22, 2021

 प्रेम पथिक एक प्रेम बचपन में हुआ था पुस्तकों से, जब भी खोला उन्हें पहुंच गया रहस्य,रोमांच, अहसास और कल्पना

Leave a Comment