Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

सवाल और जवाब

 सवाल और जवाब जितेन्द्र ‘कबीर’ सवाल! बिगड़ती कानून व्यवस्था का हो या फिर उन्मादी भीड़ हिंसा का, विवादास्पद कानूनों का …


 सवाल और जवाब

जितेन्द्र 'कबीर'
जितेन्द्र ‘कबीर’

सवाल!

बिगड़ती कानून व्यवस्था का हो

या फिर उन्मादी भीड़ हिंसा का,

विवादास्पद कानूनों का हो

या फिर विरोध प्रदर्शनों का,

चरमराती अर्थव्यवस्था का हो

या फिर बढ़ती बेरोजगारी का,

जवाब!

हमेशा एक ही होता है..

“अगर हम गलत होते तो जनता हमें

चुनाव जिताकर संसद न भेजती।”

वाह! क्या जवाब है।

बिल्कुल ऐसी ही दलील मछुआरा भी

अपने जाल में फंसी मछलियों

को दे सकता है।

सवाल!

दूसरे दलों के नेता तोड़ने का हो

या फिर सत्ता के लिए रिश्ते जोड़ने का,

महंगाई का उत्तरोत्तर बढ़ते जाने का हो

या फिर उसको ही देशहित में बताने का,

अपनी हठधर्मिता को सही बताने का हो

या फिर दूसरों की हर बात ग़लत ठहराने का,

जवाब!

हमेशा एक ही होता है…

“मैंने अपने लिए आज तक 

कुछ नहीं किया, जो किया देश के लिए किया”

वाह! क्या जवाब है।

बिल्कुल ऐसी ही दलील एक तानाशाह

जनता के खून की आखिरी बूंद अपने हक में

इस्तेमाल किए जाने को दे सकता है।

                                           जितेन्द्र ‘कबीर’

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

रात है तो सुबह भी तो आयेगी- अनिता शर्मा झाँसी

January 25, 2022

रात है तो सुबह भी तो आयेगी मन रे तू मत हो निराशकल एक नयी सुबह आयेगी।बीतेगी दुखो की घड़ियाँछायेगा

मन के हारे हार- जितेन्द्र ‘कबीर’-

January 25, 2022

मन के हारे हार हार भले ही कर ले इंसान कोकुछ समय के लिए निराशलेकिन वो मुहैया करवाती है उसकोअपने

गलतियां दोहराने की सजा- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

गलतियां दोहराने की सजा देश में कोरोना की पहली लहरहमारी सरकारों ने विदेशों से खुद ब खुद हीबुलाई थी,जब इतनी

राजनीति के सियार- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

राजनीति के सियार पैसा किसी के हथियार है,लालच किसी का हथियार है,इसी सनातन मोह कोसत्ता तक पहुंचने की सीढ़ी बनातेआजकल

श्रेष्ठता के मानक- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

श्रेष्ठता के मानक यह गवारा नहीं समाज कोकि सिर्फ अपनी प्रतिभा, लगन औरमेहनत के आधार पर कोई इंसानसमाज में उच्चतम

किस मुगालते में हो?- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

किस मुगालते में हो? एक बात सच – सच बताओ..अभी तक नहीं हुए हो क्या तुमव्यवस्थागत अथवा व्यक्तिगतकिसी बेइंसाफी के

Leave a Comment