Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

सम्मान-डॉ. माध्वी बोरसे!

सम्मान! एक वक्त की थी यह बात,खरगोश ने कछुए का उड़ाया मजाक, कितना धीमे चलते हो तुम,कछुए को आया गुस्सा …


सम्मान!

सम्मान-डॉ. माध्वी बोरसे!

एक वक्त की थी यह बात,
खरगोश ने कछुए का उड़ाया मजाक,

कितना धीमे चलते हो तुम,
कछुए को आया गुस्सा यह बात सुन,

जंगल के जीवो ने कछुए का मजाक बनाया,
खरगोश मे और घमंड आया,

कछुए ने कहा चलो दौड़ लगाए,
खरगोश ने कहा कोई इसे बताएं,

तुम इसके बारे में सोच भी कैसे सकते,
मैं दौड़ता हूं और तुम तो सिर्फ चलते,

कछुए ने क्रोधित होकर दी चुनौती,
सभी जानवरों ने कहा तुम कर रहे हो गलती,

फिर भी प्रतियोगिता शुरू कि जाएं,
इनका कोई भ्रम दूर मिटाएं,

खरगोश तेजी से दौड़ने लगा,
कछुआ लगातार चलता चला,

खरगोश ने सोचा करता हूं कुछ देर आराम,
मैं ही विजेता होऊंगा, जानता हूं प्रणाम,

खरगोश गहरी निंद्रा में चला गया,
कछुए ने निरंतर चलकर अपने लक्ष्य को छू लिया,

कछुआ विजय, ट्रॉफी जीत, बन गया सब का चाहिता,
खरगोश की खुली नींद, सुना कछुआ हुआ विजेता,

घमंड अभिमान हुआ चकनाचूर,
खरगोश का ना बचा गुरुर,

कछुए ने कहा ,ए दोस्त, किसी को स्वयं से कम ना समझना,
जीवन में तो जरूरी है निरंतर चलते रहना,

खरगोश ने कछुए से माफी मांग,
तोड़ा स्वयं का घमंड और अभिमान,

मैं जीतूंगा सबने सोचा,
पर सबसे जरूरी है स्वयं पर भरोसा,

अनेक सीख देती है हमें यह कहानी,
सोचा दे दूं इसे कविता की जुबानी,

दुनिया तुम पर विश्वास करें ना करें,
स्वयं पर भरोसा रख आगे बढ़े,

कभी घमंड से रुक ना जाना,
प्रयत्न करने वालों का मजाक ना उड़ाना,

कब कोई अपना पा ले मुकाम,
तो करो हमेशा सबका सम्मान!!

डॉ. माध्वी बोरसे!
(स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

Rishto ka mahatva by Sudhir Srivastava

September 4, 2021

 रिश्ता की दूरियां-नजदीकियां रिश्तों का महत्व  लंबी दूरियों से नहीं मन की दूरियों से होता है, अन्यथा माँ बाप और 

Teer nadi ka By H.K Mishra

September 4, 2021

 तीर नदी का तीर नदी का दूर किनारा , कहां नहीं तुझको ढूंढा है, रात अंधेरी नदी उफनती, मिलन अंत

Jhoothon ka hai jamana by Jitendra Kabir

August 29, 2021

 झूठों का है जमाना एक बार झूठ बोल कर उसे छुपाने के लिए झूठ पर झूठ बोलते जाना, पकड़े भी

Hijab by Ajay Kumar jha.

August 26, 2021

 हिजाब. खाली जेबों की कसी मुट्ठियाँ हवा में लहराने को उतर आई है अरण्य में खिलते अग्निपुष्प से रंगे  सियार

Sirf vhi aisa Kar payega by Jitender Kabir

August 26, 2021

 सिर्फ वही ऐसा कर पाएगा इस समय जबकि बढ़ रही हैं इंसान – इंसान के बीच में नफरतें बेतहाशा हर

Mat banto Insan by indu kumari

August 26, 2021

 मत बाँटो इंसान मंदिर- मस्जिद गिरजाघर ने बाँट दिया भगवान     को मंदिर बाँटी मस्जिद बाँटी मत बाँटो  इंसान   

Leave a Comment