सब्र। सब्र पर कविता| kavita -sabra
सब्र। जब आंखें नम हो जाती है, जब आत्मा सहम जाती है, उम्मीद जिंदा नहीं रहती, जिंदगी गम से भर …
Related Posts
क्यों एक ही दिन मां के लिए
May 8, 2022
क्यों एक ही दिन मां के लिए मोहताज नहीं मां तुम एक खास दिन कीतुम इतनी खास हो कि शायद
सशक्त मां, सशक्त विश्व!
May 8, 2022
सशक्त मां, सशक्त विश्व! अत्यंत बुरे अनुभवों में से एक जो एक बच्चा देख सकता है, वह परिवार या समाज
सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास
May 8, 2022
सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास मां शब्द का विश्लेषण शायद कोई कभी नहीं कर पाऐगा, यह दो
मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं
May 7, 2022
“मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं” जिस कोख में नौ महीने रेंगते मैं शून्य
माँ तेरे इस प्यार को
May 7, 2022
माँ तेरे इस प्यार को तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास ।सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो
बीते किस्से
May 7, 2022
बीते किस्से अपनी जिंदगी के कुछ नायाब किस्से मैं सुनाती हूंलोग कहते मुझे पागल , मैं तो कलम कि दीवानी