सब्र। सब्र पर कविता| kavita -sabra
सब्र। जब आंखें नम हो जाती है, जब आत्मा सहम जाती है, उम्मीद जिंदा नहीं रहती, जिंदगी गम से भर …
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बुढ़ापे की मुंडेर डॉ. इन्दु कुमारी जन्म लिए बचपन बीते खुशियों के होंठ खिले बचपन के छोटे पौधे फूल रूप
बेटी हुई
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बेटी हुई डॉ. इन्दु कुमारी धीमी आवाज में कहते बेटी हुई। पापा देखो तेरी बेटी आईपीएस की टॉपर हुई। जिसका
मेघा रे
June 24, 2022
मेघा रे डॉ. इन्दु कुमारी मेघा रे कहां तक तुझे जाना रे मेरे संदेश को ले जाना रे जिन राहों
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जल संरक्षण
June 24, 2022
जल संरक्षण डॉ. इन्दु कुमारी जल ही जीवन है जीवन के संजीवन है इसे बचाना पुण्य कार्य यही असली जनसेवार्थ।
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“लहरों से दोस्ती महंगी पड़ी हुज़ूर ज्वार उठा ऐसा की तैरना जानते हुए भी शख्सियत मेरी किनारे लगी” भावना ठाकर