सब्र। सब्र पर कविता| kavita -sabra
सब्र। जब आंखें नम हो जाती है, जब आत्मा सहम जाती है, उम्मीद जिंदा नहीं रहती, जिंदगी गम से भर …
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महाबली हनुमंत जय जय श्री हनुमंत वीरमां अंजनी के हो तुम जायेअति पराक्रमी बचपन थे तुम्हारेबना दिया सूर्य को खिलौनाराम
कविता-खास
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अपनी किस्मत अपने हाथ! जुआरी करते हैं,किस्मत की आजमाइश,निकम्मे करते हैं,बैठे-बैठे फरमाइश,पर जीवन की हकीकत,परिश्रम करने से ही होती हैपूरी,
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