Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

सनातन धर्म की आस्था का पहला अध्याय

 सनातन धर्म की आस्था का पहला अध्याय  सौराष्ट्र के वेरावल के प्रभात क्षेत्र के मध्य में समुद्र किनारे कई मंदिर …


 सनातन धर्म की आस्था का पहला अध्याय

 सौराष्ट्र के वेरावल के प्रभात क्षेत्र के मध्य में समुद्र किनारे कई मंदिर बने हुए हैं जिसमे से प्रमुख मंदिर सोमनाथ हैं ,हरेक देशवासी की अपने जीवन काल में एकबार सोमनाथ दर्शन की इच्छा होती ही है। वेरावल के प्रभात क्षेत्र के मध्य में समुद्र किनारे कई मंदिर बने हुए हैं जिसमे से प्रमुख मंदिर सोमनाथ हैं ,हरेक देशवासी की अपने जीवन काल में एकबार सोमनाथ दर्शन की इच्छा होती ही है

अभी गुजरात में श्रावण मास चल रहा हैं,उत्तर के राज्यो में  नया महीना पूर्णिमा के बाद आने वाली एकम के दिन होती हैं लेकिन गुजरात में अमावस्या के बाद की एकम को होता हैं।सावन के महीने में शिव पूजा का खास महात्म्य होता हैं,और सोमनाथ महादेव जी तो बड़ी आस्था से पूजा–अर्चना की जाती हैं।

  वैसे सोमनाथ की स्थापना के पीछे बहुत ही रोचक इतिहास हैं।राजा दक्ष की २७ पुत्रियों से शादी चंद्र यानी कि सोम से हुई थी,अपनी सभी रानियों में से रोहिणी को ज्यादा प्यार और मान सम्मान देने की वजह से बाकि की २६ रानियाँ दुःखी रहती थी।उन्हों ने अपने पिता दक्ष को शिकायत कर दी ।राजा दक्ष ने चंद्र को शाप दिया कि जिस सुंदर शरीर का उसे गर्व हैं उसका धीरे धीरे क्षय हो जायेगा।शापित चंद्र  अपने क्षय होते शरीर देख डर के मारे  ब्रह्माजी के पास गए,ब्रह्मा जी ने उनको प्रभास की पवित्र जगह पर जा शिवलिंग बनने के वहां महामृत्यंजय मंत्र का जप करने के लिए बोला। और चंद्रदेव ने शिवजी के महामृत्युंजय के करोड़ों जाप किए। अब शाप को समाप्त तो करना असंभव होता हैं तो शिवजी ने उसके असर कम कर दिया की चंद्र का  महीने के पहले पक्ष में  क्षय होगा  और दूसरे पक्ष में विकास होगा ताकि पूर्ण क्षय से बच जायेंगे। जहां चंद्रदेव  ने शिव लिंग बना पूजा की थी वही भगवान शिव का मंदिर बनाया  जिसे सोमनाथ मंदिर कहा गया क्योंकि चंद्र को सोम भी कहा जाता हैं।इन्हे प्रभास पाटन के नाम से भी जाना जाता हैं।वहा तीन नदियों का संगम स्थान हैं,हिरण,कपिला और सरस्वती ,जिसमे स्नान करने का बहुत धार्मिक  महात्म्य हैं। 

एक और भी कथा हैं,भालुका  तीर्थ में  जब श्री कृष्ण आराम कर रहे थे तब उनके पांव को हिरण समझ शिकारी ने तीर मारा था, जिसके बाद वे अपने स्वधाम  सिधारे थे । यहां   एक कृष्ण मंदिर भी हैं।

 १२ ज्योतिर्लिंगों में ये पहला  ज्योतिर्लिंग हैं।इस मंदिर की निर्माण स्वयं श्री चंद्रदेव ने करवाया था,जिसका उल्लेख ऋग वेद  और अन्य ग्रंथों में भी  हैं। ईसा पूर्व से मंदिर का अस्तित्व हैं।

 सोमनाथ हिन्दुओं के साथ हुए यवनो के आक्रमण से हुए उत्थान और पतन  का सटीक  उदाहरण हैं।यह वैभवशाली मंदिर को कई बार खंडित किया गया और फिर निर्मित किया गया।महहमद घोरी ने तो १७ बार तोड़ा था और  संपत्ति लूट ले गया था। इसके अलावा और भी हमले सोमनाथ मंदिर पर हुए थे।गजनवी के अलावा सिंध के अरबी गवर्नर जुनायद ने खंडन किया और पुन: निर्माण किया गया।

    इतिहास गवाह हैं,अरब यात्री अल– बरूनी ने लिखा है की जब गजनवी ने मंदिर पर ५००० साथियों के साथ लूटा तब  हजारों लोग मंदिर में पूजा कर रहे थे उनको भी मार दिया था। जो बिना हथियार के भी उनकी सैन्य का सामना कर रहे थे।तब गुजरात के राजा भीमदेव ने पुन: निर्माण करवाया था।८१५ ईसवी में तीसरी बार पुनर्निर्माण प्रतिहार राजा नागभट्ट ने  करवाया था ।फिर दिल्ली के सुल्तान ने गुजरात पर हमला किया तो फिर मंदिर तोड़ दिया जिसे मालवा के राजा भोज ने पुनरोद्धार करवाया था।

 बार बार मंदिर खंडित कर दिया गया किंतु शिवलिंग को आंच नहीं आई थी लेकिन ईसवी १३०० में अल्लादीन की सेना ने शिवलिंग को खंडित किया और इसके बाद कई बार खंडित किया। माना जाता है की आगरा के किले में रखे देवद्वार सोमनाथ मंदिर के हैं,१०२६ में गजनवी लूटपाट के दौरान इन्हे भी उठा ले गया था।सौराष्ट्र के  माजी मुख्य मंत्री उच्छांगराय ढेबर ने १९ अप्रैल १९४० में यहां उत्खनन करवाया था वहां पुरातत्व विभाग को ब्रह्मशीला पर ज्योतिर्लिंग प्राप्त हुआ था जो स्थापित हैं।सौराष्ट्र के जामनगर के राजा दिग्विजयसिंह ने  १९५० में मंदिर की आधारशिला रखी थी।मंदिर १९६२ में पूर्ण रूप से निर्मित हो गया था।जिसमे सरदार पटेल और डॉ राजेंद्रप्रसाद की भूमिकाएं अहम थी।

 सब से अदभुत बात हैं मंदिर के दक्षिण  भाग में बना बाणस्तंभ है,जिसके ऊपरी हिस्से में एक सांकेतिक  तीर का निर्माण  हैं जिसका अर्थ हैं कि सोमनाथ मंदिर और दक्षिण ध्रुव के बीच कोई भी भूभाग नहीं हैं।(आसमंद्रांत दक्षिण ध्रुव पर्यंत अबाधित ज्योतिर्मार्ग) मंदिर के पृष्ट भाग में भी प्राचीन मंदिर हैं जिसे देवी पार्वती जी का मंदिर माना जाता हैं।

नेहरू जी ने जीर्णोद्धार का विरोध किया था किंतु सरदार पटेल की कोशिशों से जीर्णोद्धार हो गया।साहित्यकार और समाज सुधारक कैनैयालाल मुंशी ने लिखा हैं ,”मेरा स्पष्ट मानना था कि सोमनाथ का मंदिर कोई प्राचीन स्मारक नहीं,बल्कि प्रत्येक भारतीय के हृदय में  स्थित पूजास्थल था जिसका पुन:निर्माण करने के लिए अखिल राष्ट्र प्रतिबद्ध था” क. मा. मुंशी के प्रयास और सौराष्ट्र की जनता के योगदान से पुन:निर्माण हो गया।वैसे सोमनाथ की ऐतिहासिक,सामाजिक और धार्मिक महहत्ता का कोई जोड़ नहीं हैं

About Author

जयश्री बिरमी सेवानिवृत शिक्षिका  अहमदाबाद

जयश्री बिरमी

सेवानिवृत शिक्षिका 
अहमदाबाद

Related Posts

Vartman Gujrat ka RajKaran by Jay Shree birmi

September 30, 2021

 वर्तमान गुजरात का राजकारण एक ही रात में गुजरात  के मुख्यमंत्री श्रीमान रुपाणी का राजत्याग करना थोड़ा आश्चर्यजनक  था किंतु

Aap beeti by Sudhir Srivastava

September 30, 2021

 आपबीतीपक्षाघात बना वरदान        सुनने में अजीब लग रहा है किंतु बहुत बार जीवन में ऐसा कुछ हो

Dekhein pahle deshhit by Jayshree birmi

September 29, 2021

 देखें पहले देशहित हम किसी भी संस्था या किसी से भी अपनी मांगे मनवाना चाहते हैं, तब विरोध कर अपनी

Saari the great by Jay shree birmi

September 25, 2021

 साड़ी द ग्रेट  कुछ दिनों से सोशल मीडिया में एक वीडियो खूब वायरल हो रहा हैं।दिल्ली के एक रेस्टोरेंट में

Dard a twacha by Jayshree birmi

September 24, 2021

 दर्द–ए–त्वचा जैसे सभी के कद अलग अलग होते हैं,कोई लंबा तो कोई छोटा,कोई पतला तो कोई मोटा वैसे भी त्वचा

Sagarbha stree ke aahar Bihar by Jay shree birmi

September 23, 2021

 सगर्भा स्त्री के आहार विहार दुनियां के सभी देशों में गर्भवती महिलाओं का विशेष ख्याल रखा जाता हैं। जाहेर वाहनों

Leave a Comment