Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

सदा पूजनीय प्रभु दत्तात्रेय

सदा पूजनीय प्रभु दत्तात्रेय ऋषि अत्रि और सती अनसूया की सर्व गुण संपन्न संतान यानि कि प्रभु दत्तात्रेय।वैदिक काल के …


सदा पूजनीय प्रभु दत्तात्रेय

सदा पूजनीय प्रभु दत्तात्रेय
ऋषि अत्रि और सती अनसूया की सर्व गुण संपन्न संतान यानि कि प्रभु दत्तात्रेय।वैदिक काल के सप्त ऋषियों में से एक थे ऋषि अत्रि ,जो ’अ’ का मतलब नहीं और त्रि का मतलब सत्व, रजो और तमो गुण से परे, माने कि दुनियादारी से दूर ,सिद्ध ऋषि अत्रि।अनसूया जो महासती थी जिसे स्त्री सहज इर्षा द्वेष छू नहीं गई थी।

एक बार त्रिदेव ब्रह्मा,विष्णु और महेश ने देवी अनसूया के सतीत्व की परीक्षा लेने की ठानीऔर वे तीनों अत्रि ऋषि के आश्रम में भिक्षा लेने उपस्थित हुए और विवस्त्र अवस्था में भिक्षा दान की मांग की।ये एक सती के लिए अति कठिन कार्य था लेकिन भिक्षा तो देनी ही थी।तब अपने सतीत्व के बल से तीनों को बालक बना दिया और भिक्षा दे उन्हे तृप्त किया।तीनों देवताओं ने उनके मातृरूप को नमन किया और उन्ही की कोख से जन्म लेने की मनीषा व्यक्त की,तब दत्तात्रेय जो त्रिदेव के अंशावतार थे, उनका जन्म हुआ।महर्षि अत्रि की भी वही भावना थी कि उनके संतान में ब्रह्मा जैसा सर्जनहार हो,विष्णु जैसा पालनहार हो और विसर्जन करता शिव जैसे शक्तिरूप गुण हो।अत्रि ऋषि के पुत्र अत्रेय कहलावायें जिनका नामाभिधान दत्तात्रेय हुआ।माघ मास की शुक्ल चतुर्दशी के दिन उनकी जन्म जयंती को उत्साह पूर्वक मनाया जाता हैं।
भगवान दत्तात्रेय के हाथ में सर्जक देव ब्रह्मा जैसे कमंडल और माला हैं।कमंडल का पानी जीवन का प्रतीक हैं और माला भक्ति का प्रतीक हैं जो जीवन को प्राणवान बनाने के लिए आवश्यक होती हैं।पालकदेव विष्णु के प्रतीक रूप शंख और चक्र हैं जो शंख के जैसे प्रबुद्ध और तेजस्वी विचार का उद्घोष कर चक्र के जैसे विश्व ने फिरता हैं और जगत को श्रेय के मार्ग पर ले जाता हैं।वैसे ही शिव का त्रिशूल और डमरू भी हैं संहार के साथ साथ संगीत का भी सूचक हैं।जीवन में से जीर्णता को निकाल नवसर्जन के संगीत को फैलाता हैं।
भगवान दत्तात्रेय को जिस जिस से भी शिक्षा मिली उन सभी को गुरु पद पर स्थापित किया हैं उन्हों ने।उनके २४ गुरु थे जिसमे पृथ्वी,वायु,आकाश,जल, अग्नि,सागर,सूर्य,चंद्र,हाथी, श्वान,अजगर,हिरण,भ्रमर,
तितली, मधुमक्खी,बगुला, गिद्ध,कबूतर,कोयल,बालक,कन्या आदि है।
इन्ही गुरुओं से उन्हे जीवन में क्षमा,अनासक्ति,तेजस्विता,प्रसन्नता,गंभीरता,अपरिग्रह,समदृष्टि,समर्पण की भावना,त्याग,स्वावलंबन और मधुर वाणी की शिक्षा मिली थी।वैसे भी सच्चा सनातनी अपने पर उपकार करने वाले सभी को ही देवतुल्य मानते हैं।उनका सम्मान करते हैं। ॐ नम: दत्तात्रेय भगवान।

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

Saundarya sthali kalakankar by vimal kumar Prabhakar

October 8, 2021

 सौन्दर्यस्थली कालाकाँकर  प्राकृतिक सौन्दर्य की सुरम्यस्थली कालाकाँकर में मैंनें अपने जीवन के सुखद दो वर्ष बिताएँ हैं । मैं बी.एच.यू

Shakahar kyon? by Jayshree birmi

October 7, 2021

 शाकाहार क्यों? कुछ लोग के मन में हमेशा एक द्वंद होता रहता हैं कि क्या खाया जाए,शाकाहार या मांसाहर इनका

Ek bar phir sochiye by jayshree birmi

October 5, 2021

 एक बार फिर सोचिए आज शाहरुख खान का बेटा हिरासत में पहुंचा हैं ,क्या कारण हैं?शाहरुख खान ने एक बार

Gandhivad Darshan ka samgra avlokan by Satya Prakash Singh

October 1, 2021

 गांधीवाद दर्शन का समग्र अवलोकन-    “गांधी मर सकता है लेकिन गांधीवाद सदैव जिंदा रहेगा” अहिंसा के परम पुजारी दर्शनिक

Rajdharm ya manavdharm by jayshree birmi

October 1, 2021

 राजधर्म या मानवधर्म कौन बड़ा राज्यधर्म और मानवधर्म में किसका पालन करना महत्वपूर्ण हैं ,ये एक बड़ा  प्रश्न हैं।अगर इतिहास

Pramanikta by Jay Shree birmi

September 30, 2021

 प्रामाणिकता भ्रष्टाचार और अप्रमाणिकता सुसंगत नहीं हैं।भ्रष्टाचारी भी उसको रिश्वत देने वाले की ओर प्रमाणिक हो सकता हैं, तभी वह

Leave a Comment