Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, lekh

सत्ता की बात साहित्य के साथ

 “सत्ता की बात साहित्य के साथ” भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर “सच्चाई के सारे सिरे उधेड़कर शब्दों की नक्काशी से साफ़ …


 “सत्ता की बात साहित्य के साथ”

भावना ठाकर 'भावु' बेंगलोर
भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर

“सच्चाई के सारे सिरे उधेड़कर शब्दों की नक्काशी से साफ़ सुथरी चद्दर बुनना चाहता है लेखक, अल्फाज़ो को रोंदने वाली तलवार जो तरकश में पड़ी रहे तो इतिहास रचना चाहता है लेखक”

पाठक एक आस लगाए बैठा है लेखकों से, की दुनिया में हो रही गलत गतिविधियों के ख़िलाफ़ कोई लिखें, आवाज़ उठाएं और कुर्सी का गलत इस्तेमाल करने वालों की पगड़ी उछाल दी जाए। पर कोई नहीं जानता ऐसे बेबाक लेखकों की आवाज़ दबाने वालों की तादात इतनी है की लेखक चाहकर भी अपनी कलम को मुखर नहीं कर पा रहा। खासकर महिला लेखिकाओं को एक बंदीश में रहकर लिखना पड़ता है। या कुछ भी बोलने से पहले सौ बार सोचना पड़ता है। क्यूँकि सत्ताधारी और दमनकारी जानते है महिलाओं की आवाज़ को बखूबी दबाना।

एक ज़माना था जब लेखकों की कलम तख़्तों ताज पलटने की ताकत रखती थी। लेखक बेखौफ़ अपनी कलम चलाते झूठ के ढ़ेर के नीचे दबी सच्चाई को ढूँढ निकालकर बिंदास लिख लेते थे। हर कुर्सी पर विराजमान किरदार कलम की ताकत से वाकिफ था, एक डर रहता था शब्दों की मार का। और एक आज का दौर है, जहाँ सच लिखने वालों की कलम को मरोड़ दी जाती है। 

बेशक आज भी कलम शमशीर की तरह धारदार है, पर एक ख़ौफ़ पल रहा है सच लिखने वालों के मन में। सियासतों की दादागिरी और हुक्मरानों के मुखोटे का पर्दाफ़ाश करने हेतु दो हर्फ़ लिखने वाले लेखक या पत्रकार को मौन करा दिया जाता है। सच पचाने की हिम्मत नहीं हुक्मरानों में, शायद नीयत में उनकी खोट है इसलिए सच लिखने वालें बरदास्त नहीं। उनके झूठे भड़काऊँ भाषणों का शोर इतना बुलंद होता है की सच्चाई की गूँज और शब्दों की गरिमा दब जाती है, ऐसे में कोई लेखक अपने हुनर और अपनी कलम की ताकत से सच की जड़ तक जाकर कैसे गलत गतिविधियों को आईना दिखा सकता है। आज जिनके हाथों में सत्ता होती है, उनकी आवाज़ पर दुनिया चलती है, ऐसे में लेखक की कलम की कहाँ चलती है। पाठकों को आज के परिप्रेक्ष्य में दूध का दूध नहीं, पानी ही मिलेगा। क्यूँकि अब लेखक शब्दों को मथ कर सच का मक्खन नहीं निकालता, जो सबको अच्छा लगे वही सुनहरे रैपर में लपेटकर परोस देता है। “सच का मुँह काला झूठों की बोलबाला का ज़माना जो है”

भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर


Related Posts

अत्यधिक मूल्यवान है ज्ञान

February 24, 2022

अत्यधिक मूल्यवान है ज्ञान! हर्तुर्याति न गोचरं किमपि शंपुष्णाति यत्सर्वदाह्यर्थिभ्यः प्रतिपाद्यमानमनिशं प्राप्नोति वृद्धिं पराम् ।कल्पान्तेष्वपि न प्रयाति निधनं विद्याख्यमन्तर्धनयेषां तान्प्रति

विलंब स्वयं पर सितम!

February 24, 2022

विलंब स्वयं पर सितम! समय नष्ट करता रहे, समय सबसे मूल्यवान,जीवन मुश्किल हो तभी, मिले न फिर आराम ,जीवन में

गुजरात में ऐतिहासिक फैसला

February 24, 2022

 गुजरात में ऐतिहासिक फैसला अहमदाबाद में हुए विस्फोट के 49 गुनहगारों को हत्या और हत्या की साजिश में दोषी करार

पारंपरिक ऊर्जा का विकल्प गोबर धन

February 24, 2022

पारंपरिक ऊर्जा का विकल्प गोबर धन! विंड मिल,सौर ऊर्जा और जल प्रवाह से मिलती ऊर्जा आदि से बिजली प्राप्त की

आज फिर विभीषण जाग उठा

February 24, 2022

आज फिर विभीषण जाग उठा पंजाब की राजनीति आज कल कुछ ज्यादा ही प्रवाही हो गई हैं।कैप्टन अमरिंदरसिंह की अवमानना

Gujrat ka gaurav-jayshree birmi

February 24, 2022

गुजरात का गौरव देश के अग्रणी राज्यों में गुजरात की भी गिनती होती हैं।चाहे वह विकास हो,राजनीति हो या उद्योग

Leave a Comment