Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

सतत विकास-डॉ. माध्वी बोरसे!

सतत विकास! करें गरीबी का निवारण, मिलकर बचाए पर्यावरण,हो समाज मैं आत्मनिर्भरता,बिना फर्क किए हो लैंगिक समानता! कोई व्यक्ति न …


सतत विकास!

सतत विकास-डॉ. माध्वी बोरसे!
करें गरीबी का निवारण,

मिलकर बचाए पर्यावरण,
हो समाज मैं आत्मनिर्भरता,
बिना फर्क किए हो लैंगिक समानता!

कोई व्यक्ति न भूखा सोए,
उद्योग, नवाचार, बुनियादी सुविधाएं,
उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली,
लक्ष्य हेतु हो हमारी भागीदारी!

गुणवत्तापूर्ण हो शिक्षा,
जलीय और थलीय जीवो की सुरक्षा,
स्वच्छ जल और स्वच्छता,
जलवायु परिवर्तन आपदा से सामना करने की क्षमता!

शांति, न्याय और हो सशक्त संस्थाएं,
संवहनीय शहर और समुदाय,
असमानताओं में कमी की चुनौती,
उर्जा हो प्रदूषण मुक्त और सस्ती!

सतत विकास देश में लाए,
जानिए इसकी सारी विशेषताएं,
भविष्य की पीढ़ी की भी पूरी हो आवश्यकताएं,
हम सब मिलकर भारत देश को विकसित बनाएं!!

डॉ. माध्वी बोरसे!
(स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

संवेदना- डॉ इंदु कुमारी

December 21, 2021

संवेदना मानव हम कहलाते हैं क्या हमने अंतस् मेंकभी झांककर देखा हैस्वार्थ में सदा जीते रहेपर पीड़ा कभी देखा हैअगर

सफर-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 20, 2021

सफर! बहुत समय से बैठे हैं, घर के अंदर, चलो करें, शुरू एक नया सफर,घूमे गांव और अलग-अलग शहर,महसूस करें,

कविता अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस 2021-किशन सनमुखदास

December 20, 2021

कविताअंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस 2021 अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस सबने मिलकर दिव्यांगजन को उत्साह देखकर मनाए हैं राष्ट्रपति प्रधानमंत्री ने अपने संदेश

कविता- महिला राजनीति क्षमता निर्माण-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी

December 20, 2021

कविता महिला राजनीति क्षमता निर्माण राष्ट्रीय महिला आयोग ने राजनीति में महिलाओं के लिए क्षमता निर्माण करनेशी इज ए किंग

मुबारक हो नया साल-अजय प्रसाद

December 19, 2021

मुबारक हो नया साल लो फ़िर से नया साल मुबारक हो ज़िंदगी ये खस्ताहाल मुबारक हो। बस चंद रोज की

माँ- R.S.meena Indian

December 19, 2021

कविता माँ मैं व्रत नहीं करता ,कहीं माँ जैसी सूरत नहीं । माँ बाप को भूल जाऊ,ऐसा कभी मुहूर्त नहीं

Leave a Comment